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दुनिया भर में बढ़ रहा है शाकाहारी मीट और पौधों से बने दूध का कारोबार

Vegan Feature Image

इंसान हमेशा से ही प्रकृति पर निर्भर रहा है, फिर उसे साँस लेने के लिए हवा की जरूरत हो या भोजन और पानी की प्रकृति ने हमारी हर जरूरत को पूरा किया है। और जिसका की इंसान हमेशा से दुरुपयोग भी करता आया है। लेकिन आज के बदलते हालत को देखकर हम कहीं न कहीं कह सकते हैं कि इंसान अपनी द्वारा की गई सभी गलतियों को सुधारने की जिम्मेदारी के साथ कोशिश कर रहा है। और वास्तव में किसी भी बड़े बदलाव को करने में समय की जरूरत होती है, अतः आने वाले समय में हम प्रकृति और मनुष्य जीवन के बीच एक संतुलन की अपेक्षा कर सकते हैं। और जिसकी शुरूवात हम शुद्ध शाकाहारी डाइट को कह सकते हैं, जिसे वीगन या वीगनवाद कहा जाता है।

वीगनवाद वास्तव में पशुओं से सबंधित प्रत्येक खाद्य पदार्थों और उनसे संबंधित सभी वस्तुओं से परहेज करने से हैं। जिसमें कि डेयरी उत्पाद भी शामिल हैं। और इसके साथ ही एक संबंधित फिलॉसफी जो जानवरों की वस्तु स्थिति को अस्वीकार करता है।

पिछले कुछ सालों में वीगन की लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसमें की सिर्फ पौधे से बनने वाले दूध का कारोबार 1.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा मांस का शाकाहारी विकल्प पेश करने वाली कंपनियों का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है।
वीगन उत्पादों की शुरूवात अमेरीका के रहने वाले एथन ब्राउन ने बियोंड मीट के साथ 2009 में की थी, जो कि आज 80 से अधिक देशों में अपने उत्पाद बेचती है, और 2009 से अब तक 40.68 करोड़ डॉलर तक अपने व्यापार को बढ़ा चुकी है।

इसके साथ ही अगर आप यह सोच रहे हैं कि वीगनवाद सिर्फ पशुओं की स्थिति बेहतर करने के बारे में हैं, तो हम आपको बता दें कि शाकाहारी मीट और दूध को सामान्य मीट से ज्यादा प्रभावशाली माना गया है। क्यूंकि इसे विशेषज्ञों की देख रेख के अंतर्गत हमारे शरीर को नुकसान न पहुचाने वाले सभी तत्वों के साथ तैयार किया जाता है। शाकाहारी मांस को कई सामग्री जैसे पौधे आधारित प्रोटीन, सोया, आलू का प्रोटीन, मटर प्रोटीन, मूंग बीन प्रोटीन और यहां तक कि इसे तैयार करने में चावल का प्रोटीन इस्तेमाल किया जाता है। जो कि मांस में रसीलेपन का मुख्य स्रोत है।

इसके साथ ही पौधों से मिलने वाला दूध भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं क्यूंकि यह लैक्टोज, कोलेस्ट्रॉल, कृत्रिम हार्मोन, फैटी एसिड्स व एंटीजन से मुक्त आसानी से पचने, गाय व भैंस के दूध की तुलना में बहुत कम फैट व कैलोरी से निर्मित वजन कम करने, प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फायबर, एंटीऑक्सीडेंट्स व कुछ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी एक्टिव तत्वों से भरपूर हृदय रोग में और ऐल्कलाइन के गुणों के साथ एसिड से बचने में लाभदायक होता है। सोया मिल्क, राइस मिल्क, कोकोनट मिल्क, .बादाम दूध, ओट्स मिल्क ये सभी हमें पौधों से प्राप्त होते हैं।

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