Home / Uncategorized / इकलौती संतान की परवरिश करते हुए यह सावधानियाँ बरतें?
आजकल कई शादी-शुदा जोड़े अपना परिवार छोटा रखते हैं और एक ही बच्चे के साथ अपना परिवार पूरा करते हैं। एकलौती संतान होने क कारण कई बार बच्चे बिगड़ जाते हैं। अगर आप भी अपनी एकलौती संतान को बिगड़ने ने बचाना चाहती हैं तो देखें यह टिप्स-
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इकलौते बच्चे का अपने माता-पिता से काफी नज़दीकी रिश्ता बन जाता है। और इसी वजह से कुछ बच्चे अपने माता-पिता पर ज्यादा ही निर्भर हो जाते हैं। आप भी अनजाने में इस व्यवहार को सहारा दे देते हैं। इस स्तिथि से उभरने के लिए बच्चे को कुछ जिम्मेदारियां देनी चाहिए। इकलौते बच्चे को यह सीखना चाहिए की वे खुद को व्यस्त कैसे रखें ताकि आप बच्चे के मनोरंजक न बने रह जाएं।
बच्चे को समय समय पर अपने दादा–दादी, नाना–नानी, दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ मिलाने के लिए ले कर जाएँ। ऐसा करने से बच्चे में भावनात्मक और सामाजिक समझ आएगी और वह खुद को अकेला महसूस नहीं करेगा।
इकलौती संतान है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप उसे कोई काम न करने दें। बल्कि आप उसे मदद करने दें साथ ही अपना काम भी उसे खुद ही करने दें। जैसे रसोई में आप उसकी मदद ले सकते हैं,घर को सजाने में उसकी मदद लें। इन सबसे उसमे ज़िम्मेदारी की भावना आयेगी।
इकलौती बच्चे को प्यार की ज्यादा ज़रूरत होती है इसीलिए उन्हें ढेर सारा प्यार दें। उससे कभी ऊँची आवाज़ में बात न करें, आपका गुस्सा उसे विद्रोही और ज़िद्दी बना सकता है। अपने बच्चों के दोस्तों को घर पर बुलाएं और उनके साथ भी समय व्यतीत करें। बच्चों को भी उनके दोस्तों के साथ रहने दें। इससे न केवल वो एन्जॉय करेंगे बल्कि उन्हें अपने भाई-बहन की कमी भी महसूस नहीं करेंगे और आपको भी परवरिश में आसानी होगी।
बच्चे के साथ दोस्त बन कर रहें क्योंकि दो बच्चे अपनी समस्याओं और भावनाओं को आपस में बाँट सकते हैं लेकिन इकलौती संतान ऐसा नहीं कर सकती। ऐसे में आप घर में ऐसा माहौल बनायें कि बच्चा खुद ही आपके साथ सब कुछ शेयर करें। यह न केवल बच्चे लिए फायदेमंद होगा बल्कि आपके लिए भी बच्चे से जुड़ना आसान बनाएगा और आप बच्चे को और भी अच्छे तरीके से समझ पाएंगे।
6. अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं
अपने इकलौते बच्चे के साथ आप जितना हो सके उतना अधिक समय बिताएं। उसे कभी यह महसूस न होने दें की वह अकेला है। अपने बच्चे के साथ बाहर घूमने जाएँ। आप दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता कर अच्छा महसूस करेंगे और भावनात्मक रूप से करीब आएंगे।
बच्चे को कभी भी बोर न होने दें ऐसा कहते हैं न कि “खाली दिमाग मतलब शैतान का घर” इसलिए बच्चों को समय समय पर किसी क्राफ्ट मेले में ले कर जायें, डांस क्लास में शामिल करे या वो सब करने दें जो उन्हें पसंद हो। ऐसा करने से ना केवल बच्चे खुश रहेंगे बल्कि उनकी सोच और भी ज्यादा रचनात्मक बनेगी।
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