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नी रिप्लेसमेंट/ घुटने की सर्जरी से बचने के 5 तरीके

Ankit Kumar | मई 10, 2018

आज लगभग 60% महिलाएं घुटनों के दर्द से परेशान है और इसका कारण है हमारा लाइफ स्टाइल। टेक्नोलॉजी ने आज सब कुछ बहुत आसान कर दिया है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है हमारे शरीर पर। 50 साल के होते- होते अधिकतर महिलाओं को घुटनों के दर्द का सामना करना पड़ता है जिससे निवारण पाने के लिए उन्हें नी रिप्लेसमेंट करवानी पड़ती है।

आंकड़ों की माने तो 95% सर्जरी ही सफल होती है जिसमे से 90 % सर्जरी 10  साल तक सही स्थिति में रहती है और 80 % सर्जरी 20 साल तक सही स्थिति में रहती है। नी रिप्लेसमेंट के 15 दिनों बाद शरीर में ब्लड क्लॉट होने लगते हैं जिससे पल्मोनरी एम्बोलिस्म होने का खतरा बढ़ जाता है। सर्जरी के दौरान इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और हड्डियां और भी कमज़ोर हो जाती हैं।

नी रिप्लेसमेंट में प्रॉस्थेसिस नामक कृत्रिम अंग का प्रयोग किया जाता है और उसकी गुणवत्ता अच्छी ना होने पर कई बार सर्जरी के बाद भी मरीज को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उठने बैठने से लेकर और भी बहुत तरह की समस्याएं होती हैं।

इन सबसे बचने के लिए आप अपनाएं ये 5 तरीके जिनसे बिना नी रिप्लेसमेंट के आप पा सकते हैं घुटनों के दर्द से छुटकारा-

 

1.एक्यूपंक्चर-

घुटनों के दर्द का मुख्य कारण है घुटनों में ऊर्जा के प्रवाह में रुकावट।  एक्यूपंक्चरिस्ट घुटने के कुछ ख़ास बिंदुओं पर पतली धातु की सुइयां डालते हैं जिससे शरीर में अच्छी तरह ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है और हमें दर्द से छुटकारा मिलता है।

 

2.ब्रेसिंग  –

ब्रेसिज़ घुटने के जोड़ से दबाव लेते हैं और दर्द से आराम दिलाने में मदद करते हैं। ब्रेसिज़ का इस्तेमाल आमतौर पर डॉक्टर को दिखाने के बाद किया जाता है। ये कस्टम फिट होते हैं, और किसी भारी काम को करने या दर्द महसूस करने पर इसे पहना जाता है। ये आपके घुटनों को सपोर्ट प्रदान करते हैं।

 

3.इंजेक्शंस

आजकल बहुत से इंजेक्शंस आ गए हैं जो घुटनों के दर्द और सूजन से छुटकारा दिलाने में बहुत मददगार हैं। ये इंजेक्शन तीन प्रकार के हैं जिनके नाम हैं हयालूरोनिक एसिड (एचए) इंजेक्शन, प्लेटलेट रिच प्लाज्मा इंजेक्शन (पीआरपी) और बोन मैरो कंसंट्रेशन इंजेक्शन।

 

4.प्रोलोथेरेपी

प्रोलोथेरपी में घुटने के जोड़ों और लिगामेंट में उत्तेजित करने वाली दवाई का इंजेक्शन दिया जाता है। यह एक ऐसा उपचार है जिसमे मासिक रूप से तीन से चार महीने के लिए 15 से 20 इंजेक्शन लेने पड़ते हैं, इसके बाद भी कभी-कभी आवश्यक इंजेक्शंस लेने पड़ते हैं।

 

5.स्टेम कोशिकाओं के द्वारा उत्तकों का बनना-

इसमें रोगी के घुटने में स्टेम सेल्स का इंजेक्शन दिया जाता है जो शरीर के अंदर मौजूद उत्तकों को हेल्दी करता है और रोजमर्रा के कार्य करने के लिए सक्षम करता है।

ऊपर दिए सारे तरीके आपको नी रिप्लेसमेंट की सर्जरी और उसके बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स से बचाएंगे। इन तरीकों को अपनाने के साथ- साथ आपको अपने वजन को घटाने की भी आवश्यकता है, इसके लिए ज्यादा से ज्यादा शारीरिक कार्य करने की कोशिश करें।

 

चित्र श्रोत-Ed Bernstein and associates, vive health, source of health, the wall street journal, cleveland clinic health essentials

 

Ankit Kumar

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