“मैं भगवान को किसी भी तरह से फिरौती की तरह मेरी सफलता में शामिल नहीं करता जो भी उसकी इच्छा है वो मेरा रास्ता है। मैं क्षणों के साथ खड़ा हूँ समय के साथ नहीं।”- अक्षय कुमार
बैंकॉक के एक होटल में वेटर से लेकर बॉलीवुड के खिलाड़ी बनने तक का सफर सफलता से भरा रहा। फ़िल्मी जगत से ताल्लुक नहीं रखने के बावजूद भी कई असफलताओं के बाद अक्षय कुमार ने कामयाबी को छुआ।
5 कारण जिनकी वजह से अक्षय कुमार का सम्मान करना चाहिए
प्रेरणा देना-
अक्षय कुमार समाज की भलाई करना अच्छी तरह से जानते हैं। उन्होंने नेत्रहीन लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने की निः शुल्क क्लास शुरू की। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने मुंबई में स्थित अपने मार्शल आर्ट्स के क्लास में महिलाओं को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग भी दी। एक राज़ की बात बताते हैं अक्षय कुमार ने एक लड़की को इम्प्रेस करने के लिए मार्शल आर्ट्स सीखा था और धीरे-धीरे मार्शल आर्ट्स ही उनका प्यार बन गया और उन्हें इसकी आदत हो गयी।
एक सच्चा देशभक्त-
अक्षय कुमार का मानना है की हमारे वीर जवानों और उनके परिवार के बारे में सोचना केवल हमारी सरकार का काम नहीं है और ‘भारत के वीर’ नाम की वेबसाइट को लॉन्च करके उन्होंने यह सिद्ध भी कर दिया। वो कई तरह के डोनेशन भी देते हैं और हर तरह से ज़रूरतमंद लोगों की मदद करते हैं। ऐसा कोई नहीं होगा जो उनकी दयालुता के बारे में नहीं जनता होगा।
अपने काम से हमेशा जागरूकता फैलाते हैं –
उनका काम ही उनके बारे में सब कुछ बता देता है और उन्हें हमेशा और अच्छा करने की चाह लगी रहती है। हाल ही में उनकी फिल्म ‘पैडमैन’ आयी है जिससे उन्होंने देशभर में पीरियड्स के बारे में जागरूकता फैलाई।
बड़ों को आदर देते हैं-
एक सफल अभिनेता होने के बाद भी वो अपने से बड़ों के चरण स्पर्श करने से नहीं कतराते। उनके जीवन का मूलमंत्र है की इस दुनिया में सिखने की सबसे अच्छी जगह बड़ों के चरण में है। अक्षय ने अपने प्रोडक्शन का नाम भी अपने पिता के नाम पर रखा है।
स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है-
अक्षय फिल्म जगत के सबसे फिट रहने वाले अभिनेता हैं। ये 6 पैक एब्स बनाने पर फोकस नहीं करते बस फिट रहते हैं और अपने फैंस को भी फिट रहने की सलाह देते हैं।इनका मानना है की फिट रहने के लिए हेल्दी खाना खाएं और स्विमिंग, योग या मार्शल आर्ट्स से जुड़ें।
चित्र श्रोत: Firstpost, MensXP.com, scroll.in, BollySpice.com, Pinterest, My Fitness Hack.

