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क्या ज़िन्दगी की जंग जीत पाई रोशनी ?

Parul Sachdeva | अगस्त 21, 2018

बिस्तर पर लेटी रोशनी की सोच सीलिंग पर लगे पंखे की रफ़्तार से भी तेज घूम रही थी | वो कभी इस बात को उस बात से जोड़ती, कभी इस चीज़ को उस चीज़ के बिना टटोलती |

रोशनी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा कैसे हो सकता है वो जवान है, स्वस्थ है और अपने खाने-पान पर पूरा ध्यान देती हैं | उसने ऐसा क्या गलत किया जो सिर्फ उसके साथ ऐसा होना था |

रोशनी का एक भरा-पूरा परिवार था | बचपन से ही उसने अपने घर में एकजुटता का माहौल देखा क्योंकि जॉइंट फैमिली थी और रोशनी की किस्मत देखे उसके ससुराल में भी सब एक साथ राजी-ख़ुशी रहते थे | रोशनी की सास नहीं थी लेकिन घर में ससुर, देवर-देवरानी, उनके बच्चे, रोशनी का पति और बच्चे सब एक साथ ही रहते थे | छोटे से छोटा निर्णय हो या बड़े से बड़ा कदम -सबका साथ हर मुश्किल आसान कर देता था | लेकिन ऐसी कोई परेशानी थी ही नहीं, पैसे की कोई कमी नहीं, किसी ने ये काम नहीं किया तो दूसरा बिना कहे ही उसे पूरा कर देता था | सब ठीक चल रहा था कि एक दिन कुछ हुआ | सुबह उठते ही उसे अपनी ब्रैस्ट कुछ टाइट सी लगी | उसे ऐसा भी महसूस हुआ कि उसकी लेफ्ट ब्रैस्ट से राइट ब्रैस्ट का आकार थोड़ा बड़ा हुआ है | उसने 3-4 दिन तो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया फिर हर दिन सोचती कल रविंद्र उसके पति से बात कर डॉक्टर को दिखाने जाउंगी |

लगभग 3 हफ्ते तक उसने इन सभी बातों को नज़रअंदाज़ किया और घरेलु नुस्खों से ही इसे ठीक करने की कोशिश की | लेकिन जब कुछ आराम ना मिला तो उसने डॉक्टर को दिखाना ही ठीक समझा | और वो हो गया जो उसने सपने में भी नहीं सोचा था |

उसे ब्रैस्ट कैंसर था | जब उसे ये बात पता चली तो उसकी दुनिया बिखरने लगी | उसे ऐसा लगने लगा अब शायद कुछ भी उसकी दुनिया को वापिस नहीं संजो सकता | कीमोथेरेपी सेशन शुरू हुए | रोशनी की तबियत अब खराब रहने लगी | बच्चों की देख रेख, उनकी पढ़ाई, घर के सभी कामों पर इसका असर दिखाई दे रहा था |

कुछ महीनों तक तो देवरानी सब संभालती रही लेकिन फिर उसे भी रोशनी के बच्चों और पति को देखना बोझ लगने लगा |

क्या है ? मेरे पास सिर्फ यही काम रह गया है ? आपके पापा आएंगे तो उनके साथ बैठ के होमवर्क करना!

मेरा सर दर्द हो रहा है, जाओ यहाँ से !

मुसीबत गले पड़ गयी मेरे तो !

इस तरह की बातें कई बार लाचार रोशनी अपने बैड पर लेटे- लेटे सुनती रहती | कमजोरी के कारण उठने की हिम्मत ही नहीं होती थी |

पर जब उसके लगातार हॉस्पिटल चक्कर लगने शुरू हुए तो उसे अपने जैसे ना जाने कितने लोग मिले जिनकी हालत रोशनी की हालत से कई गुना बदतर थी |

साथ में ही बैठी एक 35 साल की मिसेस रावत को तो भगवान से कुछ दिनों की ही मोहलत मिली थी | पर उनकी बातें सुन रोशनी दंग रह गयी | वो कहती मेरे पास दिन कम है लेकिन अब अपने परिवार के लिए समय ही समय है | पहले मेरा बेटा आता था कहता मम्मा मेरे साथ बैट-बॉल खेलो तो मैं कहती अयान मम्मा बिजी ! काश मैंने उसके साथ होते हर पल की कदर की होती | अब तो ज़िन्दगी जीनी है मैंने अपने लिए और अपने परिवार के लिए ! बिंदास !

मिसेस रावत की इन बातों ने रोशनी के अंदर आशा की एक किरण जगा दी | डॉक्टर तो उसे पहले ही बोल चुके था कि पॉजिटिव थिंकिंग और विलपॉवर आपको जल्द ही ठीक कर सकती हैं | जब उसने अपने बच्चों की अपनी माँ के बिना ज़िन्दगी को देखा तो उसने अपनी ज़िंदगी से हो रही लड़ाई से जीतने का फैसला किया |

ट्यूमर शरीर में फ़ैल रहा था तो डॉक्टर ने राइट ब्रैस्ट की सर्जरी करने का सुझाव दिया | रोशनी और परिवारवालों के पास और कोई चारा भी नहीं था | सर्जरी सक्सेसफुल हो गयी और रोशनी फिर से अपने बच्चों की ज़िन्दगी में आये अँधेरे को अपनी रोशनी से मिटाने में लग गयी है | रोशनी आप सबको ये कहना चाहती हैं कि “वक़्त और टीचर दोनों सिखाते हैं | टीचर सिखा कर इम्तिहान लेती है लेकिन वक्त इम्तिहान लेकर सिखाता हैं “| आज वो कहती है दिल की आवाज़ तो हर इंसान सुनता है, अपने शरीर की आवाज़ सुनो और हर एक इंसान इन बातों का ध्यान रखे ताकि उनके बच्चो की ज़िन्दगी में हमेशा अपने माँ-बाप की रोशनी रहे –

  • हमेशा सतर्क रहे और छोटे से छोटे लक्षण को भी नज़रअंदाज़ ना करें |
  • सालाना हेल्थ चेक-अप करवाएं |
  • ब्रैस्ट-सेल्फ एग्जामिनेशन को समझे और अपने डॉक्टर से सलाह लें |
  • अगर इस प्रकार के कोई भी लक्षण हो तो घर में इलाज ना ढूंढे | इंटरनेट पर पढ़ कर कोई निष्कर्ष ना निकाले |
  • एक ही ज़िन्दगी हैं खुश रहे |

चित्र स्त्रोत- Stukesnola.org, wallpaper free desktop, gilitos.

Parul Sachdeva

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