चाहे कोई धूम्रपान का आदि हो या ना हो, लंग कैंसर किसी को भी हो सकता है | इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं शरीर की कोशिकाओं का असंतुलित हो जाना | जब कोशिकाओं की सामान्य कार्यक्षमता में किसी तरह की बाधा आ जाती तो ट्यूमर (फोड़ा ) बन जाता हैं | फेफड़ों का कैंसर जानलेवा होता हैं और ऐसा माना जाता हैं की इससे ग्रसित इंसान 5 साल से ज्यादा नहीं जी पाता | तो कभी भी इसके लक्षणों को नज़रअंदाज़ ना करें –
जिद्दी खांसी
एक बहुत ही साधारण दिखने वाला लक्षण कभी-कभी घातक हो सकता हैं | खांसी ज्यादातर एलर्जी या फिर बाहरी पर्यावरणीय कारकों की वजह से हो सकता हैं | चाहे सूखी हो या बलगम वाल, अगर खांसी बहुत लम्बे समय तक जैसे 2 हफ्ते या उससे ज्यादा तक पीछा नहीं छोड़ती तो ये कैंसर का अंदेशा हो सकती हैं और इसका इलाज तुरंत होना चाहिए |
सांस लेने में परेशानी
सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं जैसे संक्रमित फेफड़े, सांस की बीमारी, कार्सिनोमा में तरल पदार्थ लेकिन ऐसे किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ ना करें क्योंकि ये लंग कैंसर हो सकता हैं |
त्वचा के रंग में बदलाव
आपकी त्वचा ही आपको फेफड़ों के कैंसर के शुरवाती संकेत देगी और आप इस पर ध्यान दें | आपके कंधो और कूल्हों पर लाल और हल्के बैंगनी रंग के धब्बे दें जाने वाली एक सूजन-सम्बन्धी बीमारी, फेफड़ों के कैंसर का एक शुरुवाती लक्षण हैं | आपको आँखों, हाथों, पैरों की त्वचा के रंग में भी बदलाव नज़र आएगा | हो सकता हैं ये किसी अन्य प्रकार का कैंसर हो लेकिन फेफड़ों के कैंसर का ये मुख्य लक्षण हैं |
हड्डियों में दर्द
कैंसर कोशिकाएं जब हड्डियों की तरफ रूख करती हैं तो ये उन पर दबाव डाल, हड्डियों को गंभीर दर्द पहुँचती हैं | अगर आपको भी हड्डियों में दर्द महसूस होता हैं और रात में ये दर्द और बढ़ जाता हैं तो ये लंग कैंसर हो सकता हैं |
खून आना (bleeding)
अंदरूनी और बाहरी ब्लीडिंग को फेफड़ों का कैंसर माना जा सकता हैं | संक्रमित फेफड़ों को सांस लेने में मुश्किल होती हैं और ये अपने आस-पास तरल पदार्थ की जमावट कर देते हैं | ल्यूकीमिया की वजह से फेफड़े ऑक्सीजन पंप करते हैं और ब्लीडिंग और नील पड़ने का कारण बनते हैं | तो अगर खांसी, पेशाब या मल में बिना किसी कारण के खून आए तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें |
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