स्ट्रेस और पैरों की थकान के लिए अपनाएं ये योग

Spread the love

हम सभी के शरीर हमारे पैरों पर ही टिके हुए हैं और अक्सर हम अनजाने में अपने पैरों का अधिक उपयोग कर इन्हें थका देते हैं l ऑफिस में बिताया एक लम्बा दिन या पूरे दिन का घर का काम हमारे पैरों पर अधिक दबाव डाल देता है और इस कारण हमारे पैरों में थकान और सूजन आ जाती है l परन्तु यहाँ पर लिस्ट किए गए योगा के आसनों को अपने रोज़ के व्यायाम रूटीन में अपनाने से और इनको नियमित रूप से प्रैक्टिस करने से अवश्य ही पैरों की थकान से राहत मिल सकती है, हमारे शरीर में जोड़ों की मज़बूती बढ़ सकती है और हमारे मन को शांत और संतुलित रखने में मदद मिल सकती है l

 

1.चाइल्ड पोज़ –

चाइल्ड पोज़, जिसे बालासन के नाम से जाना जाता है, इसकी प्रैक्टिस करने से रीढ़ की हड्डी लम्बी होती है और हमारे कन्धों, पीठ के निचले हिस्सों, कूल्हों, जांघों और एड़ियों की मांसपेशियों को खींच कर इन्हें टोंड रखती हैं l यह पाचन क्रिया को भी प्रोत्साहित करता है l

 

2.वीरों की पोज़ –

इसे वीरासन के नाम से जाना जाता है, इससे  कूल्हों, जांघों, एड़ियों और पैरों का खीचाव बढ़ता है l वीरासन से शरीर की पाचन शक्ति में लाभ होता है, गर्भावस्था में पैरों की सूजन से राहत मिलती है और मेनोपॉज़ के लक्षणों से राहत मिलती है l

 

3.रेक्लाइंड पिजन पोज़ –

इसे सुप्त कपोतासन के नाम से भी जाना जाता है और यह जांघों की हड्डियों और कूल्हों के गति-नियम को बढ़ावा देता है l सुप्त कपोतासन क्षोणी क्षेत्र तक रक्त परिसंचरण की मात्रा को बढ़ाता है, पाचन शक्ति बढ़ाता है और कूल्हों को खोलने में सहायता देता है l

 

4.हैप्पी बेबी पोज़ –

इसे आनंद बालासन के नाम से भी जाना जाता है और यह जांघों के भीतरी हिस्से को और पीठ के निचले हिस्से को खींच कर मज़बूत करता है, कूल्हों को खोलता है, रीढ़ की हड्डी को लम्बा करता है और इससे स्ट्रेस कम होता है l आनंद बालासन से मन शांत और स्ट्रेस-फ्री रहता है l  

 

5 .सुपाइन तितली –

इसे लेटी हुई तितली या सुप्त बद्धा कोनासान की परिवर्तित क्रिया के नाम से भी जाना जाता है और यह जांघों के अंदर के हिस्सों, कूल्हों और घुटनों को खींच कर मज़बूत करता है l सुप्त बद्धा कोनासान डिप्रेशन, स्ट्रेस, मेनोपॉज़ और मासिक धर्म के लक्षणों से आराम देता है l

 

6.लेग्स अप दी वॉल पोज़ –

इसे विपरीता करानी के नाम से भी जाना जाता है और यह धीरे से ऊपरी धड़, गर्दन के पिछले हिस्से, घुटनों के पीछे की नसों को खींचता है l यह पीठ के निचले हिस्से और श्रोणि क्षेत्र के स्ट्रेस को कम करता है और दोनों का आराम देता है l विपरीता करानी मन को शांत करता है और माइल्ड डिप्रेशन, मूत्र विकार, वेरिकोस वेन्स, माहवारी के दर्द, मेनोपॉज़ और मायग्रेन के लक्षणों से लड़ने में सहायता करता है l

 

7.स्ट्रैडल लेग्स-

इसे उपविस्था कोनासन के नाम से भी जाना जाता है, इससे पैरों और कूल्हों के बाहरी और अंदर के हिस्सों में खिचाव आता है, जांघों के अंदर के हिस्से को ढीला और रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करता है l उपविस्था कोनासन करने से श्रोणि क्षेत्र में रक्त संचालन बढ़ता है और इस तरह महावारी और मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली समस्याओं में इस आसन को करने से राहत मिलती है l

इन आसनों को करने के लिए यहाँ देखें –

अगर आप समय की कमी के कारण इन आसनों को अपने रोज़ के व्यायाम रूटीन में शामिल नहीं कर सकते तो किसी दिन जब आप बहुत ही थक गएं हैं उस दिन इन्हें ज़रूर कर कर देखें, आपके पैरों को अवश्य आराम मिलेगा l

चित्र श्रोत: pixabay, yogaclassplan, inbalancehealth, yogajournal, enfait, ashleyneese,

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *