टेलीविज़न ने सबसे ज्यादा जगह बनाई है बच्चों की मासूम दुनिया में । जहां केवल दादी नानी की कहानियाँ और गुड्डे गुड़ियों के खेल होते थे, वहाँ पहले घुसपैठ की टेलीविज़न ने । फिर नए नए टीवी चैनलों और मोबाइल फोन ने कार्टून्स को बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बना दिया । अगर आपके बच्चे भी कार्टून्स के दीवाने हैं तो आइये आप को बताते हैं इसके फायदे और नुकसान। पहले बात करते हैं इसके फ़ायदों की।
1.बच्चे के व्यक्तिव और रचनात्मकता का विकास-
कार्टून्स बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हम सब जानते हैं कि बच्चा देख कर सीखता है और कार्टून्स के माध्यम से दिखाई गयी कहानियाँ बच्चे की कल्पनाशक्ति को नयी ऊंचाइयों में ले जाने में मदद करती हैं। आपने अक्सर देखा होगा बच्चे ड्राइंग बनाते हुए अपने मनपसंद कार्टून्स को चित्रित करते हैं और उसी के जैसे रंगों से उसे सजाते हैं।
2.नयी भाषाओं को सीखने में मददगार–
आजकल कार्टून्स कई भाषाओं में आने लगे हैं। लगातार सुनते रहने से बच्चे का भाषा ज्ञान विकसित होता है और वह नए नए शब्द बोलने लगता है। उनका प्रयोग अपने रोज़मर्रा के जीवन में करता है और इसी तरह धीरे धीरे भाषा पर उसकी पकड़ मजबूत हो जाती है।
3.जीवन के लिए उपयोगी और सामाजिक गुणों का विकास-
इन कार्टून्स में दिखाई गयी कहानियाँ यह बताती हैं कि कैसे अपने माता पिता से बात करते हैं, दोस्त बनाते हैं, जानवरों और पेड़ पौधों से प्यार करते हैं इत्यादि। ये सभी बातें देखकर बच्चा जीवन के लिए जरूरी गुणों को अनजाने में ही सीखता चला जाता है। आपने अक्सर देखा होगा बच्चे कहते हैं ये मेरा बेस्ट फ्रेंड है। ये बेस्ट फ्रेंड जैसी अवधारणा कई बार कार्टून्स से ही आती है। इसी तरह माता पिता का सम्मान ,जानवरों से प्यार जैसी कई बातें भी बच्चा सीखता है।
अब बात करते हैं कार्टून्स से संभावित नुकसान की।
1.बच्चे एक विचित्र से लहज़े में बोलने लगते हैं –
मैंने अक्सर देखा है कि कार्टून की लत लग जाने पर बच्चे एक अज़ीब सा लहज़ा अपना लेते हैं और अपनी कल्पना में वो खुद को डोरेमोन या शिन चैन चित्रित कर रहे होते हैं। बाहर से देखने पर यह बड़ा अज़ीब लगता है और कई बार हास्यास्पद भी बन जाता है।
2.नकारात्मक व्यवहार या गुण सीख लेने का भी खतरा–
कुछ ऐसे कार्टून्स जो हमारी सभ्यता या संस्कृति के हिसाब से न ढाले गए हों वह बच्चे को नकारात्मक व्यवहार की तरफ भी ले जा सकते हैं। जैसे टॉम एंड जेरी एक स्वस्थ् मानसिकता की कथा लगती है पर कई अन्य कार्टून्स गुस्सैल, आक्रामक, दूसरों का मज़ाक उड़ाने वाली भाषा जैसी चीज़ें दिखाते हैं जो बच्चा अनजाने में ही सीख सकता है।
3.अनुचित व्यवहार जो बच्चों के लिए ठीक नहीं –
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्टून्स में दिखाई गयी कहानी और पात्र बच्चे कि उम्र के अनुकूल होने चाहिए। ऐसा कुछ भी जो उसकी उम्र से बडी या परिपक्व बातें दिखाता हो बच्चे के लिए लाभकारी नहीं हो सकता।
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