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ब्रेस्ट कैंसर से जुडी कुछ ज़रूरी बातें जिनपर हर महिला को ध्यान देना चाहिए

Ankita Kumari | April 18, 2018

ब्रेस्ट कैंसर से जुडी कुछ ज़रूरी बातें जिनपर हर महिला को ध्यान देना चाहिए

कैंसर आमतौर पर कोशिकाओं के अधिक बढ़ जाने की वजह से होता है। आगे जाकर ये असामान्य कोशिकाएं क्लस्टर बनाती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। धीरे धीरे यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगता है जो बहुत हानिकारक होता है। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में बहुत ही आम समस्या है जो काफी खतरनाक भी है पर सही समय पर चेकउप कराने और दवाइयां लेने से ये ठीक भी हो सकता है।

आइये जानते हैं ब्रेस्ट कैंसर के बारे में कुछ ध्यान देने वाली बातें।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण-

 

ब्रेस्ट कैंसर होने की वजह-

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने के कई वजह हैं। 30 की उम्र के बाद पहली बार प्रेगनेंट होना, दिन भर में 2 या 3 बार एल्कोहॉल लेना, मेनोपॉज़ के बाद अधिक वजन बढ़ जाना, पीरियडस का उम्र से पहले होना या मीनोपॉज का उम्र से देर से होना इत्यादि ब्रेस्ट कैंसर होने के कुछ कारण हैं। यदि आपके परिवार के किसी करीबी को पहले से ब्रेस्ट कैंसर तो भी इसे होने की संभावना बढ़ सकती है।

 

ब्रेस्ट कैंसर के प्रकार-

ब्रेस्ट कैंसर कई प्रकार के होते हैं और सबसे आम इनवेसिव डक्टल कार्सिनोवा है। यह दूध की नालियों में बन कर स्तन के आस पास की कोशिकाओं पे आक्रमण करते हैं। लोब्यूलर कार्सिनोवा इन सीटू भी एक प्रकार का कैंसर है जिसमे कैंसर सेल्स दूध बनने वाली ग्रंथियों में विकसित होते हैं। डक्टल कार्सिनोमा भी एक नॉन-इनवेसिव कैंसर है।

 

ईलाज-

दवाइयों और टेक्नोलॉजी के विकास के साथ बेस्ट कैंसर का इलाज भी दिन प्रतिदिन और बेहतर होता जा रहा है। कैंसर का इलाज किस तरीके से होगा ये उसके स्टेज पर निर्भर करता है। इसके इलाज का सबसे आम तरीका सर्जरी है पर इसके साथ ही साथ रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और हॉर्मोन थेरेपी जैसे तरीकों को भी अपनाया जाता है।

 

प्लानिंग-

एक पूरी टीम आपके ब्रेस्ट कैंसर के स्टेज पर चर्चा करती है और कैंसर के ग्रेड, साइज और जगह का पता लगाती है। फिर ओंकोलजीस्ट और थेराप्यूटिक रेडियोग्राफर मिल कर सारी तैयारियां करते हैं। इलाज केवल कैंसर इन्फेक्टेड भाग में किया जाता है जिससे उसके आस पास केभाग जैसे दिल और फेफड़े पर रेडिएशन का प्रभाव न पड़े। कैंसर ट्रीटमेंट के बाद पूरी तरह ठीक होने में केवल कुछ ही हफ़्तों का वक़्त लगता है।

 

चित्र श्रोत: continentalhospitals, cancerresearchuk,hindustantimes,momjunction,nationaldailyng