क्या अतीत का भविष्य बदला जा सकता है ?

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तू पढ़ना चाहती है ? शिखा ने बुलंद आवाज़ में कहा-

हां दीदी, लेकिन हमारे घर में इतनी गरीबी है कि रोटी का टुकड़ा ही हमारा सब कुछ है, माँ कहती है पढ़ाई तो अमीर लोगों के शौक है | राधा ने दरिद्रता और मायूसी भरे अंदाज़ में कहा |

शिखा के घर में राधा तकरीबन 2 सालों से काम कर रही थी | शिखा के 2 लड़के थे जो कि मल्टी-नेशनल कंपनी में बड़े अफसर थे | पति को रिटायरमेंट मिलने के बाद सिर्फ 2 काम ही बचे थे -एक हर आधे घाटे बाद इलायची वाली चाय पीना और अपने बगीचे की देखभाल करना | और शिखा पूरे दिन खाली बैठे-बैठे बोर हो जाती तो उसने टूशन के बच्चे पढ़ाने शुरू कर दिया | शैक्षिक योग्यता तो इतनी नहीं थी इसीलिए पहली, दूसरी के बच्चों को ही पढ़ा पाती थी | जब भी शिखा बच्चों को पढ़ाती तो राधा का पूरा ध्यान किताबों की ओर होता जैसे पढ़ने बोल दो… झाड़ू, पोंछा छोड़ बस बैठ जाएगी |

शिखा ये सबकुछ भांप रही थी | राधा की उम्र ज्यादा नहीं थी | होगी यही कुछ 14 से 15 साल | राधा की पढ़ाई में दिलचस्पी देख शिखा ने उसकी माँ को मनाकर उसका दाखिला सरकारी स्कूल में करा दिया | अब राधा रोज सुबह स्कूल जाते हुए शिखा को जरूर मिलके जाती |

शिखा की भी शादी बहुत ही छोटी उम्र में हो गयी थी |

हमे लड़की पसंद है | तो रिश्ता पक्का -लड़के वालों ने रौब से पूछा

बिल्कुल इससे अच्छा लड़का शिखा को नहीं मिल सकता – शिखा के पापा ने विनम्रता से जवाब दिया |

जैसे ही शिखा 10वी कक्षा का आखिरी पेपर देकर घर पहुंची | उसके घर में उसके रिश्ते की बातें चल रही थी | टेबल पर नाश्ते से भरी प्लेटें, माँ-बाप के चेहरे पर ख़ुशी अब बस शिखा को ये फैसला सुनाने की देरी थी | उसकी हां या ना सुनने का तो इंतज़ार ही नहीं था | क्योंकि शादी-ब्याह का फैसला बड़े करते हैं जो वो कर चुके थे | शिखा खूब रोई… उसने अपने छोटे होने की दुहाई भी दी लेकिन “अच्छा रिश्ता मिलना संजोग की बात है ” बस यही कह सबने उसका मुँह बंद करा दिया और कुल 15 साल की उम्र में शादी हो गयी |

जल्दी शादी हो गयी तो सब कुछ वक्त से पहले हो गया | सास-ससुर का दबाव, बच्चे संभालना, पत्नी का धर्म निभाने में वो छोटी सी बच्ची कब बड़ी हो गयी -उसे खुद पता नहीं चला | आज जब वो राधा को हर रोज स्कूल जाता देखती तो उसे लगता जैसे उसका अतीत लौट आया लेकिन आज अपने अतीत का भविष्य सुधार सकती है |

शिखा- क्या हुआ राधा स्कूल क्यों नहीं जा रही ?

राधा की माँ – इसके बापू कह रहे हैं बहुत हो गयी पढ़ाई लिखाई, अब हाथ पीले कर दो इसके | लड़का फैक्ट्री में काम करता है | संजोग मिल गए बस |

राधा की माँ के इन शब्दों के चयन से एक बार फिर शिखा अपने आप को अतीत की कड़वी यादों से ना बचा पायी | बहुत समझाया लेकिन कुछ काम ना आया |

शिखा सीधे ही अपनी माँ के घर आ गयी और अपने दिल का हाल बताया | खूब रोई शिखा, शायद उससे भी ज्यादा जब उसकी शादी बाली उम्र में कर दी | उसे लग रहा था शायद एक और इंसान को फिर मेरी ही ज़िन्दगी जीनी पड़ेगी | माँ ने कहा -इतने बड़े बच्चे हो गए तेरे ! क्या पुरानी बातें लेकर सोच में बैठ गयी ?

तब शिखा से रुका ना गया और वो एक सांस में बोलती चली गयी -माँ तुम्हारे लिए बीती बातें हैं पर क्या कभी सोचा है कि वो समय बीता कैसे होगा | जब एक लड़की को ये ना पता हो कि शादी का मतलब क्या होता है, उसके मायने क्या होते हैं ? कभी सोचा है कि एक छोटी सी बच्ची ने अपने बच्चे को कैसे संभाला होगा | आज भी जब मेरी दोस्त मेरे आते ही हिंदी में बोलना शुरू कर देती है ये मान के कि मेरे पल्ले कुछ नहीं पड़ना, कभी सोचा है कैसा महसूस होता है ? एक एक पैसे के लिए अपने पति का मुँह देखा मैंने ! इस काबिल बनने ही नहीं दिया मुझे कि मैं खुद कमा सकूँ | अगर सोचा होता तो आज 40 साल में 50 साल की ना लगती | इतना सब सुनाने के बाद वो अपनी माँ की गोद में लेट गयी जैसे बोलते-बोलते थक गयी हो |

 

चित्र स्त्रोत: Reuters UK,the financial express, Reuter India

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