वास्तुशास्त्र के इतिहास को भारत से जोड़ के देखा जाता है और यह दुनिया की प्राचीनतम विधाओं में से एक है लेकिन समय के साथ दुनिया के बहुत से देशों ने इसे अलग-अलग नामों से अपनाया है। यह ब्रह्मांड की ऊर्जा को सही तरह से समझ कर उसे अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने का ज्ञान है और वास्तुशास्त्र के कई सारे ऐसे उपाय हैं, जिनकी सहायता से मनुष्य अपने आसपास की नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर कर घर में सुख-शांति ला सकता है। वास्तुशास्त्र घर के प्रत्येक भाग के महत्व और उसकी उपयोगिता को समझते हुए यह बताता है कि घर के अलग अलग कमरे जैसे कि रसोई, बाथरूम आदि को किस दिशा में और कैसे बनाना चाहिए। आजकल अपार्टमेंट्स या फ्लैट्स के कल्चर में अक्सर बाथरूम के एक हिस्से में ही टॉयलेट भी होता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं वास्तु के अनुसार आपके घर में बाथरूम या टॉयलेट को कहाँ और कैसे बनाना चाहिये।
1.घर की किस दिशा में हो बाथरूम? –
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि घर के किस कोने में आप को बाथरूम बनाना चाहिए। मकान का उत्तर-पश्चिम भाग (ध्यान दें मकान के उत्तर-पश्चिम कोने में नहीं) को बाथरूम बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। इसके बाद दूसरा स्थान उत्तर-पूर्व भाग है (ध्यान दें मकान के उत्तर-पूर्व कोने में नहीं) तथा मकान का दक्षिण-पश्चिम भाग लेकिन दक्षिण-पश्चिम कोने में नहीं। इसका मतलब यह है कि ऊपर बताई हुई दिशाओं के सभी कोने वाली जगहों को छोड़कर आप बाथरूम बनवा सकते हैं। खिड़कियाँ और वेंटिलेटर ईस्ट या नॉर्थ दिशा में होने चाहिए।
2.कैसा हो बाथरूम की दीवारों का रंग? –
बाथरूम के लिए सही जगह के चुनाव के बाद आपको इसकी दीवारों के रंग और अन्य फिटिंग्स का भी उचित ध्यान रखना होगा जैसे कि गीज़र, बाथटब, नल, शीशा, कमोड सीट, वौशबेसिन इत्यादि। शावर और नल लगाने के लिए उत्तर दिशा की दीवार का प्रयोग करें जबकि शीशे को पूर्व दिशा की दीवार में लगाएँ । कमोड सीट को फर्श से थोड़ा ऊंचा और पश्चिम या उत्तर पश्चिम दिशा में ही लगाएँ। गीज़र के लिए दक्षिण पूर्व दिशा और बाथ टब पश्चिम दिशा में तथा वौशबेसिन को उत्तर पूर्व दिशा में फिट कराएं। दीवारों को उजले हुए लेकिन हल्के रंगों से पेंट करवाएँ।
3.कैसे रखें बाथरूम में ज़रूरत का सामान? –
बाथरूम में ज़रूरत का सामान स्टोर करने के लिए यदि आप अलमारी लगाना चाहते हैं तो वह दक्षिण पश्चिम दिशा में ही होनी चाहिए। कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन के लिए सही जगह दक्षिण पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा है।
कुछ और ज़रूरी बातें –
- कोशिश करें कि घर में बाथरूम और टौइलेट अलग अलग बनवाया जाये।
- दक्षिण पश्चिम या दक्षिण पूर्व दिशा में अटेच टॉइलेट कभी भी न बनवाएँ।
- कोशिश करें कि टॉइलेट का फर्श बाकी फर्श से थोड़ा ऊंचा रहे।
- बाथरूम का मुख्य दरवाजा पूर्व या उत्तरी दीवार में बनवाएँ।
अच्छा यह रहेगा कि जब भी आप नया घर बनवायें या घर का रेनोवशन करवाएँ, किसी वास्तु विशेषज्ञ से अपने पूरे घर की वास्तु प्लानिंग करवाएँ ताकि ना केवल बाथरूम बल्कि घर का हर कोना आपकी सुख समृद्धि और खुशहाली में इज़ाफा करे।
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