इन हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से सतर्क रहें

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ज़रूरी नहीं की हार्मोनल बदलाव मेनोपॉज़ या माहवारी के दौरान ही होते हैं, हार्मोनल असंतुलन कई अन्य कारणों की वजह से भी हो सकता है। साधारण तौर पर यह 30 साल के पहले चरण और 50 साल के अंतिम चरण में महसूस होता है। कुछ दवाईयों के कारण या शरीर अस्वस्थ होने के कारण भी यह उजागर हो सकता है। इसलिए हार्मोनल इम्बैलेंस के कारणों के बारे में जानना आवश्यक बन जाता है ताकि आप इससे बचाव के लिए कदम उठा सकें और एक स्वस्थ ज़िन्दगी व्यतीत कर सकें।

 

1.नींद की कमी-

प्रोजेस्टेरोन की मदद से आप लम्बे समय के लिए सो पाते हैं, अगर आपके शरीर में इस कंपाउंड की कमी है, संभावित तौर पर आप लम्बे समय तक जगे रहते हैं और अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते। शरीर में ईस्ट्रोजन स्तर के घटने के कारण भी अनिद्रा और नींद की कमी होने की सम्भावना रहती है। यह अवस्था मेनोपॉज़ से पहले और मेनोपॉज़ के बाद होती हैं और इसके दौरान ‘हॉट फ्लैशेस’ और अनिद्रा का सामना करना पड़ता है।

 

2.स्तनों में बदलाव –

ईस्ट्रोजन स्तर के घटने और बढ़ने के कारण, ब्रेस्ट टिश्यूस के घनत्व पर भी प्रभाव पड़ता है। घटे हुए ईस्ट्रोजन स्तर से ब्रेस्ट टिश्यूस का घनत्व काम हो जाता है और बढ़े हुए ईस्ट्रोजन स्तर से यह ज़्यादा हो जाता है और इसकी वजह से शरीर में सिस्ट या असाधारण बदलाव आ सकते हैं। अगर आप इस प्रकार के लक्षणों का सामना करें, तब इस मामले में डॉक्टर की राय ज़रूर लें।

 

3.बाल झड़ना –

बाल गिरने की वजह से आपके मन में ज़रूर अपने शैम्पू या हेयर ऑइल के चयन को लेकर सवाल उठते होंगें परन्तु असल वजह कुछ और ही हो सकती है। यह हो सकता है की हार्मोनल असंतुलन की वजह से आप बालों के गिरने से परेशान हो। थाइरोइड और इन्सुलिन स्तर के घटने से और इसमें बदलाव आने से अत्यधिक बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। आप डॉक्टर से परामर्श कर इस बात की पुष्टि कर सकते हैं।

 

4.मूड स्विंग्स-

हार्मोनल असंतुलन का एक और लक्षण बार बार मूड में बदलाव के कारण भी हो सकता है। औरतें किसी भी हार्मोनल बदलाव को लेकर सवेंदनशील होती हैं और इस कारण महिलाओं में मानसिक स्तर पर अत्यधिक क्रोध, झुंझलाहट और परेशानी से यह व्यक्त होकर बाहर निकलता है। माहवारी के दौरान मूड स्विंग्स होना बड़ी आम और साधारण बात है। लेकिन यही बात अगर महीने के बाकी दिनों में भी आपको परेशान करती है तब आपको अपने डाइट को लेकर सतर्क होना पड़ेगा और डॉक्टर से राय लेना भी आवश्यक हो जाएगा। इस अवस्था में अत्यधिक नमक, चीनी और कॉफ़ी के सेवन से बचें।

 

5.लगातार सर में दर्द होना –

सर में दर्द होना एक आम बात है और यह कई वजहों के कारण हो सकता है, खास कर के माहवारी के दौरान शरीर में हॉर्मोन व्यवस्था के कारण। लेकिन कोई भी निश्चित वजह न होने के बावजूद अगर आप अक्सर सर दर्द से परेशान रहती हैं, तब यह आपके शरीर में ईस्ट्रोजन स्तर के कम होने से सम्बंधित है। इसका असर आपके दिमाग और शरीर के मेटाबॉलिज़्म पर पड़ता है और इस वजह से आप अत्यधिक कठोर सर दर्द या मायग्रेन का शिकार हो सकते हैं। इस अवस्था में अवश्य ही डॉक्टर से परामर्श करें।

 

6.वज़न में अचानक से बदलाव आना –

कोई खास वजह न होने के बावजूद अचानक वज़न का घटना या बढ़ना हार्मोनल असंतुलन के प्रति चेतावनी का संकेत करता है। जब बे ईस्ट्रोजन और कोर्टिसोल स्तर में बदलाव आते हैं, शरीर में फैट स्टोरेज की सम्भावना बढ़ जाती है। इस अवस्था में मूड स्विंग्स से झूझने के लिए अपने आप ही ज़्यादा मीठा और फैट से भरा खाना खाने की लालसा जाग्रुक हो जाती है। इस कारणवश, शरीर में और मोटापा और चर्बी बढ़ जाती है। अपने थाइरोइड लेवल्स की भी जांच करवाएं क्योंकि इससे मेटाबॉलिज़्म के स्तर पर भी असर पड़ता है।

 

7.पसीना आना-

अचानक तेज़ पसीना आना भी हार्मोनल असंतुलन का एक और संकेत है। हॉट फ्लैशेस और पसीना शरीर के अंदर के तापमान की वजह से होता है जो आपकी मानसिक अवस्था पर निर्भर करता है। और अगर यह आपकी भावनाओं और मनोस्तिथि से सम्बंधित नहीं है तब निश्चित रूप से ये आपके हॉर्मोन्स पर निर्भर है। इस अवस्था में अपने डॉक्टर से परामर्श कर कर हॉर्मोन थेरेपी की शुरआत करें।

 

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चित्र स्त्रोत: https://www.facebook.com/enjoy.science/videos/964105073768370/

 

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