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6 चीज़े जो हर एक पैरेंट को अपने बच्चे के लिए करनी चाहिए

Parul Sachdeva | जून 13, 2018

पहली सोनोग्राफी से लेकर कॉलेज के पहले दिन तक, पेरेंटिंग चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ संतोषजनक भी होता है | जब मैंने पेरेंट्स से पूछा की उनके लिए क्या जरुरी है, तो बच्चों की ख़ुशी लिस्ट में सबसे ऊपर थी | तो ऐसी कौन सी बातें है जो एक माँ को पता होनी चाहिए ताकि वो अपने बच्चे को वो सब दे सके जिसके वो हक़दार हैं –

1)अपने बच्चे को सुने

बच्चे को ध्यान से सुनना मतलब उनसे नज़र मिलाकर बिना किसी रुकावट और बिना अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए उन्हें सुनना | अगर वो आपसे सलाह नहीं मांग रहे तो उन्हें न दें | बल्कि ऐसे सवाल करें कि आपको क्या लगता हैं इस के लिए क्या करना चाहिए ? या फिर आपको कैसा लगा?  अगर आप सच में उसे सुनना चाहते हैं तो बातचीत भाषण या सबक की तरह न हो बल्कि एक दोस्त बन कर हो |

 

2) गलतियाँ करें जब बच्चा आपको देख रहा हो

आपके बच्चे आपके करने से सीखते हैं न कि आपके शब्दों से | अगर आपको लगता हैं कि गलतियों से इंसान सीखता हैं तो आप भी ऐसा करने से न घबराये | मान लीजिये आप बच्चे पर किसी बात को लेकर चिलाते हैं तो माफ़ी मांगे और कहे कि मम्मी से भी गलती हो सकती है |  गिरने दें उन्हें 5 बार साइकिल से या फिर कुकिंग करते समय जलाने दें उन्हें वो ब्रेड पीस | बच्चे के दिमाग से डर को निकाले और कोशिश करने को कहे |

 

3) घर के बाहर थोड़ा समय बिताये

समय देना बहुत जरूरी है | स्कूल में, घर में, बाहर या फिर उसकी ज़िदगी में क्या चल रहा है, खबर रखें | अगर बच्चा बड़ा है तो निगरानी रखने की बजाये ख़याल रखें | नहीं तो उसे लगेगा की आपको उस पर विश्वास नहीं |

 

4) बच्चे की पसंद नापसंद को जाने

ये सही है कि एक बच्चे के लिए क्या सही है या क्या नहीं, एक पैरेंट से अच्छा कोई नहीं जान सकता लेकिन जरूरी नहीं है कि हर वक़्त उन पर अपनी चीज़े थोपी जाएं | छोटा है लेकिन उसकी भी अपनी पसंद, नापसन्द है | हर बात नहीं माने लेकिन कभी कभार उसके दिल की भी सुने |

 

5) उसकी शारीरिक और मानसिक उम्मीदों का ख़याल रखें

जाने कि आपके बच्चे का नेचर कैसा है ? क्यों वो जरुरत से ज्यादा सवेंदनशील है ? हमेशा याद रखें कि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता तो उन्हें संभालने के तरीके भी अलग होते है | अपने बच्चों की हेल्थ का ध्यान रखें उसे किसी चीज़ से एलर्जी है या तकलीफ है तो तुरंत उसका हल निकाले | अगर बच्चा घूमने जाते हुए कह रहा है कि उसे पैंट टाइट है तो सुने नाकि बिलकुल ठीक है कह के टाल दें |

 

6) अपने बच्चों के दोस्तों के बारे में जाने

आप माने या ना माने एक बच्चे पर उसके दोस्तों के पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों प्रभाव पड़ते हैं | तो जाने कैसे हैं उसके दोस्त पढाई में ? क्या वे बड़ो का आदर करते हैं ? उनका स्वभाव कैसा हैं ? क्या वे नम्र हैं या गुस्सैल ? उनके माँ-बाप कौन हैं ? क्योंकि बच्चे जब एक साथ रहते हैं तो एक-दूसरे की आदतें अपनाते हैं |

चाहे आप कामकाजी हैं या हाउस-वाइफ, ये सभी बातें आपको अपने बच्चे के बारे में ध्यान रखनी हैं |

Parul Sachdeva

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