विवाह के बाद हर युवती माँ बनने का सपना देखती है। जिस पल यह सपना पूरा होने की सूचना किसी भी युवती को मिलती है, उसी पल से उसका जीवन बदल जाता है। यह बदलाव युवती के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। इसी के साथ उस महिला को समाज और परिवार से अनेक प्रकार की सलाहें और सुझाव मिलने शुरू हो जाते हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में वास्तविकता, दी गई सलाह से बिलकुल अलग होती है। स्पष्ट शब्दों में कहा जाये, तो केवल एक भ्रम ही होती है।
तो आइये देखते हैं, की वो कौन सी 5 गलत सलाह हैं जो आपको भी मिल सकतीं हैं प्रग्नेंसी के दौरान:
सलाह 1: गर्भवती व्यायाम न करें।
सच्चाई: वैज्ञानिकों का मानना है की गर्भकाल एक शारीरिक अवस्था है, बीमारी नहीं है। इसलिए जब आप गर्भवती होती हैं, तो अपनी डॉक्टर की सलाह से हल्का-फुल्का व्यायाम कर सकतीं हैं। बल्कि अब तो बड़े शहरों में केवल गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यायाम क्लासेस का आयोजन किया जाता है। व्यायाम करने से शरीर की मांसपेशियों में लचक बनी रहती है। इसके अतिरिक्त शरीर में ऑक्सीज़न की मात्रा का सही प्रवाह होने से गर्भ के शिशु का विकास भी संतुलित होता है।
सलाह 2: गर्भकाल में मछ्ली या मछ्ली के तेल का सेवन न करें
सच्चाई : गर्भवती स्त्री को केवल उस भोजन से परहेज करना चाहिए जो किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है। मछ्ली खाने में किसी भी गर्भवती के लिए कोई समस्या नहीं है। केवल यह ध्यान रखें की कुछ मछ्ली, विशेषकर शैलफिश में मर्करी की मात्रा अधिक होती है। मर्करी की अधिक मात्रा गर्भस्थ शिशु के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए मत्सय भोजन करते समय उस मछ्ली का चयन करें जिसमें मर्करी की मात्रा कम हो या न हो।
सलाह 3: कॉफी पीने से बच्चे का रंग भी काला हो जाएगा।
सच्चाई: गर्भस्थ शिशु के रंग का फैसला कॉफी का सेवन नहीं कर सकता है। कॉफी का थोड़ा बहुत सेवन आप जब चाहें तब कर सकतीं हैं। लेकिन ध्यान रखें की अधिक मात्रा में न लें। कॉफी में होने वाली कैफीन की मात्रा आपको केवल उसी स्थिति में नुकसान पहुंचा सकती है, जब आप दिन में तीन कप से अधिक लेंगी। इसलिए दिन में दो कप कॉफी पीना आपके लिए नुकसानदेह नहीं हो सकता है।
सलाह 4: केवल सफ़ेद चीजें खाएं जिससे बच्चे का रंग गोरा हो।
सच्चाई: गर्भकाल में प्रोटीन की मात्रा का सेवन सबसे अधिक फायदेमंद होता है। दूध और दूध से बनी कहानी की चीज़ें खाने से अधिकतर महिलाएं आनाकानी करतीं हैं। इसलिए उन्हें यह कहानी की चीज़ें खाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ही ऐसा कहा जाता है।
सलाह 5: गर्भवती पपीता न खाएं।
सच्चाई: गर्भावस्था में पपीता खाने से कोई नुकसान नहीं हो सकता अगर पपीता बिलकुल हुआ हो। कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा अधिक होती है। इससे गर्भाशय के संकुचन हो सकता है। इसलिए आधा कच्चा या बिलकुल कच्चा पपीता गर्भवती को नहीं खाना चाहिए।

