31 वें हफ्ते में मेरा बच्चा लाते मार रहा था, अपने हाथ पैर हिला रहा था |
सोनोग्राम स्क्रीन पर मुझे उसका चेहरा और हाथ-पैर सब साफ़-साफ़ दिखाई दे रहे थे | मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि आंसू तक अपनी ख़ुशी जाहिर करने के लिए झलक पड़े | उसकी धीमी-धीमी सुनाई देती दिल की धड़कन- मानो ऐसा लग रहा था इससे पहले मैंने इतना मधुर कुछ नहीं सुना |
फिर डॉक्टर ने एक हाथ से उन सोनोग्राफी की तस्वीरों को मुझे दिया और दूसरे हाथ से उस औरत के पेट पर लगाया हुआ जैल साफ़ किया जिसके पेट में मेरा बच्चा पल रहा था |
फाइब्राइड की वजह से मैं कभी माँ नहीं बन सकती थी | बड़े से बड़े डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सबने “निराशा” की ओर इशारा किया | इसीलिए मैंने और मेरे पति ने जेस्टेशनल सरोगेसी का सहारा लिया | जेस्टेशनल सरोगेसी में माता-पिता के अंडाणु व शुक्राणुओं को सरोगेट मदर प्रत्यारोपित किया जाता हैं | हम अपने बच्चों को रोज कितना डांटते हैं कि ये गिरा दिया, वो खराब कर दिया, कमरे की हालत क्या कर दी तुमने ! लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कहते हैं भगवान एक बार हमारी झोली भर दें-
कोई कमरे को बिगाड़ने वाला तो हो, हम फिर जमा लेंगे | कुछ ऐसी ही हालत थी मेरी जब मैं अपनी बहन के बच्चों का ख्याल रखती तो वो कहती “तू एक बहुत अच्छी माँ बनेगी ” |
ये सुन कर मेरे आँसुओ को बहने की वजह मिल जाती क्योंकि मैं सच्चाई जानती थी |
निशा नाम था उस वरदान का जिसकी वजह से मुझे मेरे ही बच्चे की किलकारी सुनने मिली | निशा के घर की हालात अच्छी नहीं थी तो उसे हमने अपने घर ही रखा | पूरे 9 महीने हमने उसकी हर जरुरत, हर ख़ुशी का ध्यान रखा | यहाँ तक कि इतना की जब रोहन मेरे पति उसका ध्यान रखते तो मुझे बहुत बुरा लगता | ये मत खाओ, ये लो मैं तुम्हारे लिए नारियल पानी लाया हूँ, तुम कार में आगे बैठो आराम से – ये बातें रोहन हमारे बच्चे के लिए ही कहता था लेकिन मुझे कई बार चिढ़ सी होती थी | ऐसा लगता अगर मुझे माँ बनने का स्वभाग्य मिलता तो रोहन मुझे ये सब कुछ कहता और इससे भी कई गुना ज्यादा मेरी जरूरतों को अपनी प्राथमिकता मानता |
निशा भी अजीब सी होती जा रही थी | शुरू के दिनों में तो हर बात पर जी दीदी,जी दीदी बोलती लेकिन समय बीतते बीतते, ऐशो-आराम की ज़िन्दगी ने उसे बिगाड़ना शुरू कर दिया | जिसे एक वक़्त का खाना ठीक से नहीं मिलता था वही औरत को खाना परोसो तो कहती “मैं ये दाल नहीं खाती “! या मुझे AC के बिना नींद नहीं आ रही | और रोहन उसकी हर ख्वाइश को पूरा करने में लगे रहते | सच हैं जो औरत माँ बनने वाली हो उसकी कोई इच्छा अधूरी नहीं रहनी चाहिए क्योंकि उसकी इच्छा से बच्चे की इच्छा जुडी होती है | लेकिन आखिरी समय आते-आते रोहन की निशा की ओर फ़िक्र से मुझे जलन सी होने लगी | पर मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही थी | सब ठीक से हो गया | एक नन्हा खिलखिलाते बच्चे ने मुझे दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान बना दिया और मेरी हर कमी को पूरा कर दिया |
मैंने भगवान और निशा का शुक्रिया किया | और सोचा चलो जो बात मुझे इतने समय से परेशान कर रही थी वो भी खत्म होगी | निशा वापिस चली जाएगी | तभी रोहन ने आकर मुझे कहा – राशि, मैं सोच रहा था क्यों ना निशा को अपने बच्चे के नैनी बनाकर यही रहने दें | ऐसे में उसे बच्चे का साथ मिल जायेगा और हमें भी हेल्प हो जाएगी |
मैंने एक शब्द में जवाब दिया – नहीं |
रोहन कुछ नहीं बोले | पता नहीं मैंने ठीक किया या गलत पर मेरे दिल को जो ठीक लगा मैंने किया |
चित्र स्त्रोत -University of Findla,star2.com,pinterest

