माइक्रोवेव खरीदने से पहले क्या जानना है जरूरी?

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आधुनिक समय में माइक्रोवेव हर रसोईघर की जरूरत बन गया है। समय की कमी के कारण कम समय में खाना पकाना जिन लोगों की जरूरत है उनके लिए माइक्रोवेव एक जरूरी उपकरण है। भारत में कई सारी लोकप्रिय कंपनियां माइक्रोवेव बेचती हैं लेकिन सही माइक्रोवेव का चुनाव केवल ब्रांड के आधार पर न करके अपनी जरूरत के मुताबिक करना चाहिए। अगर आप भी अपनी रसोई के लिए एक माइक्रोवेव खरीदने जा रहे हैं तो आइये हम आपको देते हैं कुछ झटपट सुझाव ताकि आपके पैसे का सही इस्तेमाल हो सके।

सबसे पहले तो ये जानिए कि माइक्रोवेव कितने तरह के होते हैं और उनका क्या क्या इस्तेमाल किया जाता है। पहला है कन्वेन्शनल माइक्रोवेव – यह कम कीमत का उपकरण है जिसमें खाना पकाने, गरम करने और डीफ़्रोस्टिंग जैसे सामान्य काम आसानी से किए जा सकते हैं। दूसरा है ग्रिल माइक्रोवेव – यह थोड़ी और अधिक कीमत में उपलब्ध है और इसमें साधारण खाना पकाने के अलावा, बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग जैसे अन्य काम भी किए जा सकते हैं। तीसरा है कन्वेक्शन माइक्रोवेव – जो सर्वाधिक कीमत में ऊपर बताए गए सभी कामों के साथ साथ भोजन को कुरकुरा बनाने के लिए जरूरी ऊर्जा को समान रूप से फैलाता है और बिस्किट इत्यादि बेकरी के पदार्थों के साथ साथ बार्बेक्यू जैसे खाना पकाने के विकल्प भी देता है।

इस के अलावा और क्या क्या जानना है जरूरी –

 

माइक्रोवेव का आकार और डिजाइन

माइक्रोवेव कई आकार में आते हैं लेकिन आप के लिए उपयुक्त आकार वही है जिसमें आपके परिवार की ज़रूरत के हिसाब से खाना पकाया जा सके । मध्यम आकार के माइक्रोवेव जो लगभग बीस से तीस लीटर की क्षमता के होते हैं सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इसके अलावा आपकी रसोई के आकार और उपलब्ध जगह के अनुसार ही माइक्रोवेव का चुनाव करें ताकि इसे सहजता से रखा और चलाया जा सके। यह आपकी रसोई का हिस्सा लगे इसके लिए हम यह सुझाव देंगे कि आप अपनी रसोई के इंटीरियर डिजाइन से मेल खाता हुआ उपकरण खरीदें ताकि पूरी रसोई में एकरूपता बनी रहे।

 

ब्रांड –

कई सारे बड़े ब्रांड के माइक्रोवेव बाज़ार में उपलब्ध हैं पर किसी भी ब्रांड का चुवाव करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों पर गौर करें जैसे कि, उपकरण पर दी जाने वाली वारंटी की अवधि, और उपकरण के कौन कौन से हिस्से उस वारंटी में आते हैं। इस के अलावा कोई खराबी होने की हालत में उस ब्रांड की ग्राहक सेवा और फुटकर पुर्जों की उपलब्धता का होना बहुत ज़रूरी है।

 

ऑटोमैटिक सेन्सर और सुरक्षा के विकल्प –

जहांऑटोमैटिक सेन्सर खाने के पकते ही अलार्म देता है जिससे खाना जलने न पाये वहीं चाइल्ड सेफ़्टी लौक का विकल्प उन परिवारों के लिए विशेष रूप से ज़रूरी है जहां बच्चे भी हैं।

 

कंट्रोल पैनल-

ऑटोमैटिक कंट्रोल पैनल के साथ साथ अगर आपके उपकरण में एक टच कंट्रोल पैनल भी हो तो उससे यह सुविधा रहती है कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से समय और ऊर्जा का चयन कर सकते हैं जबकि रोज़मर्रा के अलावा कभी भी टच कंट्रोल के खराब होने की स्थिति में ऑटोमैटिक कंट्रोल पैनल के बटनों का इस्तेमाल कर के काम चलाया जा सके।

 

बिजली की खपत –

आपके उपकरण को जितनी अधिक पावर रेटिंग दी गयी है उतना ही ज्यादा वो बिजली की बचत करने में सक्षम होता है। पावर रेटिंग उपकरण के चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अधिक वाट का उपकरण जल्दी खाना पकाता है और अमूमन मध्यम आकार का एक हज़ार वाट का माइक्रोवेव खाना ठीक तरह से पकाने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

 

चित्र स्त्रोत :www.mybusinessindia.com, www.pxhere.com www.interbrand.com www.flickr.com, www.pexels.com

 

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