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हम और हमारा एक या हम दो हमारे दो ?

Parul Sachdeva | जुलाई 4, 2018

पहले कहते थे “हम और हमारे दो ” लेकिन आजकल नुक्लेअर फैमिली की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से “हम और हमारा एक” ही रह गया है | आजकल एक बच्चे को संभालना इतनी बड़ी जिम्मेदारी का काम है तो दो बच्चे होने का मतलब ज्यादा काम और ज्यादा खर्चा | ना ही ये आपके करियर पर असर डालता है बल्कि आपकी आजादी को भी कुछ हद तक खत्म करता है| ऐसे में हर चीज़ आपको 2 चाहिए |

पहले बच्चे का हर कोई ध्यान रखता है, लाड प्यार की कोई कमी नहीं होती लेकिन छोटा बच्चा कई बार नज़रअंदाज़ हो जाता है | अपने दूसरे बच्चे के जन्म से पहले, कितने माँ-बाप चाहते हुए भी पहले बच्चे पर ध्यान नहीं दे पाते और ये सब उस बच्चे के व्यवहार में साफ़ झलकता हैं | कहते हैं ना “पहले एक मुठी में पैसे जाते थे और झोला भर चीनी आती थी अब एक झोले में पैसे जाते हैं और मुठी भर चीनी आती है| ” इतनी महंगाई के चलते 2 बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण का भी ध्यान रखना पड़ता है | आपको बहुत बार ऐसे चीज़े सुनने मिलती हैं की “मम्मी रूही को ज्यादा प्यार करती है” या फिर पापा मुझे भी करन जैसा बैग चाहिए ” | छोटे भाई या बहिन को बहुत बुरा लगता है जब उन्हें बड़े भाई /बहिन की पुरानी किताबें, कपड़े या सामान यूज़ करना पड़ता है |

अगर आपका एक ही बच्चा होता तो तुलना या मुकाबले का सवाल ही पैदा नहीं होता | कितनी ही बार 2 बच्चों के बीच एक संतुलन बिठाना नामुमकिन सा हो जाता है | कितनी ही बार एक बच्चे पर ज्यादा ध्यान देना पड़ जाता है ऐसे में दूसरा बच्चा नज़रअंदाज़ हो जाता है | कई बार तो उन्हें लगता हैं कि मम्मी पापा को सिर्फ करन की जरुरत हैं मेरी नहीं | माता-पिता के लिए इसे संभाल पाना बहुत मुश्किल हो जाता है |

पर क्या ये सही कि सिर्फ एक ही बच्चा हो ? हां, एक बच्चा होता है तो उसे सब बेस्ट देना आसान हो जाता है पर अगर आपको बोले कि अपनी ज़िन्दगी को बिना भाई-बहिन के सोचें ? जवाब मिल जाएगा | भाई-बहिन का प्यार और साथ कोई और नहीं दे सकता | दो बच्चे होने से उनमे शेयरिंग की आदत आती है | एक साथ खेलना, एक साथ खाना – ये एक खूबसूरत रिश्ता है जो हर रिश्ते से ऊपर है | बड़ा भाई/बहना छोटे भाई का ध्यान रखता है, उसे प्यार देता है | जब मम्मी-पापा घर नहीं होते तो एक दूसरे का साथ उनके लिए बहुत होता है | एक दूसरे की प्रोब्लेम्स को दूर करना या बात करना – एक सच्चा दोस्त उनके पास हर दम रहता है | माता-पिता बड़े बच्चे के कपड़े या सामान छोटे बच्चे के लिए रख सकते हैं | पहले बच्चे के समय माँ-बाप को इतना अनुभव नहीं होता लेकिन दूसरे बच्चा होने पर वे पहले ही उन सभी चीज़ो से गुजर चुके होते हैं | और जो बातें आपको आपका भाई या बहिन सिखा सकता हैं वो दुनिया में कोई और नहीं सिखा सकता |

बच्चे कितने हो इसके लिए बहुत सी बातों पर गौर करना पड़ता है जैसे हालात, करियर, घर के कामों में हाथ बांटने वाला, माता की शारीरिक स्तिथि, एक से ज्यादा बच्चों को पालने की क्षमता | आखिरकार, माता-पिता पर निर्भर करता है कि उनको कितने बच्चे चाहिए | आपकी सलाह किसी और के काम आ सकती है ? आपका अनुभव क्या कहता है ?

 

Parul Sachdeva

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