गुर्दे मानव शरीर के पेट के पीछे की ओर स्थित दो सेम के आकार के अंग हैं । व्यस्क इंसान में गुर्दों की औसत लम्बाई होती है। गुर्दों का सबसे आवश्यक कार्य रक्त से वेस्ट पदार्थों को फ़िल्टर करना और शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाना है। गुर्दे शरीर में तरल स्तर को संतुलित करने में भी मदद करते हैं। जब गुर्दे सामान्य रूप से काम करना बंद कर देते हैं, तो उस व्यक्ति के शरीर में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने लगती हैं ।
गुर्दों के सही प्रकार से काम न करने से शरीर से विषाक्त पदार्थ फ़िल्टर नहीं हो पाते हैं जिससे की रक्त से अशुद्ध कण नहीं हटते और यह पूरे मानव शरीर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से, गुर्दे की क्षति के सामान्य लक्षणों को पहेचानना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है और ऐसा करने से आगे होने वाली बीमारी को पहले ही रोका जा सकता है। यदि शुरुआती चरण में ऐसी परेशानीयों का निदान कर लिया जाये तो गुर्दों में होने वाली समस्याओं से आसानी से निपटा जा सकता है।
गुर्दों की समस्याओं के कुछ शुरुआती संकेत नीचे दिए हुए हैं।
1.थकान
गुर्दे एरीथ्रोपोइटीन नामक एक हार्मोन उत्पन्न करते हैं,जो लाल रक्त कोशिकाओं की उत्पत्ति के लिए ज़िम्मेदार हैंI ये लाल रक्त कोशिकाएं शरीर को ऑक्सीजन की आपूर्ति में सहायता करते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी आने से, इंसान को निरंतर थकान, एनीमिया और शरीर में ऑक्सीजन की कमी का अनुभव हो सकता है, पूरे शरीर के लिए गुर्दे के महत्वपूर्ण कार्य के कारण उनकी कार्यक्षमता को बनाए रखा जाना चाहिए। गुर्दों के उचित कार्य क्षमता को बरक़रार रखे के लिए, आपको अपनी जीवनशैली और आहार में परिवर्तन करने के साथ ही साथ कैडमियम युक्त खाने की चीज़ो से सख्ती से दुरी बनाये रखनी चाहिए और बहुत सारे प्राकृतिक तरल पदार्थ पीने चाहिए ।
2.पीठ दर्द
पीठ के निचले हिस्से में दर्द पहले एक तरफ शुरू होती है और फिर दोनों तरफ, आमतौर पर जिस तरफ सोते हैं उस पर अधिक तीव्र महसूस होती है। पीठ के निचले हिस्से में दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि गुर्दे इसी जगह पर होते हैं । किसी कारण से अगर आपके गुर्दे प्रभावित होते हैं तो इसी क्षेत्र में दर्द की शुरुवात होती है।
3.हाथों और पैरों में सूजन
चूंकि गुर्दे शरीर में मौजूद तरल पदार्थ को फ़िल्टर करने में असमर्थ हो जाते हैं, ये पदार्थ शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे पैर, हाथ, चेहरे,और एंडी में जमा हो जाते हैं जिससे की न केवल हाथ और पैर बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों में भी सूजन हो जाती है । इससे सो कर उठने के बाद आंखें भी फूल जाती हैं । आंखों के चारों ओर की सूजन इस तथ्य के कारण हो सकते हैं कि आपके गुर्दे प्रोटीन को शरीर में रखने के बजाय पर्याप्त से अधिक मात्रा में उसे लीक कर रहे हैं।
4.मूत्र संबंधी समस्याएं
गुर्दों की अनुचित कार्यप्रणाली असामान्य मूत्र उत्पादन का कारण बनती है। रात को या सामान्य से अधिक पेशाब लगना चिंता का कारण है। मूत्र का रंग गुर्दे के स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बता सकता है।
जैसे की लाल रंग या कोक रंग कुछ खाद्य पदार्थ के कारण हो सकता है या मूत्र में रक्त की उपस्थिति के कारण हो सकता है जो मूत्रमार्ग में स्टोन द्वारा मूत्र प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकता है या किसी अन्य किडनी संक्रमण का कारण हो सकता है। अत्यधिक बुलबुले वाले मूत्र, मूत्र में प्रोटीन का संकेत देती है। नेफ्रोलॉजिस्ट आगे होने वाली गुर्दे की बीमारी का प्रारंभिक संकेत बुलबुले वाले मूत्र को मानते हैं।
5.रूखी त्वचा और खुजली
त्वचा में रूखापन और खुजली, त्वचा में खनिज की कमी या हड्डी की बीमारी के संकेत हो सकते हैं जो अक्सर किडनी के किसी रोग के साथ जुड़े हुए होते हैं। जब गुर्दे आपके खून में खनिज और पोषक तत्वों के सही संतुलन को बरक़रार रखने में सक्षम नहीं रहते हैं, तब आपकी त्वचा सूखने लगती है, जिससे की त्वचा में खुजली और फ्लेकिंग होने लगती है। समय बीतने के साथ ही, रक्त में हानिकारक पदार्थ का जमाव खुजली को और ज्यादा असहनीय बनाता है।
नोट – खुजली के लिए कोई की दवाई लेने से पहले कृपया अपने प्राथमिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें। कुछ दवाइयों में ऐसे तत्व होते हैं जो गुर्दों को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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