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करीना कपूर की डाइटिशियन रुजुता दिवेकर से जानिए बच्चों को सेहतमंद बनाने के 7 आसान उपाय!

Kavita Uprety | सितम्बर 20, 2018

क्या आप जानते हैं हम भारत में एक ऐसे विरोधाभास का सामना कर रहे हैं जहां एक ओर 43 प्रतिशत बच्चे कम वजन का शिकार हैं, वहीं दूसरी ओर भारत दुनिया के दूसरे सबसे अधिक मोटापाग्रस्त बच्चों की संख्या वाला देश है। इस के साथ-साथ पोषक तत्वों की कमी से होने वाली बीमारियाँ जैसे कि एनीमिया आदि समस्याएँ भी अधिकतर बच्चों के साथ देखने को मिलती हैं। इस समस्या को देखते हुए जानी मानी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने आपके बड़े होते बच्चों की सेहत की रक्षा के लिए कुछ बेहद आसान लेकिन असरदार चीजें बतायी हैं, जिन्हें आप आज़मा सकते हैं। आइए जानते हैं बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए रुजुता द्वारा बताए गए टिप्स विस्तार से। 

बच्चों की सेहत बेहतर बनाने के लिए रुजुता द्वारा बताए गए टिप्स

बच्चों की सेहत उनके आहार, खाने-पीने में रुचि, खाने पीने के समय व जीवनशैली पर निर्भर करती है। रुजुता ने हाल ही में इन सभी चीज़ों को समटेकर बच्चों को उचित पोषण प्रदान करने के टिप्स साझा किए। आइए जानते हैं विस्तार से।

 

Healthy Kid

1. हाई चेयर का इस्तेमाल करना बंद करें 

रुजुता का कहना है कि आजकल ज़्यादातर माँ बाप बच्चों को हाई चेयर पर बैठा के खाना खिलाना पसंद करते हैं। इससे अच्छी आदत यह है कि आप बच्चे के साथ ज़मीन पर बैठें और अपने हाथ से उसे खिलाएँ। इस तरह से बच्चे का खाने के प्रति रुझान बढ़ता है। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज़मीन पर बैठने से बच्चे की पेलविक बोन का विकास उचित तरह से होता है और वह सुद्रढ और लचीली बनती है। लगातार हाई चेयर पर बैठने से इस विकास में बाधा आती है और बच्चे के बड़े होने पर उसे दौड़ने, कमर के निचले हिस्से के दर्द और रीढ़ की हड्डी में परेशानी जैसे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

2.कैसे हों बच्चे के खाने के बर्तन?

रुजुता कहती हैं कि भोजन का पोषण आहार की प्रकृति के साथ-साथ उसे बनाने के तरीके और उसे बनाने और खाने में काम में लिए गए बर्तनों पर भी निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार खाने के बर्तन कभी भी प्लास्टिक के नहीं होने चाहिए। हमेशा चीनीमिट्टी, काँच या धातु के बर्तन ही इस्तेमाल करें क्योंकि प्लास्टिक चाहे जितनी भी अच्छी क्वालिटी का हो, इसमें कई हानिकारक केमिकल होते हैं और इनका इस्तेमाल कई रोगों को जन्म दे सकता है। 

 

3.खाने के पोषक तत्वों को कैटेगराइज़ न करें –

रुजुता आगे कहती हैं बच्चों के सामने कभी भी ये न दोहराएँ कि दाल ज़रूर खाओ ताकि तुम्हें प्रोटीन मिले या दूध जरूर पियो जिससे कैलशियम मिलेगा क्योंकि ऐसा सोचना गलत है। रुजुता कहती हैं हमारे शरीर में ट्रिप्सिन नामक एंजाइम होता है जो खाये गए प्रोटीन को तोड़कर शरीर के लिए ज़रूरी ऊर्जा में बदलता है। अगर ट्रिप्सिन शरीर में न हो या कम हो जाए तो प्रोटीन शरीर में नहीं लगेगा। दालों में पाये जाने वाले कुछ तत्व ट्रिप्सिन के कार्य को रोकने का काम करते हैं और खाया गया प्रोटीन वेस्ट हो जाता है जिससे बच्चे को डाइज़ेशन, एलर्जी, बदलते मौसम में बीमार पड़ना, यहाँ तक कि उसके विकास में भी कमी आ सकती है।

आप इस बात को समझें कि प्रोटीन खाने से ज्यादा, खाये गए प्रोटीन को पचाना और अब्सॉर्ब करना ज़रूरी है। इसलिए अगर आप का बच्चा दाल नहीं खाता तो उसे ज़बरदस्ती ना खिलाएँ बल्कि घी चावल, खिचड़ी, दही चावल, सूखे मेवे या लोभिया जैसी अन्य चीज़ें खिलाएँ ताकि उसके शरीर के लिए उपयुक्त मात्रा में पोषण मिलता रहे। यही बात दाल के अलावा पोषण के स्रोत अन्य खाद्य पदार्थों पर भी लागू होती है। 

 

4.बच्चों को खेलने के लिए ज़रूर प्रेरित करें –

रुजुता इस बात पर भी ज़ोर देती हैं कि बच्चों को उचित आहार देने के साथ-साथ उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय भी रहना चाहिए। इसलिए बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें, जैसे कि खेलना-कूदना इत्यादि। बड़े होते बच्चों के लिए विशेष रूप से रुजुता कहती हैं कि कम से कम नब्बे मिनट की खेल कूद बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने से खाये गए भोजन के सभी पोषक तत्व शरीर में अब्सॉर्ब होने में पूरी मदद मिलती है और किसी भी प्रकार की डेफ़िशिएनसी नहीं होती।

 

5.क्या बच्चों के लिए दूध ज़रूरी है?

दूध को ले कर भी कई गलतफहमियाँ हैं। रुजुता कहती हैं जो बच्चे दूध पसंद करते हैं उन्हें दूध पीने दें। देसी गाय का दूध सर्वोत्तम है लेकिन अगर आपको यह नहीं मिल पा रहा तो भैंस का दूध भी दिया जा सकता है। बच्चों का दूध फुल क्रीम होना चाहिए और मलाई निकला हुआ दूध या टेट्रा पैक दूध उनके लिए उपयुक्त नहीं है। अगर बच्चा गाय या भैंस का दूध नहीं पी रहा तो ज़बरदस्ती ना करें। बच्चों को लालच देने के लिए बाज़ार में उपलब्ध दूध में मिलाये जाने वाले पाउडर भी ठीक नहीं हैं इसके बजाय बच्चे के दूध में नटमैग, केसर, हल्दी, या सूखे मेवों का प्रयोग करें जिसके अन्य बहुत सारे फायदे हैं।

 

6.खाना खाते हुए नो टीवी नो फोन

बच्चे के खाते वक़्त टीवी और फोन अलग रखें। अगर बच्चा ज़िद करे कि वह टीवी देखते हुए ही खाएगा तो खाना रोककर एक समय सीमा तय करें और टीवी देखने दें। उस के बाद उसे खाना खाने के लिए बोलें। लेकिन यह रोज़ की आदत नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह आदत बच्चे के दिमाग की उस क्षमता का विकास नहीं होने देती जिससे उसे यह अंदाज़ा लगता है कि उसने पेट भर खा लिया है। साथ ही बच्चे की उम्र के हिसाब से टीवी देखने का समय दस मिनट से लेकर तीस मिनट से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

 

7.सोने का वक़्त तय करें

अपने घर का सिस्टम ऐसा बनाएँ कि हर हालत में बच्चे दस बजे से पहले सो जाएँ। बड़े बच्चों के लिए यह टाइम ग्यारह हो सकता है पर इससे ज्यादा बिलकुल नहीं। यह तब संभव है जब घर में सभी के लिए यह नियम लागू हो। देर रात तक जागने से बच्चों की ब्रेन ग्रोथ के साथ साथ शारीरिक विकास, डाइज़ेशन इत्यादि में बड़ी समस्याएँ आती हैं। इस नियम के साथ इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि बच्चों के कमरे में टीवी कतई न हो।

बढ़ते बच्चों का सर्वोत्तम विकास के लिए माँ-बाप को बहुत मेहनत करनी पड़ती है और काफ़ी सावधानियाँ बरतनी पड़ती हैं। इस आर्टिकल में हमने आपसे रुजुता दिवेकर द्वारा बताए गए बच्चों को सेहतमंद बनाने के टिप्स साझा किए। कैसा लगा आपको हमारा ये आर्टिकल, हमें बताइए, साथ ही इसे साझा कीजिए अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ। ऐसी ही अनमोल जानकारी और नई-नई रेसिपीज़ के लिए जुड़े रहिए BetterButter के साथ।

 

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