बच्चो के लिए सामान खरीदना, स्कूल ख़तम होने के बाद उन्हें सोमवार और मंगलवार म्यूजिक क्लास तो गुरूवार और शुक्रवार डांस क्लास ले जाना और छुट्टी वाले दिन मॉल ले जाना– अब वो दिन नहीं रहें | जी हां, मेरे बच्चे बड़े हो गए | अब वो अपना ध्यान खुद रख सकते हैं | मेरा बेटा वंश लंदन से MBA कर रहा हैं और मेरी बेटी एक बहुत अच्छे घर में बिहाई हैं | दोनों बहुत खुश हैं | पर इन सब की वजह से मेरी ज़िन्दगी बिलकुल बदल सी गयी थी | घर की इतनी शान्ति,काटने को दौड़ती थी | ऐसा लगता था जैसे ज़िन्दगी खत्म सी होती जा रही हैं | कौन था जिसके लिए में कुछ करती ?
लेकिन मेरी दोस्त दीक्षा ने मुझे ये एहसास दिलाया कि अब मैं ख़ुद हूँ जिसके लिए मैं कुछ कर सकती हूँ | वो कहती अब “हम” को छोड़कर “मैं” के लिए जी | और सच में, हम सब को ये सीख दी जाती हैं कि शादी से पहले एक लड़की सिर्फ अपने लिए जीती हैं लेकिन शादी के बाद सबकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूंढती हैं | और अपनी भागदौड़ से भरी ज़िन्दगी में एक लड़की ये कभी महसूस नहीं करती कि दूसरों की खुशियों का ध्यान रखते– रखते उसकी ख़ुद की ख़ुशी खुदखशी कर रही हैं |
मैं अपने सभी दोस्तों को ये कहना चाहती हूँ कि इस बात पर अमल करे कि ” ज़िन्दगी लम्बी नहीं,बड़ी होनी चाहिए | मैं आपको किसी भी तरह का ज्ञान नहीं देने आयी बस इस ब्लॉग के माध्यम से अपना अनुभव आपके सामने रख रही हूँ | मैं तो वो सब कर रही हूँ जो मैंने बहुत पीछे छोड़ दिया था | आप कब करेंगे ?
1.कुछ नया शुरू करों
माँ–बाप होने के नाते हमें कितनी ही जिम्मेदारियों को पूरा करना पड़ता हैं | पर आप तो एक नया काम शुरू करना चाहते थे ? उसका क्या ? हां, अपने बच्चो के चलते आप रिस्क नहीं ले सकते थे लेकिन अब तो सब सही से निपट गया | तो कौन हैं जो आपको अपने सपनों से दूर कर रहा हैं ?
2.दुनिया घूमने का सपना
बिलकुल सही सुना आपने | जानती हूँ अब क्या घूमना ? घुटनों में दर्द , लोग क्या कहेंगे ? ऐसे कितने ही ख़याल आपको ये सुनते ही आने लगे होंगे | लेकिन अब आपको पैसो को जोड़ने के बारे में नहीं सोचना, दर्द तो दवाई से जा सकता हैं और लोग तब कहाँ थे जब आपने अपने सपनों को मार कर अपने बच्चो के सपनों को ज़िंदगी दी |
3.रुचियों के बारे में सोचो
हममें से कितने ऐसे हैं जो खाना पकाने की कला में निपुण थे ? किताब लिखना चाहते थे ? या संगीत में रूचि थी | तो अब उस “थे” को “हैं” में बदलने का समय आ गया हैं | मुझे देखो, मैं रंगमच की दुनिया में नाम कमाना चाहती थी और आज फिर से मैंने वही रास्ता चुन लिया | हां , माँ और दादी के रोल्स मिलते हैं लेकिन अब में “काश” शब्द से दूर रहती हूँ |
4.शुरू से शुरू करे
पढ़ाई करने के लिए कोई उम्र नहीं होती | सालों–साल आपने अपने बच्चो को पढ़ाया हैं, उनकी छोटी–छोटी मुश्किलों को हल किया हैं पर अब सब हो गया हैं | आप भी तो मास्टर्स करना चाहते थे | झिझक छोड़िये, दुनिया को नहीं अपने आप को सरप्राइज दें कि आप क्या कर सकते हैं |
5.अपना ख़याल रखें
कितनी बार आपने अपने स्वास्थ की चिंता ना कर अपने बच्चो की चीज़ो को एहमियत दी हैं | अपनी पुरानी तस्वीर को देख कर मुझे तो पुरानी मीनाक्षी बनने का मन कर गया, जो सुन्दर थी, कोई दर्द नहीं, बिलकुल फिट थी | सबको ये स्वभाग्य नहीं मिलता | ज्यादा नहीं तो बस दिन में ३० मिनट अपनी एक्सरसाइज के लिए निकाले और साथ में खेलना, स्विमिंग या फिर हाईकिंग हो जाये तो क्या कहने |
कई बार मैंने भी सोचा की ड्राइविंग मेरे बस की नहीं लेकिन आज अपने पति से अच्छी ड्राइविंग करती हूँ | मैंने तो अपने छोटी-छोटी आशाओं को साकार किया है | अगर आपने भी इस उम्र में अपने लक्ष्य को पाया हैं तो यहाँ लिखें और एक मिसाल बने |
चित्र स्त्रोत – मिसूरी बिज़नेस अलर्ट, फिटनेस मार्कोला, युथ की आवाज़ , कोस्ट–टू–कोस्ट कम्पाउंडिंग

