Home / Uncategorized / जानिए च्यवनप्राश खाने के फायदे
आज के प्रदूषण भरे जीवन में स्वस्थ रहना हम सबके लिए एक चुनौती बन गया है। एक ऐसा शरीर जो हर बीमारी से लड़ने की क्षमता रखता हो हर किसी का सपना होता है। पुराने समय में जब जीवन के ज़्यादातर पहलू आयुर्वेद पर आधारित जीवनशैली से जुड़े हुए होते थे सर्दियों का मौसन आते ही सभी लोग च्यवनप्राश खाना शुरू कर देते थे। यहाँ तक कि च्यवनप्राश घर पर भी बनाया जाता था और बच्चों से ले कर बूढ़ों तक की रोजाना की खुराक में शामिल था। आप में से कई लोगों ने शायद यह कहानी सुनी होगी कि प्राचीन काल में इस अद्भुद आयुर्वेदिक फ़ौर्मूले का सेवन करके एक बहुत वृद्ध ऋषि जिनका नाम च्यवन था ने दोबारा युवावस्था प्राप्त की और उन्हीं के नाम पर इसे च्यवनप्राश नाम दिया गया।
च्यवनप्राश के मुख्य घटकों में आंवला होता है जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य की दृष्टि से अमृत के समान माना गया है। इसके अलावा इसमें औषधीय गुणों वाली कई और जड़ी बूटियाँ जैसे कि केसर, पीपल, दशमूल, हरड़, इलायची, दालचीनी, विदारीकन्द,जीवक, शहद, तेजपत्ता, विल्व और श्योनक की छाल, नागरमोथा, पुष्करमूल, सफेद मूसली इत्यादि वनस्पतियां मिलाकर च्यवनप्राश तैयार किया जाता है जो स्वाद में कुछ मीठा, हल्का खट्टा और कुछ मसालेदार सा होता है। आइये अब जानते हैं च्यवनप्राश खाने के फायदे।
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यह अद्भुद फॉर्मूला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को जबर्दस्त तरीके से बढाता है। आंवले से भरपूर च्यवनप्राश विटामिन सी का बढ़िया स्रोत है और यही इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है जिससे किसी भी तरह के संक्रमण या बीमारी के प्रति शरीर की रेसिस्टेंस पावर बढ़ जाती है।
च्यवनप्राश रेस्पाइरेटरी बीमारियों का रामबाण इलाज़ करता है। इसमें मौजूद औषधियाँ फेफड़ों को काम करने में मदद करती हैं और शरीर में नमी के स्तर को संतुलित रखती हैं। दमे की बीमारी वाले लोगों को अक्सर वैद्यों द्वारा च्वनप्राश खाने की सलाह दी जाती है।
खूब सारे एन्टीऑक्सिडेंट्स होने के कारण ये फॉर्मूला त्वचा को फ्री रैडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। यदि इसका नियमित सेवन किया जाए तो चेहरे पर झुर्रियां और बारीक रेखाएं कम आती हैं। विटामिन सी होने के कारण त्वचा की रंगत और इलास्टिसिटी भी लंबे समय तक बनी रहती है।
च्यवनप्राश शरीर को डिटोक्सिफ़ाई करने के लिए एक बेहतरीन उपाय है। इसके लगातार सेवन से रक्त की अशुद्धियाँ दूर होती रहती हैं और परिणामस्वरूप शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली सुचारु रूप से चलती रहती है और बाहरी त्वचा भी स्वस्थ बनी रहती है।
आंवला, ब्राह्मी, बादाम तथा घी जैसे तत्वों से भरपूर होने के कारण यह आपके हृदय और मस्तिष्क पर जादू जैसा असर डालता है और नियमित रूप से सेवन करने पर यादाश्त को बढ़ाने के साथ साथ नयी चीजों को सीखने की क्षमता को उन्नत करने और अच्छी ब्रेन पावर को बनाए रखने की क्षमता को बढ़ाता है।
आंवले को आयुर्वेद में हृदय के लिए अमृत समान माना गया है और च्यवनप्राश जोकि आंवलों के गुणों से भरपूर होता है खून को गाढ़ा नहीं होने देता और हृदय की धमनियों के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है जिससे हृदय स्वस्थ बना रहता है। इसकी अन्य जड़ी बूटियाँ शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती हैं और रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाती हैं।
तो देर किस बात की। सर्दियाँ आयें उससे पहले ही च्यवनप्राश परिवार में सभी को उनकी उम्र के अनुसार सेवन करायें। आप इसे दूध के साथ या ऐसे ही कभी भी खा सकते हैं। यकीन मानिए एक बार इसके फायदे जान कर आप सर्दियों में इसे लाना कभी नहीं भूलेंगे!
चित्र स्त्रोत: pexels, Wikimedia Commons, pixart, pixabay, Flicker,
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