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पीरियड्स से जुड़े अन्धविश्वास और धारणाएं

Sonal Sardesai | सितम्बर 25, 2018

यह बेहद आश्चर्यजनक बात है की इस सदी में भी लोग मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को इतनी गंभीरता से मानते हैं। ये पुरानी धारणाएं प्राचीन काल से चली आ रहीं हैं। इनमें से कुछ बातों को खास वजहों से माना जाता था जैसे की पुराने ज़माने में उचित साधन और पर्याय की मौजूदगी नहीं थी। लेकिन आज के दौर में, जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने इतनी तरक्की कर ली है और आसमान छू लिया है, मासिक धर्म से जुड़ी इन पुरानी दखियानुसी विचारधाराओं को लेकर मन में प्रश्न-चिन्ह ज़रूर उठते हैं। और तो और, मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं के कारण ही महिलाओं का दर्जा समाज में गिर जाता है और उनका आत्मविश्वास घट जाता है।

 

1.धार्मिक और पूजा के स्थलों में प्रवेश से वंचित

जो महिलाएं माहवारी से गुज़र रहीं होती है, उन्हें अपवित्र माना जाता है। इसी कारणवश पूजा के स्थानों में उनको प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती। लेकिन वास्तव में, माहवारी के दिनों में महिलाएं बिलकुल स्वस्थ होती हैं क्योंकि यह एक साधारण प्रक्रिया है जो प्राकृतिक रूप से घटती है और इसका सफाई और पवित्रता से कोई लेना देना नहीं है।

 

2.माहवारी के दिनों में व्यायाम करना स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है

कई महिलाओं का मानना है की पीरियड्स के दिनों में किसी भी प्रकार के एक्ससरसाइज़ या वर्कआउट रूटीन से उनका दर्द और खून का बहाव बढ़ जाएगा। वास्तव में यह बिलकुल उल्टा है, इन दिनों में एक्ससरसाइज़ करने से पीरियड्स के दौरान महसूस होने वाले पेट के क्रैम्प्स दूर होते हैं और आराम मिलता है। योगा, पिलाटेस या कोई भी सरल वर्कआउट रूटीन अपनाने से माहवारी का दर्द काम होता है और मूड भी सुधर जाता है।

 

3.माहवारी के दिनों में बाल धोने से बांझपन होने की संभावना रहती है

जी हाँ, ज़्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं की ऐसा क्यों माना जाता है लेकिन तब भी वे अंधाधुंध इस विचार-धारा को मानते हैं और इसे अपनाते हैं। पीरियडस के पहले दिन सर से नहाना और फिर बाकी दिनों में इसलिए न नहाना की रक्त प्रसव घट जाएगा और बाँझपन हो जाएगा, ये बेहद दखियानुसी और बेतुकी धारणाएं हैं! आप पीरियड्स के दिनों में दिन के किसी भी समय सर से नहा सकतीं  हैं और अपने आप को स्वच्छ रख सकती हैं।

 

4.माहवारी के दिनों में महिलाओं को घर के बाकी सदस्यों से अलग रहना चाहिए

क्योंकि महिलाओं को माहवारी के दिनों में अस्वस्थ,अशुद्ध और अपवित्र माना जाता है, उनसे  सामान्य जीवनशैली से दूर रहने की अपेक्षा की जाती है। उन्हें कुछ प्रकार के खानों को छूने से मनाई होती है और उनसे अलग खाने के बर्तन और सोने के लिए अलग बिछौने इस्तेमाल करने की अपेक्षा की जाती है। और तो और, ये भी माना जाता है की पीरियड्स के दौरान  महिलाओं को छूना अनुचित है ,हालांकि ये सब बेकार की बातें हैं क्योंकि इन दिनों में महिलाएं एक प्राकृतिक प्रक्रिया से गुज़रती हैं, जिसके दौरान वे बिलकुल स्वस्थ रहती हैं।

 

5.पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को खाना नहीं बनाना चाहिए और रसोई में प्रवेश नहीं करना चाहिए

इस धारणा को नए मॉडर्न ज़माने में अलग ही पहलू दे दिया गया है लेकिन इस बात के पीछे अलग ही वजह है। महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में किचन में प्रवेश कर कर अपने रोज़मर्राह के कामों को करने की अनुमति नहीं रहती क्योंकि उन्हें अशुद्ध माना जाता है। लेकिन पुराने ज़माने में उन्हें इन दिनों में आराम करने को कहा जाता था और उन्हें अपने रोज़ के कामों से छुट्टी मिल जाती थी। लेकिन आज के दौर में  लोगों ने इस विचार-धारा को अलग ही रूप दे दिया है और लोग तो माहवारी के दिनों में महिलाओं का खाना भी नहीं छूते!

 

पीरियड्स से जुड़ीं कुछ और अजीबोगरीब मिथकों के बारें में जानें जो अन्य देशों में मानी जाती हैं –

  • कोलंबिया में माहवारी के दिनों में बल धोना या काटना मना है
  • मलेशिया में ये माना जाता है की अगर आप कूड़े में डालने से पहले अपना सेनेटरी पैड नहीं धोयेंगे, तो आपके पीछे भूत लग जाएंगे!
  • रोमानिया में यह माना जाता है की अगर आप पीरियड्स के दौरान किसी फूल को छू लेंगे तब वह फूल जल्दी मर जाएगा
  • बोलीविया में माहवारी के दौरान नवजात शिशुओं को छूने की मनाई होती है
  • जापान में माहवारी के दिनों में सूशी बनाने में समस्या आती है क्योंकि इन दिनों में मुँह का स्वाद बिगड़ जाता है

इनमें से कई मिथकों और अंधविश्वासों के बारें में पढ़ कर आपको ज़रूर आश्चर्य हुआ होगा और तो और हसीं भी आयी होगी लेकिन अगर गंभीरता से सोचा जाए तो पीरियड्स के दौरान महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में सही प्रकार की जाग्रुकता लाना बेहद आवश्यक है और महिलाओं का आत्मसम्मान और समाज में उनका दर्जा ऊपर रखने के लिए इसके प्रति विश्व-भर में जानकारी फैलाना ज़रूरी है।

 

चित्र स्त्रोत : Pixabay, youtube, wikipedia commons

Sonal Sardesai

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