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difference between Covaxin vs Covishield vs Sputnik V

Covaxin vs Covishield: जानिए कौनसी कोविड वैक्सीन है आपके लिए बेहतर?

Himanshu Pareek | जून 26, 2021

क्या कोरोना से लड़ाई के लिए कोविड वैक्सीन लगवाने की तैयारी कर रहे हैं आप? इस आर्टिकल Covaxin vs Covishield में जानिए भारत में उपलब्ध कोरोना के दो मुख्य टीके, कोवैक्सीन व कोविशील्ड का अंतर!

भारत में कोरोना की दो लहरें भयंकर तबाही मचा चुकी हैं। महामारी के इस भयावह दौर में कोविड टीका उम्मीद की एक नई किरण बनकर आया है। भारत में कोरोना के टीके के रूप में कोवैक्सीन और कोविशील्ड (Covaxin vs Covishield) नामक दो वैक्सीन मुख्य रूप से उपलब्ध हैं। ये दोनों टीके वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा गहन अध्ययन और शोध के बाद तैयार किये गए हैं और इनके कई चरणों में परीक्षण के  पश्चात सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

हालांकि इसी बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर अब भी लोगों के मन में कई सवाल हैं इसलिए इस आर्टिकल Covaxin vs Covishield में हम आपके लिए लेकर आए हैं इन दोनों टीकों के बीच का तुलनात्मक अध्ययन, साथ ही चर्चा करेंगे क्यों जरूरी है आपके लिए वैक्सीन लगवाना और इन दोनों में से कोई एक टीका लगवाने या न लगवाने से क्या कोई अंतर पड़ता है या नहीं? आइये जानते हैं विस्तार से।

 

वैक्सीन क्या है?

What is Vaccine

वैक्सीन अर्थात किसी बीमारी की रोकथाम के लिए लगने वाला टीका। जब हमारा शरीर किसी गंभीर बीमारी को पैदा करने वाले कीटाणु अथवा विषाणु से लड़ने में असमर्थ होता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारी उस बीमारी से रक्षा करने में असमर्थ हो जाती है, ऐसे में वैक्सीन यानी कि टीके का सहारा लिया जाता है। हाल ही में दुनिया भर में कोरोना वायरस ने काफी तबाही मचाई और लाखों-करोड़ों लोगों को इससे अपनी जान गंवानी पड़ी। इस महामारी का सामना करने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने अथाह मेहनत और अध्ययन के बाद कोरोना वैक्सीन तैयार की। कोरोना वैक्सीन हमारे शरीर को कोरोना वायरस का सामना करने और वायरस के हमले के जवाब में एंटीबॉडीज बनाकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है।

दुनिया भर के वैज्ञानिकों कोरोना महामारी से निपटने के लिए अपने-अपने स्तर पर कोरोना वैक्सीन बनाने का काम किया। इसी कड़ी में भारत में कोविशील्ड व कोवैक्सीन नामक टीके बनाये गए हैं। कोवैक्सीन को जहाँ पूरी तरह से भारत में ही भारत बायोटेक कंपनी द्वारा तैयार किया गया है, वहीं कोविशील्ड को सीरम इंस्टीट्यूट व ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रोजेनेका ने मिलकर बनाया है। इन दोनों टीकों का इस्तेमाल पूर्ण परीक्षण के बाद किया जा रहा है और ये टीके राज्य व केंद्र सरकारों द्वारा चुने गए सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध हैं। टीके उपलब्ध होने व अपनी बारी आने पर आप आरोग्य सेतु ऐप अथवा कोविन पोर्टल पर पंजीकरण कर कोरोना का टीका लगवा सकते हैं।

कोवैक्सिन और कोविशील्ड के बीच अंतर (Difference Between Covaxin and Covishield)

भारत में कोरोना के लिए लड़ाई के लिए कोवैक्सीन व कोविशील्ड नामक दो टीके उपलब्ध हैं। आमतौर पर ये दोनों टीके लगभग एक ही तरह से काम करते हैं, पर इन्हें बनाने की आधारभूत तकनीक थोड़ी अलग है।

कोवैक्सीन को ICMR यानि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च व भारत बायोटेक कंपनी द्वारा बनाया गया है और इसे स्वदेशी वैक्सीन कहा जा रहा है। इस वैक्सीन को बनाने में निष्क्रिय कोविड-19 वायरस का इस्तेमाल किया गया है। इस वैक्सीन में मौजूद वायरस हमें बिना नुकसान पहुंचाए कोविड-19 के सक्रिय वायरस के विरुद्ध हमारी इम्यूनिटी बनाने में मदद करता है। कोवैक्सीन को अन्य पारंपरिक टीकों जैसे रेबीज़, बुखार, दिमागी बुखार आदि की तरह तैयार किया गया है।

कोविशील्ड का उत्पादन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा ऑक्सफोर्ड और एस्ट्रोजेनेका के सहयोग से किया जा रहा है। इस वैक्सीन ने निर्माण के लिए वायरल वेक्टर प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया गया है जो कि कोवैक्सीन से अलग है। कोविशील्ड को बनाने में चिंपांजी बंदर में मिलने वाले एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है जो कि इन बंदरों में सर्दी का कारण बनता है। इस वायरस की आनुवंशिक सामग्री कोरोना वायरस के स्पाईक प्रोटीन से मिलती जुलती है, जिसके जरिये वायरस हमारी कोशिकाओं तक पहुंचता है। एडेनोवायरस के शरीर में प्रवेश से हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र कोरोना वायरस के खिलाफ भी मजबूत हो जाता है। इसी तकनीक से पूर्व में इबोला वैक्सीन को भी तैयार किया गया था।

कोवैक्सीन व कोविशील्ड दोनों ही टीकों के काम करने का तरीका लगभग एक जैसा है। कोरोना से पूर्ण सुरक्षा के लिए इन दोनों ही टीकों के दो डोज़ की आवश्यकता होगी। दो डोज़ के मध्य औसत अन्तर चार से छः महीनों का रहना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना वायरस के विरुद्ध कोवैक्सीन 81 प्रतिशत वहीं कोविशील्ड 70 से 90 प्रतिशत तक प्रभावी हैं। इन दोनों ही टीकों के कोई गंभीर साइडइफेक्ट्स नहीं है।

 

कोरोना वैक्सीन के फायदे (Covaxin/Covishield Vaccine Ke Fayde in Hindi)

Covaxin/Covishield Vaccine Ke Fayde in Hindi

कोरोना वैक्सीन इस वायरस के विरुद्ध हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती है। कोरोना वैक्सीन लेने से हमारे शरीर में एंटी-बॉडीज़ का निर्माण होता है जिसके परिणामस्वरूप हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। ऐसे में अगर हम कोरोना वायरस के संपर्क में आ भी जाते हैं, तो हमारा शरीर इस वायरस की पहचान कर इसे बेअसर कर देता है, जिससे हम गंभीर रूप से बीमार होने से बच जाते हैं। यही कारण है कि सभी देश अपने नागरिकों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं जो कि कोरोना मुक्त विश्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

कोरोना वैक्सीन के लक्षण (Symptoms of COVID Vaccine in Hindi)

यूँ तो देश में लगाई जा रही कोवैक्सीन व कोविशील्ड (Covaxin vs Covishield) दोनों ही पूर्ण परीक्षण और शोध के बाद ही इस्तेमाल में लाई जा रही हैं पर फिर भी लोगों के मन में संशय बना हुआ है। अगर आपके मन में कोरोना वैक्सीन को लेकर संशय है, तो आपको बता दे कि दोनों ही कंपनियों द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद लोगों में हल्का बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द आदि लक्षण सामने आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटी-बॉडीज़ बनने की प्रक्रिया का शुरू होना है, जिसका अर्थ है कि वैक्सीन ने अपना काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि ये लक्षण अधिक गंभीर नहीं होते और कुछ समय बाद ही स्थिति सामान्य हो जाती है। इसका अर्थ है कि कोविशील्ड व कोवैक्सीन दोनों ही पूरी तरह से सुरक्षित है। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन लगवाने के बाद एक संतुलित आहार लेना चाहिए और आराम करना चाहिए जिससे वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स न हों।

 

कोवैक्सिन (Covaxin) नहीं मिलता तो क्या दूसरा डोज कोविशील्ड (Covishield) का ले सकते हैं?

देश में कोरोना के टीकों की सीमित सप्लाई के बीच लोगों के मन में सवाल है कि क्या वे एक डोज़ कोवैक्सीन का लगवाने के बाद दूसरा डोज़ कोविशील्ड का लगवा सकते हैं। इसको लेकर कोई बड़ी रिसर्च अभी सामने नहीं आयी है पर भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी गयी सलाह के अनुसार कोरोना से बचाव के लिए एक व्यक्ति को टीकाकरण का एक चरण पूरा करना जरूरी है। इसका अर्थ है कि अगर आपको पहला डोज़ कोवैक्सीन का लगा था तो दूसरा डोज़ भी कोवैक्सीन का ही लगना चाहिए। यही बात कोविशील्ड के लिए भी लागू होती है। अतः दोनों कंपनी की वैक्सीन लगवाने की जगह दूसरे डोज़ की उपलब्धता का धैर्यपूर्वक इंतजार करें।

 

किन्हें दिया जा सकता है टीका?

भारत में 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों के लिए कोरोना टीकाकरण अभियान जोरों पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना वैक्सीन का टीका बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अभी नहीं दिया जा रहा है।

 

कोरोना का टीकाकरण ही कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय है। इस आर्टिकल Covaxin vs Covishield में हमने आपसे कोविड टीकाकरण सम्बंधी सभी बारीक जानकारियां शेयर की। कैसा लगा आपको हमारा यह आर्टिकल, हमें बताइए, साथ ही इसे शेयर कीजिए अपने दोस्तों और परिवार जनों के साथ। ऐसी ही अनमोल जानकारी और नई-नई रेसिपीज के लिए जुड़े रहिए BetterButter के साथ।

 

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Himanshu Pareek

हिमांशु एक लेखक हैं और उन्हें खान-पान, आयुर्वेद, अध्यात्म एवं राजनीति से सम्बंधित विषयों पर लिखने का अनुभव है। इसके अलावा हिमांशु को घूमना, कविताएँ लिखना-पढ़ना और क्रिकेट देखना व खेलना पसंद है।

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