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माइग्रेन के कारण, लक्षण व् उपचार

Priyanka Verma | सितम्बर 20, 2018

माइग्रेन एक बहुत ही आम बीमारी है जिसमे इंसान को बहुत तेज़ सर दर्द होता है। ये दर्द पर्यावरण या आनुवंशिकता के कारण हो सकता है। माइग्रेन का दर्द ज़्यादार आधे सर में होता है और ये तेज़ दर्द कई घंटों तक तकलीफ देता है। माइग्रेन के अटैक के दौरान कोई भरी व्यायाम या भौतिक काम करने से परेशानी और बढ़ सकती है। माइग्रेन के लक्षणों का जल्दी पकड़ में आना ज़रूरी है ताकि आप जल्दी से इसका उपचार कर सकें।

 

माइग्रेन के लक्षण

माइग्रेन के दर्द को बढ़ने से रोकने के लिए ज़रूरी है की उसके लक्षणों को जाना जाये । माइग्रेन के लक्षण सर दर्द से पहले ही शुरू हो जाते हैं । वैसे तो हर व्यक्ति को माइग्रेन अलग-अलग तरीके से अटैक करता है लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –

  • माध्यम या अत्यधिक दर्द जो सर के एक तरफ हो रही हो
  • भौतिक काम करते हुए सर दर्द का बढ़ना
  • सर दर्द के वक़्त आवाज़ों और सुगंधों से असुविधा होना
  • उलटी आने जैसा अनुभव, अपने रोज़मर्रा के काम न कर पाना और सिर्फ लेटने से आराम आना

कुछ लोगों को इन सामान्य लक्षणों के इलावा पेट दर्द, दस्त, शरीर के तापमान में बदलाव तथा पसीना भी आता है ।

 

माईग्रेन किन कारणों से होता है ?

यूँ तो माइग्रेन के असल कारणों के बारे में डॉक्टरों को भी अधिक जानकारी नहीं है लेकिन ये ज़्यादातर अनुवांशिकता और पथ्य-संबंधी कारणों की वजह से होता है।

 

पथ्य-संबंधी कारण-

कुछ संसाधित खाने की चीज़ों जैसे चीज़, शराब, और एडिटिव्स – नाइट्रेट्स मैगरिन के अटैक को ट्रिगर करने में मुख्या भूमिका निभाते हैं। तीस प्रतिशत से अधिक माइग्रेन के केसेस एम् ईएसएसजी खाने से होते हैं ।

 

स्वस्थ्य और पर्यावरण सम्बन्धी कारण-

थकावट और सोने की आदतों में बदलाव, मौसम का अचानक बदलाव, तथा आहार के समय खाना न खाना माइग्रेन होने का कारण हो सकते हैं।

 

शारीरिक कारण-

भूख, थकावट, और तनाव, भी माइग्रेन के अटैक का कारण होते हैं । मानसिक तनाव भी पचास से अस्सी प्रतिशक लोगों में माइग्रेन का कारण होता है। जिन लोगों पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर होता है उनमे माइग्रेन होने की सम्भावना ज़्यादा होती है। औरतों में होर्मोनेस का असंतुलन, रजोनिवृत्ति माइग्रेन को बढ़ावा देता है ।

 

माइग्रेन के उपचार

माइग्रेन का इलाज व् उपचार सरल या बेहद पेचीदा हो सकता है और ये माइग्रेन की तीव्रता पर निर्भर करता है।

  • हर रात पर्याप्त नींद लें
  • अपनी ज़िन्दगी से अनावश्यक तनाव को दूर करें
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
  • रोज़ व्यायाम करें ताकि आप स्वस्थ सक्रिय रहे
  • लासा और एम्मईएसएसगई वाले खाने की चीज़ों से दूर रहे
  • कैफीन के साथ एस्पिरिन अक्सर दर्द से रहत दिलाने में मददगार साबित होता है

अगर ऊपर दिए गए जीवनशैली के बदलाव आपको माइग्रेन से राहत नहीं दिला पाते तो किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। परेशानी बढ़ने से पहले ही डॉक्टर आपको बचाव की दवाइयां दे देंगे।

दर्द निवारक दवाइयां सिर्फ तुरंत लेनी चाहिए जब आपको माइग्रेन का दर्द बढ़ने का एहसास हो रहा हो ।

अचानक अत्यधिक दर्द होने पर निम्नलिखित दर्द निवारक दवाइयां काम आ सकती हैं –

  • नेप्रोक्सेन
  • आइबूप्रोफेन
  • अस्टमीनोफेन

माइग्रेन के शुरुआती रोगनिदान के समय डॉक्टर आपको बहुत से टेस्ट करवाने को कहेंगे जिनमे की टी स्कैन, एम्म आर आई भी होती है। कोई भी दवाई बिना अपने डॉक्टर से पूछे न शुरू करें।

 

चित्र स्त्रोत – Pixabay.

 

Priyanka Verma

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