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ज़िन्दगी का व्यंग्य

Parul Sachdeva | सितम्बर 20, 2018

कुछ महीनों पहले ही तो खुशियों ने प्रिया के घर पर दस्तक दी थी जब उसे पता चला कि उसका बचपन वापिस आने वाला है -वो माँ बनने वाली है | पहली बार माँ बनने की ख़ुशी को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता |

और उससे ज्यादा खुश थी सविता -प्रिया की सास | सविता जी को एक ही बेटा था और वो भी कई मन्नतो से हुआ, कई सालों बाद – बच्चा ना होने की वजह से वो खुद इतना परेशान रही कि एक बार को तो उम्मीद ही छोड़ दी थी | लेकिन भगवान ने उनकी खाली गोद को अपने आशीर्वाद से भर दिया और उसी दिन से भगवान में उनकी आस्था और भी ज्यादा हो गयी | पॉजिटिव रहती थी और जहाँ जाती वातावरण को सकरात्मकता से भर देती |

जब प्रिया को 4 साल तक बच्चा ना हुआ तो प्रिया कई बार कमजोर पड़ जाती, रोती..उस समय सविता जी प्रिया को ढाढस बांधाती और भगवान पर विश्वास रखने को कहती | और कहते हैं ना पॉजिटिव सोचो पॉजिटिव होता हैं | प्रिया के साथ भी ऐसा ही हुआ | 5 महीने अच्छे से गुजरे, डॉक्टरों के चक्कर, अल्ट्रासाउंड के लिए लम्बा इंतज़ार, बच्चे की पहली धड़कन सुनना -प्रिया ने सब महसूस किया | प्रिया कामकाजी महिला थी | ऑफिस में बड़े औदे पर भी थी |

लेकिन काम के साथ-साथ इस नाज़ुक स्तिथि में अपना ख्याल रखना उसे अच्छे से आता था |

एक दिन सविता अपनी पक्की दोस्त कुसुम से बात करते हुए उन्हें बता रही थी आज उनका मूड बहुत खराब है |

सविता- नहीं, कुछ नहीं

कुसुम-कुछ तो है, तेरी आवाज़ में वो बात नहीं है आज !

सविता- बहुत ज्यादा दुखी हूँ आज मैं!

कुसुम- अरे, अब कैसा दुःख? जो तू हमेशा से भगवान से मांगती थी, तेरी वही मनोकामना पूरी होने जा रही है |

सविता – हां चाहती थी मैं हमेशा से एक पोता, पर…

कुसुम- पर क्या ??

सविता- (फ़ोन पर ही रोने लगी ) बच्चा एब्नार्मल है ! डॉक्टर ने कहा कुछ भी हो सकता हैं, दिमाग में प्रॉब्लम, उठने बैठने में प्रॉब्लम या कोई और मुश्किल |

कुसुम-हे भगवान ! ये तो बहुत बुरा है, ऐसा होने से अच्छा हैं भगवान बच्चा ही ना दे |

सविता- मैं जो इतनी पॉजिटिव रहती थी, ये सुनने के बाद तो मानो ज़िंदगी अधूरी सी लगती है | अब तो ऐसा लगता हैं जैसे इस घर से ये मायूसी मनहूसियत को साथ लाएगी और मैं चाह कर भी कुछ ना कर पाऊँगी |

कुसुम- बोल प्रिया को नहीं चाहिए ये बच्चा |

सविता – सब बोल दिया, समझा दिया, ऐसे बच्चे को तू एक बार मारेगी लेकिन अगर कुछ नहीं किया तो तू हर रोज मरेगी और वो बच्चा भी | पूरी ज़िन्दगी संभालना आसान नहीं है | ज़िन्दगी का व्यंग्य तो देख कुसुम, भगवान औलाद दे रहा है लेकिन हमे नहीं चाहिए !

कुसुम- तो क्या बोली ?

सविता-वो पगली अपने पहले बच्चे के आने से इतनी खुश है कि कहती हैं मैं इस बच्चे को जन्म दूंगी, इस दुनिया में लाऊंगी, मैं पालूंगी | बहुत मुश्किल से भगवन ने मेरी गोद भरी है।

कुसुम – उससे कह ये फ़िल्मी बातें हैं, असल ज़िंदगी बहुत भयानक होती हैं |

और प्रिया से लोगो के द्वारा सुझाया कदम उठाने की हिम्मत ना हुई | बच्चे को दुनिया में लायी | बच्चे को दिमागी दिक्कत थी जिसकी वजह से उसका चलना, बैठना, उठना यहाँ तक कि बोलना भी कभी संभव नहीं था | आज प्रिया अपने 3 साल के बच्चे को लेकर कभी इस डॉक्टर तो कभी इस डॉक्टर के पास जाती है |

जो जहाँ आशा की किरण दिखाता वही पहुंच जाती | केरल में आयुर्वेदिक संस्थान है वहाँ से तो कई बच्चे ठीक हुए हैं, वहां चल पड़ती, मुंबई में एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट है जो इसका एक्सपर्ट हैं ,वहाँ की अपॉइंटमेंट ले लेती | कुछ समझ नहीं आ रहा | कई बार जब बाकी नार्मल बच्चों को देखती तो फूट-फूट कर रोने लगती | कई बार सास की कही बात याद आती |  बच्चे ने अपना हाथ उठाया तो इतनी सी बात से सकरात्मकता से भर जाती कि वो ठीक हो जायेगा | उसे कुछ समझ नहीं आ रहा – उसे आपकी सलाह, आपके प्यार और आपकी सहायता की जरूरत है | पता हैं कोई किसी के लिए कुछ नहीं कर सकता लेकिन कभी-कभी दिल का हाल बांटने से मुश्किल सफर भी आसान सा लगता है |

 

चित्र स्त्रोत -quora,all things good,videoblocks, all things good.

 

Parul Sachdeva

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