डिप्थीरिया के कारण, लक्षण और उपचार

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डिप्थीरिया जीवाणुओं से होने वाला एक संक्रमण है जो ज्यादातर नाक और गले में होता है। यह संक्रमण आमतौर पर बच्चों में होता है और उन देशों में सबसे अधिक व्यापक रूप से देखा जाता है जहां माता-पिता बच्चों को टीकाकरण नहीं दिलवाते। पश्चिम में लोगों के लिए डिप्थीरिया होना एक आम बात है। डिप्थीरिया से बचने के लिए बहुत से वैक्सीन्स उपलब्ध हैं जो एक प्रतिरक्षक के रूप में कार्य करते हैं।

 

डिप्थीरिया के मुख्य कारण क्या हैं?

डिप्थीरिया का मुख्य कारण ‘कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया’ नामक बैक्टीरिया है। यह बेहद संक्रामक है और यह संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जब आप डिप्थीरिया से ग्रसित व्यक्ति को उन्हें स्पर्श करते हैं तो उसके जीवाणु आप पर हमला कर सकते हैं। सही इलाज नहीं होने पर यह संक्रमण निम्नलिखित समस्याओं का कारण बन सकता है :

  • नस की क्षति
  • रक्त प्रवाह में अवरोध
  • ह्रदय का सही से काम न करना
  • किडनी की समस्या
  • पैरालिसिस (लकवा)
  • ब्रेन डैमेज

 

डिप्थीरिया की पहचान कैसे करें?

डिप्थीरिया में आपकी जीभ, गले और नाक पर भूरे रंग की परत जम जाती है। यह आपके पूरे रक्त प्रवाह में बहुत सारे विषाक्त पदार्थों को छोड़ता है। इसकी वजह से कभी-कभी स्यूडोमेम्ब्रेन हरा, काला या नीला हो जाता है। हालांकि डिप्थीरिया गले का संक्रमण है, लेकिन यह आपकी त्वचा पर भी हमला कर सकता है।

 

डिप्थीरिया से संक्रमित व्यक्ति निम्न चीज़ों से पीड़ित हो सकता है:

  • कमजोरी
  • बुखार
  • दिल का तेजी से धड़कना
  • गर्दन का मोटा होना
  • नाक और गले का बहना
  • गले में खराश
  • निगलने में कठिनाई
  • बच्चों को बुखार, सर्दी और उल्टी महसूस होना

 

इस घातक जीवाणु संक्रमण का ईलाज कैसे करें?

आपका डॉक्टर आपके डिप्थीरिया के लक्षणों का निदान करेगा। यदि आपके गले या टॉन्सिल में भूरे रंग की परत हो, तो आगे विश्लेषण और जांच करवाने की सलाह दी जाएगी।

एक बार इस जीवाणु संक्रमण का पता चल जाने पर, आपको एंटीटॉक्सिन इंजेक्शन दिया जाएगा। आगे होने वाली समस्याओं से बचने के लिए रक्त वाहिकाओं में मौजूद विषाक्त पदार्थों को हटाना बहुत ज़रूरी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आपको दूसरों के संपर्क में रहने से बचना होगा।

इसके अलावा, आपके शरीर की प्रतिक्रिया को देखते हुए डॉक्टर द्वारा आपको कुछ टीकाकरण लेने को कहा सकता है। साथ ही साथ आपको कुछ एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह भी दी जा सकती है।

 

इस तरह के संक्रमण को कैसे रोकें?

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अज्ञानता के कारण बच्चों अक्सर फ्लू से ग्रसित हो जाते हैं जो आगे जाकर बुखार का रूप ले लेते हैं। टीकाकरण इस तरह के संक्रमण से बचने के लिए एक रास्ता प्रदान करता है। बच्चों को 6 सप्ताह की उम्र के बाद टीकाकरण की आवश्यकता होती है, इसके 4 सप्ताह के बाद दो बूस्टर खुराक दी जाती है और फिर 4 से 6 साल के बाद एक खुराक दी जाती है। बच्चों के लिए, यह पांच शॉट्स में दिया जाता है। वयस्कों को भविष्य में इस प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए उसी समय टेटनस बूस्टर टीका दिया जाता है।

 

चित्र श्रोत: Air Force, Wikipedia

 

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