गॉल ब्लैडर में स्टोन के कारण, लक्षण और उपचार

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पथरी होना आजकल एक आम सी बात हो गयी है, किसी को किडनी में तो किसी को गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या हो रही है। कुछ लोग पथरी की समस्या को नज़रअंदाज कर देते हैं पर हम आपको सलाह देते हैं की गलती से भी ऐसा ना करें क्योंकि गॉल ब्लैडर की पथरी आगे चलकर कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकती है।

गॉल ब्लैडर में जब कोलेस्ट्रॉल अच्छी तरह घुल नहीं पाते हैं तो वे पथरी का रूप ले लेते हैं। छोटे आकार वाली पथरी तो शरीर से आसानी से निकल जाती है पर बड़े आकार वाली पथरी खतरनाक होती है।

गॉल ब्लैडर में पथरी होने के कारण स्पष्ट नहीं होते हैं, पर डॉक्टरों का मानना है की निम्न कारणों से पथरी बन सकती है-

कोलेस्ट्रॉल का अधिक होना –

सामान्यतः शरीर में अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल का होना खतरनाक होता है क्योंकि अत्याधिक कोलेस्ट्रॉल से कोलेस्टेसिस हो सकता है जो मूल रूप से पित्त प्रवाह को धीमा कर देता है। यह स्थिति हाइपरकोलेस्टेरोलिया (रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल) से भी जुड़ी हुई है जो गॉल स्टोन के बनने में मदद करता है।

अधिक बिलीरुबिन का उत्पन्न होना

बिलीरुबिन एक रसायन है जो हमारे शरीर में उस वक़्त बनता है जब जब हमारा लीवर पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है। कुछ स्थितियां जैसे की क्षतिग्रस्त लीवर और रक्त विकार में हमारा लीवर जरुरत से ज्यादा बिलीरुबिन उत्पन्न करने लगता है जो आगे जाकर पत्थर का रूप ले सकता है

गॉल ब्लैडर का खाली न होना –

गॉल ब्लैडर कई बार पूरी तरह से खाली नहीं होता है, ऐसा होने पर पैट में पित्त केंद्रित हो जाता है जो गॉल स्टोन बन जाता है।

कभी कभी गॉल ब्लैडर में पथरी होने के बाद भी हमें इसका पता नहीं चलता पर जब तक वो पथ्थर गॉल ब्लैडर में ब्लॉकेज उत्पन्न नहीं करने लगता या जब तक परेशानी करने लगता।

 

गॉल ब्लैडर में पथरी होने के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-

  • आपके पेट के ऊपरी दाएं भाग में अचानक और तेजी से दर्द होना
  • आपकी छाती के नीचे, पेट के बीच में तेज दर्द होना
  • कंधे के पिछले हिस्से में दर्द
  • आपके दाहिने कंधे में दर्द
  • उलटी होना

गॉल ब्लैडर में पथरी होने के खतरे को घटाने के लिए नियमित रूप से आहार लें, कभी भी खाना स्किप ना करें। अगर वजन घटाना चाह रहे हैं तो हड़बड़ाएं नहीं साथ ही साथ अपने वजन को भी कंट्रोल में रखें। वजन ज्यादा बढ़ने से स्टोन होने का खतरा बढ़ता है।

 

गॉल ब्लैडर में स्टोन होने पर निम्नलिखित टेस्ट करवाए जाते हैं –

अल्ट्रासाउंड-

अल्ट्रासाउंड स्कैन का प्रयोग शरीर के अंदर से लाइव छवियों को लेने के लिए किया जाता है जो की गॉल ब्लैडर में पथरी के सटीक स्थान का पता लगा सकता है, यह मुख्य रूप से पथरी की उपस्थिति का पता करने के लिए किया जाता है।

सीटी स्कैन –

सीटी स्कैन डॉक्टर द्वारा उन छोटे कैलकुलस का पता लगाने के लिए किया जाता है जो गॉल ब्लैडर के अल्ट्रासाउंड स्कैन में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है, जिसके पता लगने के बाद डॉक्टर उपचार शुरू कर सकता है।

ब्लड टेस्ट-

ब्लड टेस्ट आसानी से कैलकुलस के कारण होने वाले किसी भी संक्रमण को दिखा सकते हैं। कम्पलीट ब्लड काउंट , या सीबीसी परीक्षण, संक्रमण की पुष्टि करने में मदद कर सकता है। ऐसे संक्रमण को शुरुआती चरण में ही रोकना जरूरी होता है, इसका  इलाज ज्यादातर एंटीबायोटिक्स से किया जाता है

ईलाज –

गॉल ब्लैडर को हटाने की सर्जरी-

यदि गॉल ब्लैडर में स्टोन बार-बार बनता ही रहता है तो डॉक्टर आपको सर्जरी से अपने गॉल ब्लैडर को हटाने की सलाह दे सकता है। गॉल ब्लैडर के हटाए जाने के बाद पित्त सीधे आपके लीवर से छोटी आंत में बहने लगती है। लोगों को आमतौर पर गॉल ब्लैडर हटाने के बाद कोई समस्या नहीं होती है क्योंकि हमारा लीवर पर्याप्त मात्रा में पित्त बना सकता है। सर्जरी के बाद लोगों को कम फैट वाला खाना खाने की सलाह दी जाती है।

दवाइयों का सेवन-

दवाइयों का सेवन करके भी गॉल ब्लैडर स्टोन का इलाज किया जा सकता है। इसके लिए मुख्य रूप से एक्टिगाल (ursodiol) नाम की दवा का उपयोग किया जाता है। लेकिन स्टोन के आकार के आधार पर इसे शरीर से निकलने में महीनों या सालों लग सकते हैं।

चित्र श्रोत: Pixabay, Wikimedia

 

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