Home / Women Health Tips in Hindi / सर्दियों में योग करने के 5 लाभ
योग अभ्यास एक प्राचीन भारतीय व्यायाम की प्रक्रिया का रूप है जिसका हमारे देश में बड़े लंबे समय से पालन किया जा रहा है। व्यायाम के अन्य रूपों के विपरीत, योग ही एकमात्र व्यायाम है जो एक व्यक्ति के आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक कल्याण पर केंद्रित होता है।
यद्यपि साल के 12 माह योग अभ्यास किया जाता है, सर्दियों के मौसम के दौरान योग करने के कुछ विशेष लाभ होते हैं।
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सर्दियों के मौसम में, ठण्ड के कारण जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। ‘विन्यासा’ शैली में योग अभ्यास करने से हमारे शरीर के जोड़ों में गतिशीलता बानी रहती है, रक्त परिसंचरण बढ़ता है और जोड़ों में कठोरता कम होती है। गर्मी दर्द को कम करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है, और योग करने के दौरान उत्पन्न गर्मी शरीर को गर्म रखने में मदद करती है। यह गर्मी शरीर में मांसपेशियों को आराम देती है और जोड़ों के दर्द को दूर करती है।
योग की एक आवश्यक प्रक्रिया श्वास अभ्यास है। योग में, नाक से सांस लेने और निकालने दोनों ही स्टेप्स का अभ्यास किया जाता है। नाक के माध्यम से श्वास लेने से फेफड़ों में प्रवेश करने वाली ठंडी हवा गर्म हो जाती है। नाक के रास्ते में मौजूद नल -जैसे मार्ग, फेफड़ों में जाने से पहले हवा को फ़िल्टर करते हैं। इसके अलावा, यह फेफड़ों को एलर्जेंस से बचाने में भी मदद करता है जो अन्यथा शरीर की श्वसन प्रणाली में रूकावट ला सकते हैं। प्राणायाम और कपालभाती जैसे श्वास अभ्यास न केवल फेफड़ों को आराम देते हैं और उनपर अच्छा प्रभाव डालते हैं, बल्कि वे श्वसन प्रणाली और तंत्रिका तंत्र के बीच के संबंधों को भी मजबूत करते हैं।
त्वचा नियमित रूप से शरीर को जिगर, गुर्दे, फेफड़ों और प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे विभिन्न अन्य आंतरिक अंगों के संयोजन के साथ डीटॉक्सिफाई करती है। सेंट्रल हीटिंग, ठंडी हवाओं और आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) के निम्न स्तरों का संयोजन, सर्दी के मौसम में त्वचा को सूखा और निर्जलित कर देता है। इस मौसम के दौरान योग करना पसीना बनाने में मदद करता है, जो त्वचा के छिद्रों को साफ करने और त्वचा की हाइड्रेशन को बनाए रखने का शरीर का प्राकृतिक तरीका है। यह बदले में, त्वचा की बनावट और उसकी आपूर्ति में सुधार करता है। पसीना बहाने से, शरीर को अपनी ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इससे न केवल रक्त परिसंचरण, हृदय रोग और श्वसन कार्य में सुधार होता है, बल्कि यह शरीर के संतुलित वज़न को बनाए रखने में भी मदद करता है।
शरीर में तनाव के दौरान, हाइपोथैलेमस, स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को शरीर में प्रसारित करता है। कोर्टिसोल तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान शरीर को सतर्क करने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को विनियमित करने के लिए ज़िम्मेदार है। शरीर में कोर्टिसोल के उच्च स्तर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से समझौता करते हैं और लोगों को संक्रमण और बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। शरीर को सक्रिय रखने के अलावा, योग शरीर को आराम देने में भी मदद करता है। जब शरीर की तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरिया और वायरस जैसे विदेशी जीवों पर हमला करने में अधिक प्रभावी हो जाती है।
सर्दियों के महीनों के दौरान, लोग SAD, यानी मौसम से प्रभावित बिमारियों से पीड़ित रहते हैं। इस अवस्था को शीतकालीन ब्लूज़ के नाम से भी जाना जाता है और इसके सर्दियों के मौसम से सम्बंधित विशिष्ट लक्षण होते हैं। इनमें खराब या उदासी वाला मूड, बढ़ती भूख, ऊर्जा के निम्न स्तर और अधिक नींद आना शामिल है। सर्दियों में छोटे दिन होते हैं, जिसका मतलब है कि लोगों को सूर्य की कम रोशनी मिलती है। इस मौसम में, योग अभ्यास शरीर को प्रकाश के निम्न स्तर के लिए तैयार करने का एक बेहतरीन तरीका है। सुबह- सुबह अपने योग रूटीन में ‘सूर्य नमस्कार’ को शामिल करने से न केवल आपके शरीर के भीतर गर्मी पैदा होगी, बल्कि यह शरीर की कार्डियोवैस्कुलर और श्वसन प्रणाली की अखंडता में भी सुधार लाएगी। इससे आपकी मनोदशा में सुधार लाने में भी मदद मिलेगी, जिससे आप अपने शरीर के सर्कडियन लय (स्लीपिंग पैटर्न) को ऊर्जावान और पुनर्व्यवस्थित हुआ महसूस कर सकते हैं।
इसलिए सर्दियों के दौरान, रोज़ सुबह योग आसन और श्वास अभ्यास करने के लिए कुछ समय निकालें। न केवल यह आपको अपने शरीर की चर्बी को घटाने में मदद करेगा, बल्कि यह आपको सर्दियों के महीनों में संक्रमण और बीमारियों से भी बचाएगा।
स्त्रोत : Australian Natural Health, Lybrate, Peaceful Dumpling, Reader’s Digest, Times of India, YogaHub.
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