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जानें एंग्जायटी अटैक क्या है और इससे निपटने के तरीके

Ankita Kumari | नवम्बर 1, 2018

हर कोई अपने जीवन में किसी ना किसी बात को लेकर चिंतित होता है लेकिन अगर कोई लगातार काफी लम्बे समय से किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा घबराए तो यह एक बीमारी बन सकती है। एंग्जायटी अटैक एक मानसिक बीमारी होती है जिसमे चिंता, डर, संकट और भय व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में बाधा डालने लगती है।

एंग्जायटी विकार में पैनिक विकार, साधारण एंग्जायटी विकार (GAD), सामाजिक एंग्जायटी विकार और सामाजिक डर जैसे अन्य विकार भी शामिल होते हैं और ये सभी विकार एक दूसरे से अलग हैं।


एंग्जायटी विकारों के कारण-

शोधकर्ताओं को अब तक जी.ए.डी होने की मुख्य वजह का पता नहीं चला। उनका मानना है की यह तनाव, घरेलू हिंसा, बाल शोषण, शराब या नशीली दवाईयों के दुरुपयोग और कैंसर या गठिया जैसी पुरानी दर्दनाक बिमारियों के संयोजन का परिणाम हो सकता है। आमतौर पर यह किसी डर से ट्रिगर होता है और धीरे-धीरे समय के साथ बढ़ता जाता है।


एंग्जायटी विकार के लक्षण-

छह महीने तक अवास्तविक और अत्यधिक चिंतन करने से वो एंग्जायटी अटैक का रूप ले सकती है। एंग्जायटी विकार होने पर निम्नलिखित लक्षणों में से कम से कम तीन लक्षण एक साथ होते हैं:

1. बेचैनी होना।
2. समाज से दूर रहने की चाह होना।
3. नींद आने में परेशानी होना।
4. एकाग्रता में कमी होना।
5. अत्यधिक चिड़चिड़ापन और क्रोध आना।
6. डरना और अपना नियंत्रण खोना।

यद्यपि एंग्जायटी विकार के उपचार के लिए उचित चिकित्सा की आवश्यकता होती है, पर ऐसी कुछ चीजें हैं जिन्हे अपनाकर आप एंग्जायटी अटैक का प्रबंधन कर सकते हैं।

1) एक गहरी सांस लें-

जिस क्षण आपको एंग्जायटी अटैक के आने की सम्भावना हो, तुरंत ही आप कहीं बैठ जाएं और गहरी सांस लें। नाक के माध्यम से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। सांस को अपनी नाक से फेफड़ों तक और फिर पेट से अपनी पीठ तक जाता हुआ महसूस करें। 15 बार इसे दोहराएं इससे अटैक टल जाएगा।



2) अटैक को ब्रेक करें-

जब भी आप किसी अटैक की शुरुआत महसूस करते हैं, तो पेपर बैग लें और उसमे फूंक मारना शुरू कर दें। और अब बैग से ही सांस लें। ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक कार्बन डाइऑक्साइड होने की वजह से आप हतोत्साहित हो जाएंगे। इसके अलावा, यह उस अटैक को तोड़ देगा और आप अन्य चीजों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।



3) एंग्जायटी अटैक की समय और कारण नोट करें-

जिस क्षण आपको महसूस हो की आपको ज्यादा घबराहट हो रही है तुरंत ही अपनी डायरी लें अपनी घबराहट को 1 से 10 के बीच रेट करें, किन कारणों से आपको घबराहट हो रही है, घबराहट के बाद क्या हुआ और उस चीज के साथ क्या हुआ जिससे आपको घबराहट हुई इन सबको नोट करें। नियमित रूप से उस डायरी का पुनरीक्षण करें और आप अपनी घबराहट को कम होता महसूस करेंगे।


4) लैवेंडर का उपयोग शुरू करें-

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लैवेंडर का तेल प्राकृतिक रूप से घबराहट को दूर कर देता है इसलिए इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। अपने स्नान के पानी में लैवेंडर के तेल की कुछ बूंदें डालें इससे बेहतर नींद मिलेगी।

ऊपर दी गयी युक्तियों का अभ्यास करें और हमें बताएं की कौनसी युक्ति आपके लिए सबसे ज्यादा लाभदायक साबित हुई।

चित्र श्रोत: maxpixel, pixabay, thebluediamondgallery

Ankita Kumari

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