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क्या आप को भी हो रहे हैं महीने में दो बार पीरियड्स?

Kavita Uprety | दिसम्बर 4, 2018

महिलाओं में माहवारी या पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और हर महीने कुछ दिनों के लिए हर एक स्त्री को इस के साथ जुड़ी हुई असुविधा और कुछ परेशानियों को झेलना पड़ता है। पर कभी कभी यह प्रक्रिया महीने में एक बार न होकर दो बार भी होने लगती है। ज़रूरी नहीं कि यह स्थिति हमेशा किसी बीमारी की सूचक हो लेकिन अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो इसके लिए आप को अपने चिकित्सक से तुरंत मिलना चाहिये ताकि आप इसका सही कारण जान सकें और इसे ठीक कर सकें। यहाँ हम आपको बताएँगे कुछ ऐसे तथ्य जो महीने में एक से ज्यादा बार पीरियड्स होने का कारण हो सकते हैं।

 

1.गर्भ निरोधक गोलियां –

अगर आप अपनी गर्भ निरोधक गोलियां लेना अक्सर भूल जाती हैं तो यह भी अनियमित रक्तस्राव का कारण हो सकता है। जब भी आप बर्थ कंट्रोल की गोलियां या इंजेक्शन लेना भूलती हैं तो रक्तस्राव होना स्वाभाविक है क्यूंकि शरीर में अस्वाभाविक तरीके से होर्मोंस की खपत में कमी आ जाती है। इन गोलियों पर लिखे निर्देशों के अनुसार अगर आप इसे दोबारा शुरू करते हैं तो यह धीरे धीरे ठीक हो जाता है। हालांकि इस अवधि में गर्भ निरोध के लिए किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल करना न भूलें।

 

2.प्रेग्नेंसी-

ज़्यादातर लोग यह जानते हैं कि प्रेग्नेंसी मतलब मासिक का रुक जाना। पर बहुत सारी स्त्रियॉं में गर्भ धारण के बाद भी थोड़ी थोड़ी ब्लीडिंग या स्पौटिंग होती रहती है। यह ज़्यादातर पहले तीन महीने में होती है और इसके व्यायाम या सेक्स करने के बाद होने की संभावना अधिक रहती है। इसके लिए आसान तरीका यह है कि आप एक प्रेग्नेंसी टेस्ट कर के इस बात की पुष्टि करें।

 

3.फाइब्रौइड-

गर्भाशय में होने वाले पॉलीप्स या फाइब्रौइड आजकल बहुत आम हैं और हॉरमोन असंतुलन के कारण हो सकते हैं। यह दो मासिक चक्रों के बीच के अंतराल में रक्तस्राव होने का कारण भी बन जाते हैं। साथ ही यह फाइब्रॉएड पीठ में दर्द, पेट में सूजन, एनीमिया, संभोग के वक़्त दर्द और रक्तस्राव का कारण भी होते हैं जोकि हालांकि मासिक से जुड़े हुए लक्षण नहीं होते। इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच से ही होती है और निदान के तौर पर सर्जरी द्वारा इनको निकाला भी जा सकता है।

 

4.वेजाइनल संक्रमण-

योनि और गर्भाशय में होने वाले संक्रमण कई वजह से आपकी परेशानी का कारण बन जाते हैं लेकिन कई बार ये मासिक के अलावा भी वेजाइनल ब्लीडिंग कर सकते हैं। चिकित्सक कहते हैं इन संक्रमणों के जीवाणु जैसे कि योनिओसिस या ट्राइकोमोनीसिस गर्भाशय की सूजन या संक्रमण और अनियमित रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं।

 

5.थाइरॉयड-

एक अंडरऐक्टिव या ओवरऐक्टिव थाइरॉयड ग्रंथि आपके मासिक के अंतराल को बढ़ा कर महीने में दो बार कर सकती है। खून की जांच के साथ इसकी पुष्टि की जाती है और नियमित दवा के साथ इस परेशानी को ठीक किया जा सकता है।

 

6.पीसीओएस

चिकित्सा विज्ञान के शोधों के अनुसार पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम एक हार्मोन असंतुलन है जो आठ से बीस प्रतिशत महिलाओं में पाया जाता है। यह स्थिति ओवल्यूशन के कम होने या बिलकुल न होने के कारण उत्पन्न होती है जिससे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन का असंतुलन पैदा हो जाता है और इसके प्रमुख लक्षणों से एक है अनियमित रक्तस्राव ।

 

7.मेनोपौज़ की शुरुवात-

पेरीमेनोपौज़ जो आपके तीस के दशक में भी शुरू हो जाता है, भी आपकी अनियमित मासिक अवधि का कारण बन सकता है जिसमें सामान्य रूप से अधिक अंतराल पर और अधिक मात्रा में ब्लीडिंग हो सकती है।

 

8.वज़न का बढ़ना

तेजी से वजन बढ़ने या घटने या फिर ज़रूरत से ज्यादा व्यायाम करने से भी ओव्यूलेशन को संतुलित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं जो आपके मासिक चक्र के सामान्य पैटर्न को बदल सकते हैं।

यह सभी वह सामान्य कारण हैं जो महीने में दो बार पीरियड्स होने पर चिकित्सकीय जांच के बाद देखने को मिलते हैं। फिर भी यदि आप इस समस्या से जूझ रहे हैं तो अपने चिकित्सक से मिल कर यह पता लगाएँ की ऐसा क्यूँ हो रहा है क्यूंकि एक चिकित्सक ही आपकी समस्या का सबसे बढ़िया उपाय बता सकता है।

 

चित्र स्त्रोत: Public Domain Pictures,  Pixabay, Wikipedia, uttarpradesh.org, flicker, chandigarhcitynews.com

 

Kavita Uprety

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