Home / Uncategorized / आज मेरे पास जवाब हैं और कुछ सवाल भी
आजकल मैं अपनी बेटी के लिए एक आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर ढूंढ रही हूँ | दरसल मेरी बेटी शिवानी जो सिर्फ 10 साल की है, आप मानेंगे नहीं वो किसी भी चीज़ से मिनटों में कुछ ऐसा बना देगी की आप यकीन नहीं कर पाएंगे | वो कहते है ना “मेकिंग बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट ” और इन सब चीज़ो से इतना लगाव देख कर रजित मेरे पति ने कहा इसे तो किसी आर्ट एंड क्राफ्ट क्लास में दाखिला दिलवाओ | पर मैं चाहती थी कि कोई होम ट्यूटर मिल जाएं |
बड़ी मुश्किल में एक टीचर मिली जो प्रशिक्षित भी थी और 7 साल का अनुभव भी था | मैंने यहाँ प्रशिक्षित इसलिए कहा क्योंकि मुझे लगता था कि पढ़ा लिखा इंसान समझदार होता है | जब मैंने सभी बातें फाइनल कर ली तो वो बोली “आपका बेटा नहीं है? सिर्फ एक बेटी ही है? ट्राई नहीं किया या कोई और प्रॉब्लम थी? मेरे अंदर जैसे आग सी लग गयी | ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये लाईने मैं पहले कम से कम 100 बार सुन चुकी थी एक अकेली लड़की की माँ के नाते |
बहुत कुछ कहा और सुना जा चुका है कि छोटी लड़कियों से कैसे और क्या बात करनी चाहिए | लेकिन अब समय है ये सोचने का कि लड़कियों की मम्मियों से क्या नहीं कहना चाहिए | बीते सालों में कई सवाल बार-बार किये गए और अब मेरे पास उनका जवाब है और कुछ सवाल भी है –
भगवान तेरी गोद बेटे से भर दें –
क्यों हमेशा हर औरत को यही आशीर्वाद दिया जाता है? क्या बेटी होने से गोद नहीं भरेगी?
बेटी हुई? सभी बच्चे भगवान का रूप होते हैं, कोई बात नहीं अगली बार बेटा हो जायेगा —
ये बात मैंने अपनी बेटी होने के शुरुवाती दिनों में सुनी | क्या मुझे बेटी को जन्म देने पर अफ़सोस करना चाहिए? क्या मैं किसी परीक्षा में फेल हो गयी हूँ जो मुझे दुबारा ट्राई करना चाहिए?
बास्केट बॉल खेलती है तभी सावली हो गयी हैं | थोड़ा दही हल्दी का उबटन लगाओ – मुझे समझ नहीं आता कि मेरी बेटी के रंग से आपको क्या फर्क पड़ता है? क्या उसकी स्किन का दिमाग से कनेक्शन है? शुक्र है सफलता रंग देखके नहीं मिलती!
पढाई में तो बहुत अच्छी है शिवानी, चलो अपने बच्चों को तो ठीक से पढ़ा लेगी —
क्या सिर्फ इसी मकसद से हम अपनी बेटियों को पढ़ाते लिखाते हैं? जिंदगी में पढाई-लिखाई की कुछ और एहमियत नहीं है?
एक बात बोली मिसेज़ शर्मा, आपकी बेटी नहीं, बेटा है –
क्या माँ होना तभी परिपूर्ण होता जब मेरा बेटा होता? और बेटा होना इतना ज्यादा जरूरी हैं कि आप मेरी बेटी को ही बेटा बनाने पर तुले हैं ! क्यों?
मैं एक बहुत अच्छे पड़ित को जानती हूँ | ऐसा उपाए बताएगा की अगली बार लड़का ही होगा —
आपको मैं किसी एंगल से बीमार लगती हूँ जो मुझे किसी दवा या उपाय की जरूरत है?
मैं तो कहती हूँ एक बार और ट्राई करों ! भगवान के घर देर है अंधेर नहीं —
अरे, मुझे बेटी हुई है | दुखों का पहाड़ नहीं टूटा मुझ पर | और आप जानते हैं मुझे, मेरी स्तिथियो को या मेरे शरीर को?
माँ बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत अनुभव है | लेबर एक ऐसी ब्लाइंड डेट है जब एक औरत अपने प्यार को पहली बार मिलती है | उसे नहीं पता होता वो लड़का है या लड़की लेकिन अपने बच्चे से प्यार ये देख कर नहीं किया जाता | चाहे लड़का हो या लड़की, लेबर पैन एक जैसा होता है, मदर फीड एक जैसा रहता है और बच्चे को पालने का सुख एक जैसा होता है | दुनिया के लिए वो लड़का या लड़की हो सकता है लेकिन एक माँ के लिए वो उसका नवजात शिशु है |
चित्र स्त्रोत –zenparent
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