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टीबी के कारण, लक्षण और उपचार

Ankita Kumari | नवम्बर 20, 2018

टीबी एक बहुत ही खतरनाक संक्रमण है जिससे लगभग दुनियाभर के एक चौथाई लोग प्रभावित हो चुके हैं और हर साल 1 प्रतिशत नए लोग इससे प्रभावित होते हैं। यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो हमारे फेफड़ों को प्रभावित करती है। टीबी की वजह से होने वाली मृत्यु की औसत दर 12 से 15 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में, इस संक्रमण की वजह से करीब 1 करोड़ लोग बीमार पड़ गए और लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु हो गयी। अन्य घातक संक्रमणों की तुलना में, टीबी दुनिया भर में होने वाली दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी है।

 

टीबी के कारण

यह संक्रमण बैक्टीरिया के कारण होता है जिसे माइकोबैक्टेरियम कहा जाता है।

यह बैक्टीरिया हवा के माध्यम से, सीधे संपर्क से या प्रदूषण के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है, फिर धीरे-धीरे शरीर में मौजूद रक्त और ऑक्सीजन की सहायता से बढ़ने लगता है। अगर इस संक्रमण का ईलाज ठीक से नहीं किया जाए तो यह घातक साबित हो सकता है।

 

टीबी के लक्षण-

गुप्त टीबी के कोई लक्षण नहीं होते हैं लेकिन सक्रिय टीबी के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं:

  • 3 सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाली खांसी (रक्त वाली खांसी)।
  • सांस लेने या खांसी के दौरान छाती का दर्द।
  • अचानक वजन घटना।
  • साँसों की कमी।
  • सूजी हुई लसीका ग्रंथियां।
  • भूख में कमी।

टीबी आपके शरीर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जिसमें आपके गुर्दे, दिल, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क शामिल हैं। जब टीबी फेफड़ों के बाहर फैलता है तो अलग-अलग अंगो के लिए लक्षण भी अलग-अलग होते हैं।

 

टीबी का निदान-

टीबी का निदान करने के लिए डॉक्टर द्वारा शारीरिक जाँच कराने की आवश्यकता होती है। डॉक्टर को आपके सांस लेते वक़्त आपके फेफड़ों की आवाज़ सुनकर ये पता लग जाएगा की आपके लिम्फ नोड्स में किसी प्रकार की सूजन है या नहीं। फिर आपको आगे निम्नलिखित जाँचों को करवाने की सलाह दी जा सकती है:

  • रक्त परीक्षण: इससे रोगी के खून में उपस्थित माइकोबैक्टेरियम की जाँच होती है। हालांकि, रक्त परीक्षण से गुप्त या सक्रिय टीबी के बीच की पहचान नहीं की जा सकती।

  • छाती की एक्स-रे: छाती की एक्स-रे फेफड़ों के नुकसान की सीमा दिखा सकती है।

  • बलगम की जाँच: यह परीक्षण खांसी में मौजूद श्लेष्म पर किया जाता है और इससे आसानी से माइकोबैक्टीरियम की उपस्थिति का पता चल जाता है।

 

टीबी का उपचार

ज्यादातर देशों में, बच्चों को टीबी के जीवाणुओं के खिलाफ लड़ने के लिए ‘बेसिलस कैल्मेट ग्वेरिन (बी.सी.जी)’ नामक टीकाकरण दिया जाता है। भारत में नए टीबी रोगियों को अब नियमित रूप से अंतराष्ट्रीय स्तर पर माने गए प्राथमिक उपचार दिए जाते हैं। शुरूआत के चरण में आठ हफ़्तों के लिए दवा दी जाती है।

रोगियों के शरीर के वजन के अनुसार उन्हें दवाइयों के खुराक दिए जाते हैं और फिर उन्हें चार वजन बैंड में वर्गीकृत किया जाता है। सभी मरीजों को भारतीय स्वास्थ्य विभाग के डी.ओ.टी.एस (डायरेक्ट औब्ज़र्व्ड थेरेपी शॉर्ट टर्म) कार्यक्रम के तहत टीबी दवाइयों की दैनिक खुराक दी जाती है। सभी मरीजों को एक डी.ओ.टी.एस एजेंट के सामने दवा का उपभोग करना होता है।

 

चित्र स्रोत: Flickr, Pixabay, Wikimedia Commons

Ankita Kumari

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