Site icon BetterButter Blog: Indian Food Recipes, Health & Wellness Tips

आप भी रह सकते हैं हरदम फ्रेश और ऊर्जावान – डॉ. शिखा शर्मा

हम सब के साथ यह होता है कि जब भी किसी चुस्त दुरुस्त और ऊर्जावान व्यक्ति से मुलाक़ात होती है तो पहला ख्याल मन में यह आता है कि अरे! यह हर वक़्त इतना फिट कैसे रहता है? हम में से ज़्यादातर लोग चाहे युवा हों या अधेड़ उम्र के, फिट रहने के लिए योगा, व्यायाम या फिर ध्यान करते हैं। लेकिन कभी शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे कारणों से और कुछ बाहरी वातावरण में उपस्थित तत्वों के कारण हमारी इमम्युनिटी पर लगातार विपरीत असर पड़ता रहता है।

परिणामस्वरूप बहुत कुछ करने के बावजूद भी ज़्यादातर वक़्त शरीर थका थका सा और निढाल हो जाता है। डॉ. शिखा शर्मा जोकि एक जानी मानी डाईटीशियन हैं उन्होने दिया एक ऐसा सुझाव जो बच्चों से ले कर बूढ़ों तक के स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी फायदे कर सकता है। आइये जानते हैं क्या है ये सुझाव।

 

अपने आहार में ज़रूर शामिल करें साबुत अनाज –

शिखा का कहना है अपने आहार में साबुत अनाजों को जरूर शामिल करें क्यूंकि इनके अनगिनत फायदे हैं। जैसे कि कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ साथ इनमें खूब सारा फाइबर होता है जिससे आपका हाजमा दुरुस्त रहता है और विशेष रूप से पेट संबंधी कई प्रकार के कैंसर से बचाव हो जाता है। सबसे बड़ा लाभ यह भी है कि यदि आप ज्यादा भी खाएं तो भी आपका वजन नहीं बढ़ता क्यूंकि फाइबर आपके वज़न को बढ्ने नहीं देता।  

 

साबुत अनाज से बनाएँ स्वादिष्ट आहार –

शिखा कहती हैं साबुत अनाज से बेशक स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है। मल्टीग्रेन रोटी के अलावा सब्जियाँ डाल कर नमकीन दलिया बनाएँ जो अपने आप में एक सम्पूर्ण आहर है। इसी तरह से चिवड़े के बजाय ब्राउन राइस का पोहा बनाएँ। दालों में चना इत्यादि को उबाल कर चाट बना कर खाएं जो बडों से ले कर बच्चों तक सभी को अच्छा लगता है।

 

कैसे करता है साबुत अनाज पर आधारित आहार आपकी मदद? –

ज़्यादातर लोग साबुत अनाज कि तरफ तब जाते हैं जब किसी स्वास्थ संबंधी समस्या की वजह से चिकित्सक उन्हें होल ग्रेन डाइट खाने के लिए कहते हैं। क्या आप जानते हैं यह कैसे आपकी मदद करती है?

 

अगर आपको डाइबिटीज़ है –

शुगर के मरीजों की ब्लड शुगर साबुत अनाज पर आधारित खाना खाने से चमत्कारिक रूप से सामान्य रहने लगती है। इसके लिए महीन पिसे हुए आटे की जगह वेज़ीटेबल दलिया खाएं या आटे में दलिया मिला के उसकी रोटी बनाएँ और प्राकृतिक रूप से अपनी ब्लड शुगर को कंट्रोल करें।

 

अगर आपको कोलेस्ट्रॉल है –

इस समस्या में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की वजह से हृदय संबंधी कई तरह के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए ओट्स एक बेहतरीन अनाज है। इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि सोलिबल फाइबर से भरपूर है जो खाने के बाद रक्त में जाकर घुल जाता है और कोलेस्ट्रोल से रोकथाम करता है। इसके लिए इसमें सब्जियाँ मिला के खाएं या इसका दलिया अथवा इसे रोटी के आटे   में मिला के खाएं और इससे आपका कोलेस्ट्रॉल प्राकृतिक रूप से कंट्रोल में आने लगेगा।

 

बढ़ती हुई उम्र के बच्चों के लिए –  

तेरह से अठारह साल में बढ़ती हुई उम्र में जब बच्चों का विकास तेज़ी से होता है तो उन्हें कई बार भूख लगती है। इस उम्र में मैदे इत्यादि से बनी हुई चीज़ें देने के बजाय यदि उन्हें साबुत अनाज पर आधारित आहार दिया जाए तो उनमें ज्यादा ऊर्जा और ताकत रहेगी और हाईपरनेस की समस्या भी नहीं होगी। इस उम्र में ज़्यादातर साबुत दालों से बना हुआ खाना या नाश्ता दें साथ ही ओट्स या होलग्रेन्स से बना हुआ दलिया या पोहा उन्हें निरंतर ऊर्जा दे सकता है।

शिखा कहती हैं यह सब तरीके नए नहीं हैं। हम केवल अपने बुजुर्गों की जीवनशैली और आहार संबंधी आदतों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले के लोग मोटा अनाज़ खाते थे और बारीक पिसे हुए आटे या सूजी जैसी वस्तुओं का प्रयोग ना के बराबर होता था। जैसे जैसे हम रिफाइंड आटे की तरफ झुकते गए वही अनाज़ शरीर में जा कर नुकसान करने लगा। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप साबुत अनाज़ को अपने दिनभर के आहार में कम से कम एक बार ज़रूर शामिल करें और इसके फ़ायदों को स्वतः अनुभव करें।  

 

चित्र स्त्रोत: Public Domain Pictures,  Pixabay, Wikipedia, uttarpradesh.org