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चिकनगुनिया के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाए

Nupur Kumari | जुलाई 30, 2018

चिकनगुनिया बरसात के मौसम में होने वाली आम बीमारी हो गयी है। डेंगू और मलेरिया की तरह ये भी बरसात के मौसम में जमा होने वाले पानी में पैदा होने वाले मच्छरों के वजह से होता है। यह बीमारी मनुष्य के शरीर में मादा एडीज़ मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर से संक्रमित होने वाले विषाणु मनुष्य के शरीर में ठीक वैसे ही लक्षण पैदा करते हैं जैसा कि डेंगू में होता है। इसमें रोगी को वायरल बुखार होता है और साथ में जोड़ों में दर्द भी रहता है। जोड़ों के दर्द से मनुष्य को निष्क्रिय कर देने वाला यह बुखार सप्ताह भर में ही रोगी को तोड़ के रख देता है।

चिकनगुनिया के कारण:

  • मादा एडीज मच्छर के काटने से मनुष्य के शरीर में यह विषाणु संक्रमित होते हैं।
  • यह मच्छर आकर में बड़े होते हैं और प्रायः दिन के समय काटते हैं।
  • एक मनुष्य को काटने के बाद ये मच्छर और भी लोगों को काटता है। अगर कोई सामान्य मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो वो भी इसके विषाणु से संक्रमित हो जाता है।

 

चिकनगुनिया के लक्षण:

1) तेज बुखार

 

2) जोड़ों में सूजन के साथ दर्द

 

3) शरीर में लाल रंग के रैशेस

 

4) मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द

 

5) सिर दर्द

 

6) सर्दी जुकाम

 

7) रौशनी या चमक न सहन कर पाना

 

8) अनिद्रा

उपचार:

  • अगर ये लक्षण किसी मरीज में नजर आये तो तुरंत पास के किसी अस्पताल में जाएं और डॉक्टर से सलाह लें। हालाँकि इसके उपचार के लिए कोई विशेष वैक्सीन या दवाइयां नहीं है मगर सामान्य दवाइयों से भी इससे राहत पाया जा सकता है।
  • चिकनगुनिया का पता लगाने के लिए कुछ विशेष टेस्ट होते है जिन्हे आप करवा सकते हैं, जैसे कि आर टी पीसीआर टेस्ट, वायरस आइसोलेशन टेस्ट और सीरोलॉजिकल डायग्नोसि टेस्ट।
  • तरल खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।
  • डिस्प्रिन या एस्प्रिन की गोलियों को भूल कर भी लें।

 

रोकथाम के उपाय:

  • यह बीमारी खासतौर पर बारिश के मौसम में होती है इसीलिए इस मौसम में घर में और घर के आस पास पानी इकट्ठा होने दें। अगर किसी जमे हुए पानी को नहीं निकला जा सकता है तो उसमें केरोसीन का तेल डाल दें ऐसा करने से मच्छर और उसके अंडे दोनों ही नष्ट हो जायेंगे।
  • घर के कूलर का पानी नियमित अंतराल पर बदलते रहे।
  • इस मौसम में शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपडे पहन कर बाहर निकलें।
  • मछलियों के टैंक को बंद रखें।
  • छोटे बच्चों को स्कूल जाने से पहले शरीर पर मच्छर काटने वाली क्रीम लगा दें।

 

चिकनगुनिया का आयुर्वेदिक इलाज:

  • नीम की गिलोय, छोटी पीपर, सोंठ, और गुड़ के साथ तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को राहत मिलती है।

 

  • इस समय मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत ही कम हो जाती है जिसे बढ़ने के लिए गिलोय और एलो वेरा का जूस काम आता है।

 

  • इसमें लीवर पर भी असर पड़ता है, इसके लिए पपीते के पत्ते का रस और अनार का रस पिएं।  

 

चित्र श्रोत: Flickr, Pxhere, Wikipedia, Wikimedia Commons, Pixabay, Show Air Force Base, Air Force medical services, Public Domain Pictures.

Nupur Kumari

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