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रीना के घर में बीमारियां कर रही थी तांडव

Parul Sachdeva | अगस्त 23, 2018

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hindi Personal Story

रीना के घर में बीमारियां कर रही थी तांडव

रीना सुबह से ही फुर्ती से काम कर रही थी और कारण था टीवी पर उसका फेवरेट सीरियल जो वो कभी मिस नहीं करती थी |

रात को घर के कभी ना खत्म होने वाले कामों की वजह से उसे हमेशा सुबह रिपीट टेलीकास्ट देखना पड़ता | जैसे ही वो टीवी के आगे आकर बैठी -पति देव ऑफिस से उन्ही पैरों वापिस आ गए | रास्ते में सर में तेज दर्द हुआ और कपकपी सी छूटने लगी | रीना ने जल्दी से टीवी बंद कर केशव को कमरे में लिटाया | जहा रीना का पसीना टप-टप बह रहा था केशव को 2 रजाइयो से भी आराम नहीं मिल रहा था | बार-बार वोमिटिंग, शरीर में जान ना होना ये सबकुछ देख रीना का दिल बैठा जा रहा था | उसने अपने फैमिली डॉक्टर को फ़ोन किया और ये सभी लक्षण बताएं | डेंगू हो गया था तो रीना दिन-रात केशव की सेवा में लग गयी |

अभी केशव की तबियत पूरी तरह ठीक भी नहीं हुई थी कि बेटे को तेज बुखार हो गया | रीना ने स्कूल की छुट्ठी करवाई और बेटे की देख-रेख में लग गयी साथ में पतिदेव पर भी पूरा ध्यान दिया | 4 दिन बाद जब बेटे का बुखार उतर गया तो रीना ने सोचा आज स्कूल भेज देती हूँ कि तभी सासु माँ जोर से चिलायी -आई मर गयी,आह मैं नहीं उठ पाऊँगी | किचन में पानी की वजह से वो फिसल गयी और उनके घुटने की हड्डी टूट गयी |

अब रीना के ऊपर एक और जिम्मेदारी आ गयी | सास की तीमारदारी करना और घर का सारा काम |

घुटने का ऑपरेशन कामयाब ना हुआ और उसमे पस पड़ गयी जिससे हालात और खराब हो गयी | उसने अपना टीवी सीरियल तक बंद कर दिया | ऐसा नहीं है कि ये सब पहले नहीं हुआ | पिछले कुछ महीनों से रीना के घर में डॉक्टर्स का तांता-बांता लगा ही हुआ था | वो समझ नहीं पा रही थी एक ठीक होता तो दूसरा बीमार | तभी डोर-बेल्ल ने उसका ध्यान खींचा –

रीना -अरे तू ? आज कैसे आना हुआ ? कितना टाइम हो गया तुझे देखे ? बच्चे कैसे है ?

शिवानी -ओह हो, इतने सारे सवाल एक साथ वो भी बिना पानी पूछे ?

रीना ने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा – सॉरी सॉरी, तू बैठ !

शिवानी -किसी काम से दिल्ली आई थी, काम खत्म हो गया तो सोचा तुझे सरप्राइज दे दू |

रीना -घर में तो कुछ ठीक नहीं हैं | एक ठीक तो दूसरा बीमार | वीकेंड मनाने मैं मोस्टली हॉस्पिटल और क्लीनिक ही जाती हूँ | ऐसा पहले बिलकुल नहीं था | पता नहीं पिछले कुछ महीनों से ऐसी हवा फिरी घर में कि बीमारियां सांप की तरह कुंडली मार बैठ गयी हैं | ऐसा पहले….

शिवानी ने रीना को बीच में ही रोका और आश्चर्य से किसी चीज़ को घूरती हुई उसके पास गयी |

शिवानी – ये डांसिंग नटराज कौन लाया यहाँ ?

रीना- ओह हो ! शो पीस हैं, छोड़ इसे ! ये बता पास्ता बनाऊ तेरे लिए ?

शिवानी- छोड़ नहीं सकते | कहा से आया ये और कब सजाया तूने इसे घर में ?

रीना-इनके ऑफिस का एक फ्रेंड हैं उसने गिफ्ट किया | तक़रीबन ६ महीने पहले |

शिवानी- और घर में परेशानियाँ कब से आना शुरू हुई ?

रीना अचंबित होकर -6 महीने पहले…(हर एक शब्द को चबा-चबा के जैसे कोई डर उसके मन में आ गया हो )

शिवानी -तू जानती हैं नृत्य करता नटराज घर में रखना अशुभ माना जाता हैं | कहते हैं “बीमारियां भी नाचती हैं ”

और जहां रखो वहा परेशानियों का तांडव होता हैं | वास्तु के अनुसार जहां एक ओर नटराज नृत्य कला को दर्शाता हैं वही दूसरी ओर नाश को भी दर्शाता है तभी इसे तांडव नृत्य कहा जाता है |

रीना- ओह माय गॉड, मुझे इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था | मैं अभी इसे हटाती हूँ | रीना ने एकाएक उस मूर्ति को घर से हटा दिया |

दरसल शिवानी वास्तु एक्सपर्ट थी जो लोगों के घरों को डिज़ाइन करने में मदद करती थी | कुछ महीनों बाद रीना ने शिवानी को फोन कर बताया कि वो शायद सही थी | धीरे-धीरे सभी चीज़े ठीक होने लगी | बिमारी जैसे भाग ही गयी रीना के घर से | आप वास्तु माने या ना माने लेकिन ये एक विद्या है जिसका आदर करना चाहिए |

 

चित्र स्त्रोत- Video blocks,huffpost,medical academic,procedure consult.Jp,Astrologybay,pinterest