योनि में फूंसी होने के कारण

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क्या आप अपनी योनि में हुई उस फूंसी को लेकर चिंतित हैं? खैर, जब तक उसमे दर्द न हो या उसके रंग या आकार में परिवर्तन न हो तब तक आपको चिंतित होने की ज़रुरत नहीं है। यहां देखें कि वास्तव में वह फूंसी क्या हो सकती है।

 

1 .संक्रमित और अंदरूनी बाल

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अंदरूनी क्षेत्रों से बालों को हटाते वक़्त वहां फूंसी हो सकती है। योनि में हुए फूंसी के लिए सबसे आम कारण हैं बढ़ते बाल। एक हफ्ते या दस दिनों में ये खुद ही चले जाते हैं।

 

2 .रैशेस

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योनि हमारे शरीर का एक हिस्सा है और किसी भी अन्य हिस्से की तरह वहां भी रैशेस या फूंसी होना सामान्य है। योनि क्षेत्र में रैशेस होने पर उसमे पस, खुजली या लालपन हो सकता है। योनि में हुए फूंसी को बार बार छूने से बचे। वे एक सप्ताह या दस दिनों में शरीर के अन्य हिस्सों की तरह अपने आप ही ठीक हो जाएंगे।

 

3.तिल या मस्से

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जब आप सूर्य के नीचे बहुत समय बिताते हैं तो त्वचा के दो क्षेत्रों और तिलों के बीच निरंतर घर्षण के परिणामस्वरूप मस्से विकसित होते हैं। सामान्य तिल गोल होते हैं और वे उभरे हुए या चपटे दोनों हो सकते हैं। लेकिन अगर आपके शरीर में हुए तिल या मस्से का रंग बदलता है, वे आकार में गोल नहीं है या समय के साथ उनके आकार में वृद्धि नहीं हो रही है, तो आपको इसे चेक कराने की आवश्यकता है।

 

4.जननांग मस्सा

मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण होने वाला जननांग मस्सा एक तरह का यौन संक्रमण होता है। यह आकार में छोटा और उसका रंग योनि के त्वचा के सामान या उससे थोड़ा गहरा हो सकता है। ये मस्सा चिकना या मोटा हो सकता है।

जबकि डॉक्टरों का मानना ​​है कि जननांग मस्सा स्वयं किसी भी स्वास्थ्य चिंताओं का कारण नहीं होता, फिर भी उनकी जांच करना ज़रूरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि ये एचपीवी के कारण होते हैं, तो यह गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

 

5.सेबेसियस सिस्ट

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सेबेसियस सिस्ट तरल पदार्थ से भरे हुए फूंसी होते हैं जो मुँहासे की तरह दिखते हैं। ज्यादातर महिलाएं दिन के अधिकांश वक़्त संक्रामक अंडरवियर पहनती हैं, इसलिए योनि को आवश्यकता अनुसार हवा नहीं मिलती है। नम वातावरण और विभिन्न प्रकार के कपड़ों के साथ योनि के क्षेत्र में निरंतर रगड़ होने से मलबेदार सिस्ट का विकास हो सकता है। कभी-कभी ये संक्रमित हो सकते हैं लेकिन संक्रमण ग्रोन क्षेत्र तक ही सीमित रहता है। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए टॉपिकल क्रीम और गर्म सेंक से राहत प्रदान होती है।

 

6.बार्थोलिन सिस्ट

एक महिला की योनि में स्थित ग्रंथियों से लुब्रिकेशन (चिपचिपा पदार्थ) निकलता है। जब ये ग्रंथियां अवरुद्ध हो जाती हैं, तो बार्थोलिन के सिस्ट विकसित हो सकते हैं। यदि सिस्ट छोटा है, तो इसके अपने आप ठीक होने का इंतज़ार किया जा सकता है, लेकिन यदि सिस्ट बड़ा है, तो डॉक्टर सलाह लेना आवश्यक है।

 

7.पसीने से संक्रमित ग्लैंड्स (गाँठ)

नमी या गीले जननांग की त्वचा में पसीने की वजह से संक्रमण हो जाता है जिससे दर्दनाक गांठें हो जाती हैं। स्वच्छ पानी से जननांग क्षेत्र को धोकर, सूखे कपड़े से पोंछने और इस क्षेत्र को शुष्क रखने से इस समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

 

8.मोलस्कम कन्टेजियोसम

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ये इसी नाम के एक वायरस द्वारा फैलता है, यह संक्रमण जननांग क्षेत्रों में होता है। यह संक्रमक है और आगे चलकर ये फूंसी शरीर पर कहीं भी दिखाई दे सकते हैं।

 

9.सिफलिस

यह यौन संक्रमित बिमारी (एसटीडी), संक्रमित क्षेत्र पर होने वाली छोटी फूंसी है। हालांकि ये आमतौर पर तीन से छह सप्ताह के भीतर ख़त्म हो जाते हैं, ईलाज न किए गए सिफलिस जीवन को खतरे में डाल सकते हैं।

 

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