आप सभी ने कभी न कभी यह ज़रूर सुना होगा कि फलां व्यक्ति को हर्निया हो गया और उसका इलाज़ चल रहा है। यह एक सामान्यतः होने वाला रोग है और एक बार हो जाने के बाद इसका चिकित्सकीय इलाज़ कराना आवश्यक हो जाता है। क्या आप जानते हैं कि हर्निया शरीर के किसी अंग के अपनी जगह से हटने की वजह से होता है। इस स्थिति में शरीर का कोई अंग जैसे कि आंत अपने निर्धारित जगह की मांसपेशियों या ऊतकों को धक्का देती हुई बाहर की ओर खिसक जाती है। यह आमतौर पर पेट में होता है और बिना इलाज़ के अपनेआप ठीक नहीं हो पाता। इसके अलावा किसी किसी व्यक्ति में ये जांघों के ऊपरी तरफ, नाभि में और कमर के आसपास भी हो जाता है। चिकित्सक हर्निया को तीन तरह का बताते हैं, इंग्वाइनल हर्निया मतलब जांघ के जोड़ में होने वाला हर्निया जोकि केवल पुरुषों में पाया जाता है, नाभि का हर्निया या ऐमलिकल हर्निया और फीमोरल हर्निया जोकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होता देखा जाता है। आइये जानते हैं किन कारणों की वजह से होता है ये रोग।
1)पेट की मांसपेशियों को नुकसान-
लंबे समय तक रहने वाली खांसी जिससे पेट की मांसपेशियों पर लगातार ज़ोर और झटके लगते रहें या कभी भारी सामान उठाने के कारण मांसपेशियों पर ज़ोर पड़ने से उनके कमजोर हो जाने से हर्निया के होने की संभावना ज्यादा रहती है।
2)बढ़ती हुई उम्र-
युवावस्था की अपेक्षा बुढ़ापे में हर्निया रोग होने का खतरा बढ़ जाता है क्यूंकि उम्र के साथ साथ शरीर की मांसपेशियां खास तौर पर पेट की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं था इसके कारण विभिन्न आंतिरक अंगों को अपने निर्धारित स्थान से निकलकर फैलने की ज़गह मिल जाती है।
3)किसी तरह का ऑपरेशन-
किसी भी तरह के ऑपरेशन के बाद हर्निया होने की संभावना होना बहुत सामान्य बात है तथा महिलाओं में विशेषकर जिनके पेट का ऑपरेशन हुआ हो भविष्य में यह कभी न कभी अवश्य होता देखा गया है । इस तरह का हर्निया सर्जरी के बाद एक अपूर्ण रूप से भरे हुए घाव या चीरे के निशान की जगह से हो जाता है और अक्सर मोटी औरतों में ज्यादा देखा गया है।
4)जन्मजात विकृति-
कई व्यक्तियों में जन्म से ही नाभि के पास के क्षेत्र में एक तीखा उभार होता है। इसे भी हर्निया का एक प्रकार माना जाता है। पेट की दीवार में जन्मजात दोष भी इस प्रकार के हर्निया का एक कारण हो सकता है।
5)लगातार रहने वाली कब्ज़-
कुछ लोगों को लगातार रहने वाली कब्ज़ के कारण शौच करते वक़्त बहुत ज़ोर लगाना पड़ता है और इस दबाव के कारण पेट की नरम मांसपेशियाँ फट सकती हैं। लगातार ऐसा होते रहने से यह हर्निया का कारण बन सकता है।
6)मोटापा-
शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी जमा होने की स्थिति में पेट की मांसपेशियां फ़ैल जाती हैं और धीरे धीरे कमज़ोर हो जाती हैं। कमज़ोर मांसपेशियां हर्निया की प्रमुख वजह होती हैं।
हर्निया के लक्षण-
कैसे पहचानें कि आपको हर्निया तो नहीं? वैसे तो हर्निया के कोई विशेष लक्षण नहीं होते, लेकिन फिर भी कुछ चिन्ह ऐसे हैं जो आपको हर्निया रोग के प्रति सचेत कर सकते हैं। जैसे कि
- पेट की त्वचा या आंतों का शरीर के बाहर की ओर निकल आना
- त्वचा के नीचे फूला हुआ सा हिस्सा महसूस होना। इस उभार को लेट कर दबाने में अंदर धंस जाता है और खड़े होने पर फिर उभर आता है।
- इस फूली हुई त्वचा में दर्द या भारीपन महसूस होना।
- ज्यादा देर तक खड़े रहने या मल-मूत्र त्याग करने में परेशानी होना।
इन लक्षणों में से कोई भी चिन्ह अगर आपके शरीर में दिखता है तो इसे बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत चिकित्सक को दिखाएँ। हर्निया हो जाने की स्थिति में उसका सफल और कारगर उपाय केवल ऑपरेशन ही है। हर्निया के अधिकांश मामलों में दोबारा हर्निया होने की आशंका नहीं रहती, लेकिन एक बार यदि आप का ऑपरेशन हो चुका है तो आपको भारी वजन उठाने जैसे कार्य नहीं करने चाहिये क्यूंकि कुछ मामलों में यह असावधानी के कारण दोबारा होता भी देखा जाता है।
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