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क्यों उसकी यादें आज भी मेरा पीछा नहीं छोड़ती ?

Team BetterButter | जून 14, 2018

जैसे ही रवि ऑफिस के लिए निकले मैंने दरवाज़ा बंद किया और अपना लैपटॉप उठाया और गूगल खोला |

कैसे किसी और इंसान की तरफ अपना झुकाव कम करें ? सर्च किया | आपको ये सुनकर अजीब लग रहा होगा लेकिन मेरे लिए भी ये फीलिंग्स अजीब हैं | पहले मैं एक ट्रेवल कंपनी में काम करती थी |

मेरे बेटे काव्यांश के होने के बाद घर की और जिम्मेदारियों की वजह से मुझे अपनी प्रोफेशनल लाइफ छोड़नी पड़ी |

निशांत मेरे ऑफिस में साथ काम करता था | हम दोनों के बीच कुछ भी ऐसा नहीं था | दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे | एक साथ काम करते थे, खाना खाते और जब हो सके तो एक दूसरे का मज़ाक उड़ाते |

अगर मैं किसी काम में अटक जाती तो वो भी खाना नहीं खाता | कहता काम खत्म कर मोटी फिर साथ में खाना खाएंगे | वो मुझे मोटी कहकर बुलाता था | वैसे मैं इतनी मोटी हूँ नहीं | पागल हैं वो 🙂 मेरे चेहरे को देखकर बता देता कि मुझे कोई प्रॉब्लम हैं | और मैं भी झल्ली ! उसे कुछ नहीं कुछ नहीं कह कर बात बता देती | वो बड़ा शांत रहने वाला लड़का था, मेरे प्रॉब्लम सुनकर हर बार  मुस्कुराता और बोलता ” प्रॉब्लम ही हैं ना? ठीक हो जाएगी | तू अपनी शकल ठीक कर !”

मुझे हर बार पता होता कि वो यही बोलेगा लेकिन मैं हर बार यही सुनना चाहती थी | सुकून मिलता था मुझे | आज काव्यांश 3 साल का हो गया हैं | लेकिन मैं और निशांत टच में नहीं, उसका वाट्सएप्प नंबर हैं मेरे पास लेकिन कभी कॉल नहीं किया | न उसने न मैंने |

आप मानेंगे नहीं कि जब भी मुझे कोई टेंशन होती हैं मैं उसका वाट्सएप्प खोल उसकी फोटो देखती हूँ | कई बार अपने हाथ में 10 मिनट तक फ़ोन पकड़ कर उसका नंबर खोल कर बैठती हूँ | डायल नहीं करती | पता नहीं क्यों ? वो मेरा दोस्त था तो फिर मैं क्यों घबराती हूँ? कभी लगता रवि इतने अच्छे हैं मुझे ये नहीं सोचना चाहिए | पर फिर भी…

एक बात तो बताना भूल ही गयी, कल रात को रवि मेरे लैपटॉप पर कुछ काम करने लग गये और मैं रोज की तरह किचन में खाना पका रही थी, तभी रवि ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा ये क्या सर्च कर रही थी तुम?

जब मैंने लैपटॉप की स्क्रीन की तरफ देखा तो मेरे होश उड़ गए | रवि लैपटॉप की हिस्ट्री क्लीन कर रहे थे कि उनकी नज़र इस पर पड़ गयी | मैं कंप्यूटर में इतनी भी तेज नहीं की हिस्ट्री डिलीट करना याद रखती |

वैसे मेरे चेहरे पर एक डर और घबराहट तो आ गयी थी लेकिन अपने आप को संभालते हुए कहा मेरी दोस्त रीना है ना, उसे कोई अच्छा लगने लगा है और वो शादीशुदा है तो रीना ने मुझसे डिसकस किया और मैंने उसे कहा भूल जा सब, अपनी ज़िन्दगी देख ! तो उसी बारें में सर्च कर रही थी |

रवि ने कहा – क्या बकवास बात है ये | बेकार की चीज़ो में अपनी टांग मत अड़ाना, प्रॉब्लम में फस जाओगी |

मैंने कहा जी, अब कल रात तो ये बात संभल गयी लेकिन कही ज्यादा सोचना मेरे बसे-बसाये घर को न तोड़ दें | अपने आप को तो रोक सकती हूँ लेकिन ख्यालों को कैसे रोकूँ ?

पता नहीं कैसे उसे ये हुनर आता हैं.. रात होती हैं आँखों में उतर आता हैI पता नहीं उसके खयालो से अपने आप को  कैसे बचा पाऊँगी ?

कभी लगता हैं कि ऐसा किसी के साथ नहीं होता होगा फिर मेरे साथ क्यों ? कई बार कोशिश करती हूँ कि अपने आप को बिजी रखू तो शायद कुछ हेल्प मिले | कई बार सोचती हूँ दोस्त ही तो है बात कर लेती हूँ |

यहाँ तक ये खयाल भी आता हैं कि क्या दोस्त से कुछ ज्यादा हो रहा हैं वो ?फिर लगता हैं करना ही क्यों हैं ? शादी के बाद एक दोस्त को ज़िन्दगी में लाना ही क्यों हैं ?

 

चित्र स्त्रोत -The indian iris,inc.com,trick for all pc, holy images,lifewire, the mirror

 

Team BetterButter

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