सुधा घर के कामों से थोड़ा वक़्त निकालकर अपने बाल कटवाने पार्लर पहुंची | जैसे ही वो सीट पर बैठी तो हेयर ड्रेसर ने पूछा -कौन सा कट करवाना है मैडम ?
सुधा- थोड़े छोटे करवाने है |
हेयर ड्रेसर- पर आपके बाल तो बहुत घने और सुन्दर है, ट्रिम कर देती हूँ |
सुधा- नहीं थोड़े ज्यादा काटने है |
हेयरड्रेसर ने कमर तक पहुंचते बालों को कंधो तक कर दिया | और अपनी कटिंग का सामान पैक करने लगी तभी सुधा बोली -थोड़े और छोटे करने हैं |
हेयरड्रेसर ने उसके बालों को ब्लंट कट लुक दे दिया | सुधा बोली थोड़े और छोटे |
हेयरड्रेसर ने उसके बालों को बॉय कट लुक दे दिया | सुधा बोली और छोटे हो सकते हैं ?
हेयरड्रेसर उसके बार-बार की हिदायत से परेशान होकर बोली अरे मैडम और कितने छोटे ?
सुधा-इतने छोटे कि कोई उन्हें खींच ना पाएं |
सुधा एक समझदार और सुद्धढ महिला थी | उसके परिवार में एक पति, उसके 2 बच्चे और सास थी | ससुर जी तो सुधा की शादी से पहले ही हार्ट अटैक से चल बसे थे | सुधा का पति अलहड़ दिमाग का था | उसकी शक करने की आदत ने सुधा का जीना मुश्किल कर दिया था | अगर सुधा बच्चो को छोड़ने बसस्टैंड तक गयी है तो पूरी बाजू के कपड़े पहन के जाएं, दूध वाले से दूध लेना, कूड़े वाले को कूड़ा देना – सब कुछ नीलेश ही करता था ताकि सुधा किसी गैर मर्द से बात ना कर पाएं | उसकी सोच इतनी छोटी और नीच थी कि कोई सोच भी नहीं सकता था | किसी अजनबी ने अगर सुधा से रास्ता तक पूछ लिया तो उसे जवाब देने की अनुमति तक नहीं थी | सुधा डर-डर के ज़िन्दगी जीती थी | और कभी ऐसा हो गया कि उसका सामना किसी आदमी से हो गया तो उसके लिए घर आते ही नीलेश की बेल्ट और हाथ तैयार रहते थे |
यहाँ नीलेश का शकी दिमाग और वहा सास का हर बात को नमक-मिर्च लगाके सुधा की चुगली करना -सुधा के शरीर को तो जैसे मार खाने की आदत सी हो गयी थी | सुधा को जब भी उसकी माँ पूछती उसके शरीर पर निशान देख कर तो वो हर बार यहाँ गिर गयी, वहा गिर गयी, खाना बनाते हुए लग गया जैसे बहाने बनाकर बातों को गोल मोल घुमा देती | पर दिन-पर दिन ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो रही थी उसके लिए |
बचपन में अपने लम्बे बालों की वजह से अपने आप को सुधा रॅपन्ज़ेल राजकुमारी जैसा मानती थी कि एक दिन एक राजकुमार उसके बालों पर मोहित होकर अपने महल ले जायेगा लेकिन…
जब-जब नीलेश उसके बालों को खींच कर जमीन पर धक्का देता वो सोचती रॅपन्ज़ेल राजकुमारी की कहानी में “हैप्पिली एवर आफ्टर” के बाद तो कहानी खत्म हो जाती है | शायद उसके बाद यही होता होगा| वो तब तक रोती जब तक उसका तकिया गीला ना हो जाता और सुबह होते ही तकिया भी सूख जाता और उसके जख्म भी |
आज लाउड म्यूजिक, डांस फ्लोर पर इतने सारे लोग और एक ख़ुशी का माहौल था क्योंकि आज सुधा की कजिन की मेहंदी का फंक्शन था | फंक्शन में मौजूद हर रिश्तेदार ने सुधा को उसके छोटे बालों को “स्मार्ट हेयर कट ” कह कर बुलाया | लेकिन उसका दर्द काटते नहीं कट रहा था | सुधा कोने में बैठकर सबको एन्जॉय करता देख रही थी |
तभी सुधा की कजिन ने कहा दीदी चलो आप भी मेहंदी लगवायो | सुधा की कजिन ने मेहंदी वाले को बोला भैया नीलेश नाम लिखना इनकी मेहन्दी पर | मेहंदी वाला मेहंदी लगाते लगाते इतना मुसरफ हो गया कि वो भूल गया कि उसे हथेली पर नीलेश लिखना था | जैसे ही मेहंदी पूरी हुई उसकी कजिन ने आकर बोला भैया नाम तो लिखा ही नहीं | मेहँदी वाला जीभ निकाल कर बोला भूल गया | उसकी कजिन ने कहा कोई नहीं आप कलाई पर लिख दो, आजकल बड़ा फैशन हैं उसका |
सुधा ने मना किया लेकिन जबरदस्ती उसकी कलाही पर नीलेश लिख दिया गया | मेहँदी पूरी होते ही सुधा ने कोने में बैठ उस नाम को हटाने की कोशिश की लेकिन मेहँदी का रंग इतना पक्का था कि 10 मिनट में ही उसकी हथेली पर नीलेश छप गया | वो नाम देख देख, बहुत सारी भावनाएं उसके अंदर उमड़ रही थी जैसे गुस्सा, डर, चिढ़चिढ़ाहट, दर्द और बेबसी | ना जाने उसे क्या हुआ वो सोचने लगी ऐसे नहीं हटेगा नाम | उसने पास पड़ी फलों की टोकरी में रखा चाक़ू उठाया और झट से बाथरूम की और भागी |
सुधा की माँ तब फंक्शन में एंटर कर रही थी कि उसने सुधा को भागते हुए देखा | जैसे ही उसकी माँ बाथरूम में पहुंची उसने सुधा को अपनी कलाई पर चाक़ू रखे देखा | उसकी माँ ने सुधा के हाथ से चाक़ू छीना और उसे गले लगा लिया | आज फिर सुधा जी भरकर रोई लेकिन इस बार तकिये को नहीं उसकी माँ के आँचल को आंसुओं से भिगोया |
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