नेगेटिव सोच से छुटकारा पाने के 5 असरदार तरीके

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आधुनिकता की दौड़ में चारों ओर से लगातार पड़ता हुआ दबाव मनुष्य को एक समय के बाद नकारात्मक सोच की ओर धकेल सकता है। ये नकारात्मकता व्यक्ति को अपनी योग्यता और क्षमताओं पर संदेह करने के लिए बाध्य कर देती है और धीरे धीरे डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती है । इसकी चपेट में सफलतम व्यक्तियों से लेकर संघर्षशील युवा तक सभी के आने की गुंजाइश रहती है। आइये जानते हैं अपने जीवन में सफलता के साथ आगे बढ़ते हुए नकारात्मक सोच से कैसे बचा जा सकता है-

 

1.नकारात्मक सोच के व्यक्तियों के साथ से बचें:

सकारात्मक व्यक्तियों का साथ आपकी सोच पर गहरा प्रभाव डलता है। यह आपके नेगेटिव विचारों को धीरे धीरे बदलने में सहायक सिद्ध हो सकता है जबकि इसके विपरीत लगातार निराशावादी बातें करने वाले व्यक्ति आपको अनजाने में ही अपनी नकारात्मक ऊर्जा देते रहते हैं और आप हर घटना में नेगेटिविटी को ही देखने का नज़रिया विकसित कर लेते हैं।

 

2.सोच की चरम सीमा में जाने से बचें:

नकारात्मक सोच के शिकार व्यक्ति एक बार किसी सोच में खो जाने के बाद उसकी चरम सीमा तक सोचते चले जाते हैं, और बुरे से बुरा क्या हो सकता है यह कल्पना शुरू हो जाती है। इस से बचने का आसान तरीका यह है कि आप अपने विचारों का निरीक्षण करें और जैसे ही आपको दिखता है कि एक नेगेटिव विचार आपको बुरे से बुरी कल्पना की सोच में ले जा रहा है, तुरंत अपने आप से कहें “रुक जाओ”। अब उस विचार से कहें “ यहाँ से तुरंत चले जाओ”। यकीन मानें यह बहुत कारगर तकनीक है।

 

3.अपने सफलतम कार्यों की सूची बनाएँ:

अपनी आज तक की सभी उपलब्धियों और सफलताओं की एक सूची बनाएँ और एक ऐसी जगह पर चिपका दें जहां से आपकी नज़र उस पर आते जाते हमेशा पड़ती रहे। जब भी नकारात्मक विचार आप पर हावी होने लगें उस सूची में लिखी सभी बातों को ज़ोर ज़ोर से दोहराएँ और खुद से कहें “मुझे अपने आप पर यकीन है। मैं किसी से कम नहीं हूँ और अपने सभी कार्य बेहतरीन ढंग से कर सकती हूँ।“

 

4.प्रेरणादायक जीवनियां पढें:

उन सभी सफल व्यक्तियों की जीवनियाँ पढ़ें जिन्होने नकारात्मकता पर विजय प्राप्त कर के जीवन में नयी उपलब्धियां हासिल करीं। आप दुनियाँ में अकेली व्यक्ति नहीं हैं जो इस समस्या से ग्रस्त हैं। यह केवल सोच को बदलने का अभ्यास करने का मसला है और जैसे जैसे आप अपने दिमाग को सकारात्मक दिशा में चलना सिखाते हैं यह समस्या अपने आप हल हो जाती है।

 

5.योग और प्राणायाम करने की आदत डालें:

योग और प्राणायाम, आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अद्भुद काम करता है। जहां योग आपको शारीरिक संतुलन देता है वहीं प्राणायाम से दिमाग को ऑक्सीज़न की भरपूर मात्रा मिलने से एक नयी स्फूर्ति का संचार होता है। आप स्वयं पाएंगे कि प्राणायाम करने के तुरंत बाद आप के दिमाग कि सजगता का स्तर पहले से कहीं अधिक होगा। इसके साथ नियमित रूप से किया गया केवल थोड़ी देर का ध्यान आपकी सोच की नकारात्मकता को जड़ से मिटाने के लिए काफी होगा।

 

चित्र श्रोत: unsplash, pixino

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