क्या है हेपेटाइटिस सी?
हेपेटाइटिस एक लिवर का संक्रमण है जो की हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है। हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस सी वायरस के वजह से होता है। यह इन्फेक्शन लिवर में सूजन करता है, जिसके वजह से लिवर खराब हो सकता है। हेपेटाइटिस सी से आपको लिवर सिरोसिस और लिवर स्काररिंग हो सकती है। अगर यह रोग ज़्यादा गंभीर हो तो इसके वजह से लिवर फेलियर भी हो सकता है। हेपेटाइटिस सी अत्यधिक संक्रामक है। यह इन्फेक्शन व् दूषित खून से फैलता है।
हेपेटाइटिस सी दो प्रकार का होता है-एक्यूट और क्रोनिक। एक्यूट हेपेटाइटिस सी के लक्षण जल्दी नज़र आते हैं और कुछ दिनों तक रहते हैं। इसके लक्षण हैं पेट में असुविधाजनक महसूस करना, थकान, उलटी और बुखार। क्रोनिक हेपेटाइटिस सी के लक्षण आसानी से नज़र नहीं आते क्योंकि वे धीरे-धीरे विकसित होते हैं, कुछ महीनों में। क्रोनिक हेपेटाइटिस सी से लिवर में कर्क रोग भी हो सकता है।
हेपेटाइटिस सी के कारण
हेपेटाइटिस सी ज़्यादातर खून से फैलता है, लेकिन ये इन्फेक्शन शरीर के तरल पदार्थ (fluids) द्वारा भी फ़ैल सकता है। हेपेटाइटिस सी इन कारणों के वजह से फैलता है:
- अंग प्रत्यारोपण।
- रक्त – आधान।
- शरीर छिदवाना और टैटू बनवाना।
- ड्रग्स, सुई और सिरिंजेस शेयर करना।
- निजी वस्तुएँ, जैसे की टूथब्रश और रेजर, शेयर करना ।
- प्रक्रियेशन (procreation), जहाँ एक इन्फेक्टेड माँ अपने पेट में पल रहे बच्चों को यह इन्फेक्शन दे सकती है।
- यौन संपर्क, खासकर एनल सेक्स (anal sex) और मासिक धर्म संभोग (intercourse during menstruation), एक इन्फेक्टेड इंसान के साथ।
हेपेटाइटिस सी अनौपचारिक संपर्क, खाना शेयर करना, रेस्पिरेटरी ड्रॉप्लेट्स, मच्छर/ कीड़े के काटने से और स्तनपान से नहीं फैलता।
रिस्क फैक्टर्स
इन लोगों को सबसे ज़्यादा रिस्क होता है हेपेटाइटिस सी का:
- मरीज़ जिनको लिवर रोग है।
- करंट और पूर्व कैदी।
- जो लोग काफी समय से प्रतिदिन शराब पी रहे हैं।
- जो लोग 1945 और 1965 के बीच जन्मे हैं
- मरीज़ जो काफी समय से किडनी डायलिसिस पर हैं।
- लोग जिन्हे दूसरे रक्त उत्पाद 1987 से पहले मिले हैं।
- मरीज़ जिन्हें अंग प्रत्यारोपण और रक्त – आधान मिला है 1992 से पहले।
- लोग जो यौन संचारित रोगों, जैसे की HIV, से पीड़ित हैं।
हेपेटाइटिस सी के लक्षण
हेपेटाइटिस सी के 70% केसेस में, कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं । कई केसेस में, इसके लक्षण 1 से 3 महीने बाद नज़र आते हैं। ये लक्षण हर इंसान के लिए अलग होते हैं। एक्यूट हेपेटाइटिस सी के सबसे सामान्य लक्षण ये हैं:
- बुखार
- थकान
- उलटी
- पेट में असुविधाजनक महसूस करना
- जोड़ों का दर्द और मांसपेशियों में सूजन
जॉन्डिस और क्ले-रंग के स्टूल्स भी हेपेटाइटिस सी के कुछ लक्षण है।
क्रोनिक हेपेटाइटिस सी के लक्षण कई महीनों तक नज़र नहीं आते। इसीलिए इस इन्फेक्शन को ‘साइलेंट एपिडेमिक’ कहा जाता है।
- त्वचा में खुजली
- डार्क यूरिन
- वज़न काम होना
- पैरों में सूजन
- अपर्याप्त भूख
- लगातार थकावट
- खून का आसानी से बहना और आसानी से चोट लगना
- अस्किट्स (Ascites) और पेठ में फ्लूइड बिल्डप
- त्वचा पर मकड़ी जैसे ब्लड वेसल्स नज़र आना
- हेपाटिक एन्सेफलोपथी-सुस्ती, कन्फूशन और स्लर्रेड स्पीच
हेपेटाइटिस सी से उत्पन्न जटिलताएं
75%-85% क्रोनिक हेपेटाइटिस सी के केसेस में गंभीर जटिलताओं जैसे की लिवर सिरोसिस, लिवर में कर्क रोग और लिवर फेलियर विकसित हो सकते हैं।
ओबेसिटी, डायबटीज़ और धूम्रपान से लिवर स्काररिंग बढ़ भी सकती है।
हेपेटाइटिस सी इन्फेक्शन के लिए कोई टीका उपलभ्द नहीं है, पर यह संक्रमण दवाइयों के साथ ट्रीट किया जा सकता है। लेकिन आपको पहले से ही सावधानी बरतनी चाहिए-धूम्रपान ना करे, शराब और गैरकानूनी ड्रग्स से दूर रहे, सेफ सेक्स प्रक्टिस करे, अपनी निजी वस्तुएँ शेयर ना करे, अपना सही वज़न मेन्टेन करे और जिन जगाहों से आप अपना शरीर छिदवाते हैं या फिर टाटू बनवाते हैं, उन जगाहों का भी ध्यान रखे।
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