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जानिए पेट की चर्बी क्यों है खतरनाक

Ankita Kumari | अगस्त 22, 2018

पेट की चर्बी में विषाक्त वसा शामिल होती है जो शरीर में पाए जाने वाली साधारण वसा से अलग है, विषाक्त वसा त्वचा के नीचे पाई जाती है। हालांकि पेट की चर्बी बाकी अंगों के लिए कुशनिंग प्रदान करती है, पर इनके ज़रूरत से अधिक होने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं।

पेट की चर्बी किसी भी शारीरिक बनावट वाले व्यक्ति में हो सकती है। ये दिल की बीमारी, मधुमेह, कैंसर, बवासीर, अस्थमा, मनोभ्रम जैसी समस्याओं को बुलावा देती है।

 

विभिन्न अंगों पर पेट की चर्बी का प्रभाव

कुछ समय पहले तक वैज्ञानिकों का मानना ​​था की विषाक्त फैट सेल्स हानिरहित, गैर-सक्रिय, और ऊर्जा भंडारण हैं। पर, नए अध्ययनों से ये संकेत मिले है कि ये वसा कोशिकाएं वास्तव में पाचन के लिए सक्रिय होती हैं। इसका मतलब यह है कि वे ऐसे कई आवश्यक हार्मोन्स और अन्य रसायनों को शरीर से बाहर निकालते हैं।

विषाक्त वसा कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में बड़ी होती हैं, इसलिए वे ज्यादा मात्रा में हार्मोन निकालते हैं। इन अतिरिक्त हार्मोन्स की वजह से शरीर के प्राकृतिक संतुलन में बाधा आती है।

वैज्ञानिकों को अब तक ये समझ आ गया है की पेट की चर्बी हमारे शरीर के विभिन्न प्रक्रियाओं और अंगों को किस तरह प्रभावित करती है और अभी इस बात पर अध्ययन किया जा रहा है की ये चर्बी वास्तव में शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है।

रक्तचाप: वसा कोशिकाओं से एक प्रोटीन निकलता है जिसे एंजियोटेंसिन का एक रूप कहा जाता है। यह रक्त वाहिकाओं को रोकता है जिससे रक्तचाप बढ़ता है।

दिल की परेशानी: फैट कोशिकाओं से एक प्रोटीन निकलता है जिसे रेटिनोल-बाइंडिंग प्रोटीन 4 (आरबीपी 4) कहते हैं। यह इन्सुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है जिससे धमनियों में अवरुद्ध उत्पन्न होती हैं और और हृदय सम्बन्धी रोग होते हैं।

लिवर की समस्या: आंत की चर्बी फैटी एसिड्स और रक्त में मौजूद अन्य रसायनों को मुक्त करती है। चूंकि इस पूरे क्षेत्र में रक्त लीवर में बहता है, इसलिए ये सभी रसायन लीवर में स्टोर होते हैं। ये पाचन क्रिया को प्रभावित करते हैं और अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल के बीच के संतुलन को बाधित करते हैं। इससे इंसुलिन प्रतिरोध होता है और वजन बढ़ने के साथ- साथ पुरानी बिमारियों के फिर से होने का जोखिम भी बढ़ता है।

पुरानी बीमारियां: फैट कोशिकाएं सूजन उत्पन्न कर सकती हैं जिससे पुरानी बीमारियों जैसे टाइप 2 मधुमेह, पीठ दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस और कैंसर होने का खतरा बढ़ता है।

कैंसर: एक बार जब एक महिला अपने रजोनिवृत्ति तक पहुंच जाती है, तो अंडाशय एस्ट्रोजेन का उत्पादन करना बंद कर देते हैं। इस स्थिति में पेट के चारों ओर पाया जाने वाला वसा ऊतक, एस्ट्रोजन का प्राथमिक स्रोत बन जाता है। अधिक वसा कोशिकाएं होने का मतलब है अधिक एस्ट्रोजेन होना और अत्यधिक एस्ट्रोजेन स्तन ट्यूमर का कारण बन सकता है।

मस्तिष्क: विषाक्त वसा हमारे दिमाग को कमज़ोर करती है। वास्तव में, पेट पर अतिरिक्त भार रखने से भी अस्थमा और अल्जाइमर जैसी बिमारियों के होने का जोखिम बढता है। अत्यधिक चर्बी वाले लोगों में डिमेंशिया विकसित करने का जोखिम भी तीन गुना बढ़ जाता है।

 

पेट की चर्बी आपके लिए कितनी बुरी है?

यदि आप एक पुरुष हैं और आपकी कमर 40 इंच से अधिक है या यदि आप एक महिला हैं और आपकी कमर 35 इंच से अधिक है, तो आपको अपने हेल्थ गोल्स पर फिर से ध्यान देना चाहिए। अपनी कमर की साइज़ मापने के लिए, हिप हड्डी के ऊपर, अपने मिडसेक्शन के चारों ओर टेप रखें मापें।

जीन और शरीर बनावट से हमारे वजन पर प्रभाव पड़ता है, पर फिर भी आपको इन बातों का ख्याल रखना है की आप क्या खा रहे हैं और कितना व्यायाम कर रहे हैं।

 

चित्र श्रोत: flickr, pixabay

Ankita Kumari

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