किचन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स

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किसी भी घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है रसोईघर और यह बहुत आवश्यक है कि यहाँ हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बहती रहे। आप भी अपने किचन में सकारात्मकता लाने के लिए हर संभव प्रयास कर चुके होंगे। पर क्या आप जानते हैं की वास्तु भी हमारे किचन के वातावरण पर प्रभाव डालता है?

वास्तु शास्त्र आग, पानी, हवा, आकाश और पृथ्वी के बीच संतुलन बनाए रखने का विज्ञान है। यह संतुलन समृद्धि का केंद्र होता है। आज जानिये की वास्तु का विज्ञान किस तरह आपके रसोईघर में सकारात्मकता लाने में मदद करता है।

 

रसोई उपकरणों को रखने का सही जगह और कार्य क्षेत्र-

  • अग्नि देव की दिशा दक्षिण पूर्व है इसलिए रसोई घर के दक्षिण पूर्व दिशा में ही स्थित होनी चाहिए। यदि यह संभव नहीं है, तो रसोई को उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने की कोशिश करें।
  • खाना बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरण जैसे गैस स्टोव, इलेक्ट्रिक उपकरणों इत्यादि को दक्षिण पूर्व दिशा में रखना चाहिए। गैस स्टोव की दिशा रसोई के प्रवेश द्वार की तरफ नहीं होनी चाहिए।
  • रसोईघर में सिंक, डिशवॉशर, पानी का पाइप, और रसोई की नली उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें की स्टोव से इनकी एक अच्छी दूरी बनी रहे।

  • पानी की टंकी हमेशा रसोई के बाहर पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। यह आग और पानी के तत्वों के बीच संतुलन सुनिश्चित करने के साथ-साथ सुख और समृद्धि भी लाएगा।

 

रसोई के अंदर-

  • रसोई के फर्श के लिए संगमरमर, मोज़ेक या सिरेमिक टाइल्स का चयन करें।
  • रसोई की दीवारों को गुलाबी, पीले, नारंगी, लाल या चॉकलेट जैसे रंगों से रंगें। नकारात्मक ऊर्जा लाने वाले रंगो का प्रयोग ना करें।

  • घर में कामयाबी को आमंत्रित करने के लिए अनाज, दालें और और बर्तनों को दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखें।
  • फ्रिज को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने पर जीवन में सभी बाधाएं आसानी से दूर हो जाएंगी और घर में शांति का माहौल बना रहेगा।
  • सिलेंडर और गीज़र दक्षिण-पूर्व में होने चाहिए और एग्जॉस्ट पूर्व में होना चाहिए।
  • रसोई में सकारात्मक ऊर्जा को बहने की अनुमति देने के लिए काउंटर को खाली रखें।

  • हवा की अशुद्धियों को साफ करने के लिए रसोई में तुलसी के दो पौधों को रखें।

 

रसोई की योजना बनाते वक़्त ध्यान में रखने वाली अन्य बातें-

  • रसोईघर की दीवार शौचालय, बाथरूम, पूजा कक्ष या शयनकक्ष से जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए। ये क्षेत्र रसोईघर के ऊपर या निचे भी नहीं होने चाहिए।
  • रसोई के दरवाजे को न तो शौचालय के दरवाजे और न ही घर के मुख्य प्रवेश द्वार का सामना करना चाहिए।
  • रसोई का दरवाज़ा पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। दरवाजे को रसोई के कोने में बनाने की बजाय बीचों बीच बनाने की कोशिश करें।
  • पूर्व में एक बड़ी खिड़की होनी चाहिए।
  • यदि रसोई में खाना पकाने वाला व्यक्ति घर का प्रवेश द्वार नहीं देख सकता है, तो एक आईना लेकर उसे इस तरह से रखें कि हर समय रसोईघर के प्रवेश द्वार को देख सकें।

 

इन छोटी और आवश्यक वास्तु टिप्स को अपनाने के बाद आपके परिवार में भी सुख और समृद्धि का वातावरण बना रहेगा।

चित्र श्रोत: pexels, staticflickr

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