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क्या हैं हेपेटाइटिस बी के लक्षण और प्रमुख कारण ?

Kavita Uprety | अगस्त 30, 2018

कल मुझे अपनी सहेलियों के साथ एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में जाने का मौका मिला । मुद्दा यह था कि बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस जैसे किसी भी संक्रमण से खुद को और अपने परिवार को कैसा सुरक्षित रखा जाये। वहाँ लीवर विशेषज्ञों ने यह बताया कि हेपेटाइटिस लीवर से संबन्धित रोग है तथा इसके सभी प्रकार लीवर में किसी न किसी रूप के संक्रमण का संकेत हैं।

उन्होने फिर बात की लीवर में सूजन पैदा करने वाले खतरनाक वायरस हेपेटाइटिस बी की जिस के संक्रमण से हेपेटाइटिस बी रोग हो जाता है। अगर शरीर में यह वायरस मौजूद है तो लीवर को लगातार उससे अपना बचाव करते रहना पड़ता है। वायरस बी हमेशा खतरनाक ही नहीं होता पर कभी कभी यह लीवर को इस हद तक प्रभावित कर सकता है कि जीवन के लिए संकट पैदा हो जाये। यह वायरस दो प्रकार का हो सकता है ऐक्टिव और डोरमेंट। डोरमेंट अवस्था में रक्त की नियमित जांच कराते हुए इस पर लगातार नज़र रखने की जरूरत होती है जबकि एक्टिव स्थिति खतरनाक है और दवा द्वारा इसका इलाज जरूरी है।

डॉक्टर्स ने ये भी बताया कि हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होने के तुरंत बाद आमतौर पर कोई लक्षण सामने नहीं आता। यह एक ऐसा  रोग है जिसके संक्रमण के कोई शुरुवाती लक्षण नहीं होते और मरीज़ को कई बार लंबे अर्से तक पता भी नहीं होता कि वह संक्रमित हो चुका है। यह वायरस कई वर्षों तक शांत रहते हुए रूप से लीवर को कमजोर बनाता रहता है और अचानक इस का परिणाम लीवर कैंसर या लीवर सोरायसिस जैसे रोगों के साथ सामने आता है । हेपेटाइटिस बी के शुरुआती लक्षण में कुछ हैं-

  • पेट में दर्द ,भूख की कमी और थकावट रहना
  • हल्का बुखार और मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना
  • खाने की इच्छा ना होना और उल्टी आना
  • त्वचा और आँखों का पीला पड़ना
  • पेशाब का रंग गहरा पीला या काला पड़ना

 

अगले प्रेजेंटेशन में यह बताया गया कि खून की जांच होने के बाद यह मालूम हो जाता है हेपेटाइटिस बी किस तरह का है। ऐक्यूट या क्रोनिक। इनमें यह अंतर है कि रोग की पुष्टि होने के बाद अगले छह महीने के अंदर यदि वह चिकित्सा से कम या खत्म हो जाता है तो उसे ऐक्यूट अवस्था माना जाता है जिसमें रोगी लगभग ठीक हो जाता है। यह वह औसत समय है जो हेपेटाईटिस बी के संक्रमण से मुक्त होने के लिए लगता है। यदि छह महीने के बाद भी हेपेटाईटिस बी का वायरस आपके रक्त में पॉज़िटिव रहता है , तो यह क्रोनिक हेपेटाईटिस बी माना जायेगा जो एक आजीवन रहने वाला रोग है और इस के लिए नियमित चिकित्सा एवं जांच की ज़रूरत रहती है।

छोटी छोटी बुकलेट्स देते हुए उन्होने कहा कि आप इसे पढें और जानकारी बढ़ाएँ। उनमें यह बताया गया था कि एक स्वस्थ व्यक्ति में हेपेटाईटिस बी संक्रमण के कारण लगभग एचआईवी के जैसे ही हैं। जैसे कि –

 

खून के संपर्क में आने से

मुख्य कारण है किसी ऐसे व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से जिसे हेपेटाईटिस बी है। यह संक्रमण उसकी लार में मौजूद हो सकता है या उसके द्वारा प्रयोग की गयी सिरिन्ज, रेज़र या टूथब्रश के इस्तेमाल से भी हो सकता है। शरीर पर बनवाए जाने वाले टैटू या एक्यूपंक्चर में प्रयोग होने वाली सुई से भी हो सकता है। साथ ही साथ यह ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है कि बीमारी में आपको चढ़ाया जाने वाला खून इस रोग से संक्रमित व्यक्ति का ना हो।

 

असुरक्षित यौन संबंध एवं ड्रग्स लेने की आदत

हेपेटाईटिस बी से संक्रमित व्यक्ति के साथ बनाए गए असुरक्षित यौन संबंध इस रोग के फैलने की सबसे बड़ी वजह हैं। साथ ही ऐसे सभी व्यक्ति जो ड्रग्स का शिकार हैं अगर हेपेटाईटिस बी से संक्रमित सुई का इस्तेमाल करते हैं तो इस रोग को बुलावा दे रहे होते हैं।  

 

मां का संक्रमित होना –

यदि कोई महिला हेपेटाईटिस बी से संक्रमित हो तो उसके शिशु को भी प्रसव के दौरान इसका संक्रमण हो सकता है।

 

लंबे समय तक किडनी डायलिसिस होते रहना

किडनी के रोगियों में जिन्हें लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना पड़े उनमें हेपेटिक जटिलता के जोखिम के कारण हेपेटाईटिस बी के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।   

डॉक्टर्स ने इस सब के साथ यह भी बताया हर एक स्वस्थ् व्यक्ति को भी अपने खून की जांच करानी चाहिए और नेगेटिव आने पर भी हेपेटिटिस बी के वैकसीन का पूरा कोर्स तुरंत करवाना चाहिए।  क्यूंकि इस रोग से बचने का यही एक उपाय है।

चित्र स्त्रोत: www.maxpixel.com , www.wikimedia.org, www.wikipedia.org, www.flickr.com, www.raksti.daba.lv  www.Army.mil  www.5th Air Force.com  

 

 

 

Kavita Uprety

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