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कौवे और हंस की जोड़ी

Parul Sachdeva | जुलाई 31, 2018

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hindi Personal Story

कौवे और हंस की जोड़ी

रोहित की माँ -हे राम, इतनी मोटी लड़की, कहा जचेगी हमारे रोहित के साथ ! हंस और कौवे की जोड़ी लगेगी | अरे पंडित जी कोई पतली सुन्दर लड़की बताओ |

पंडित – अरे नाज़ो में पली है, एकलौती लड़की है – बेतहाशा पैसा है, आपकी तो लॉटरी लग जाएगी अगर यहाँ रिश्ता कर लिया |

रोहित की माँ की आँखे जैसे सिक्कों की बनावट में बदल गयी | अच्छा, दिखाना, वैसे इतनी बुरी भी नहीं हैं | शकल तो 4 दिन की चांदनी हैं, लड़की का स्वभाव अच्छा होना चाहिए | क्यों रोहित ?

रोहित -जी माँ |

रोहित भी एकलौता बेटा था तो बचपन से ही उसने अपने माँ-बाप की हां में हां मिलाना सीखा था | रोहित की माँ ने पंडित जी को भेज ये रिश्ता स्वीकार कर लिया | वहा नीलम और उसके माँ-बाप पिछले 2 सालों से बस लड़के वालों के आगे खाने की प्लेटें लगाते थे और सब खा पी के सन्देश भेजते – लड़की मोटी हैं ! और हर बार सबका मुँह उतर जाता | एक बार तो इन सबसे परेशान होकर नीलम ने शादी करने के लिए ही मना कर दिया था | पर जैसे ही उन्हें रोहित के घर से हां सुनने को मिली उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा | लड़के वाले इतने अमीर नहीं थे लेकिन फिर भी सामने से रिश्ता आया और लोग भले लगे तो नीलम के माँ-बाप ने भी हां कह दी | नीलम के माँ-बाप ने जोरो-शोरो से उसकी शादी कर दी|

फ्लैट, गहने, पैसे -सब कुछ था दहेज़ में | ससुराल में भी सब नीलम के स्वभाव और तीमारदारी से खुश थे |

नीलम ड्राइंग रूम की पोछा-पाछी कर रही थी कि उसने अपनी सास को उदास देखा |

नीलम-क्या हुआ मम्मी, सब ठीक है?

सास- कहां बेटा, रोहित का काम बहुत मंदा चल रहा है| रोहित से पूछा तो कहने लगा शॉप पे थोड़ा माल डालना पड़ेगा | अब समझ नहीं आ रहा कहां से पैसे लाऊ ?

नीलम- कितने पैसे चाहिए ?

सास- बेटा 3 लाख के करीब बोल रहा था |

नीलम- हो जायेगा मम्मी, टेंशन ना लो |

नीलम ने फट से अपनी माँ को फ़ोन किया और नौकर पैसे लेकर हाज़िर हो गया |

कुछ समय बाद सास फिर आकर नीलम से बोली – रोहित का कितने बड़े लोगों के साथ उठना बैठना है, सब बड़ी-बड़ी गाड़ियों में आते हैं ये बेचारा मोटरबाइक को धक्के लगा-लगा के जाता है | बड़ा दुख होता है | अभी हाथ में इतना पैसा भी नहीं की एक लम्बी कार ले दू | चलो उसकी किस्मत !

नीलम कुछ ना बोली |अगले ही दिन नीलम के घर से चमचमाती लम्बी कार भी आ गयी |

पर एक दिन जब…

नीलम रोहित को ढूँढ़ते हुए अपनी सास के कमरे तक पहुंची की उसने अपने सास-ससुर को रोहित से बात करते सुना –

रोहित- माँ इस बार, 3 लाख से काम नहीं चलेगा बोलो सदर मार्केट में शॉप के लिए एक बड़ी जगह देखी है तो 30 लाख रूपए चाहिए |

माँ- वो सोने के अंडे देने वाली मुर्गी हैं, उसे काटना बेवकूफी होगी | सब्र रख, पैसे ले-लेकर नंगा ना कर दिया इसके घरवालों को तो कहना |

ये सब सुनकर नीलम के पैरो तले जमीन निकल गयी | नीलम चाहे कद-काठी में कम थी लेकिन पढ़ी-लिखी थी और उसे ऐसे लोगों से बदला लेना अच्छे से आता था | नीलम ने उन्हें सबक सिखाने की पूरी तैयारी कर ली | सबसे पहले उसने अपनी सास के कमरे के लिए एक नया एलसीडी टीवी मंगवाया | सास तो फूले नहीं समां रही थी लेकिन उसे ना पता था कि नीलम के दिमाग में कुछ और ही पक रहा है |  एक स्पाई कैमरा कंपनी के एग्जीक्यूटिव को टेक्नीशियन बता घर बुलाया | सास के कमरे में कैमरा लगवा दिया |

रोहित काम से रात को आता था और जब सास-ससुर ने पूछा तो कहा – कुछ नहीं मम्मी, आपके कमरे में केबल लगवानी है ना तो वही करने आया है | सास सोचने लगी वाह मैंने तो पिछले जन्म में मोती दान किये होंगे जो ऐसी बहु मिली !

कहते हैं ना चोर चोरी से जाए लेकिन हेरा-फेरी से ना जाएं | उसी तरह उसकी सास-ससुर और पति नीलम के घर से और पैसा ऐंठने के प्लान बनाते चले गए और उनका प्लानिंग का अड्डा होता था सास का कमरा | जब नीलम के पास पूरे सबूत हो गए तो उसने एक पल की देरी किये बिना पुलिस में दहेज़ मांगने की रिपोर्ट कर दी और सारी वीडियो रिकॉर्डिंग्स पुलिस के हवाले कर दी | सास-ससुर और बेटे को पंहुचा दिया उनकी सही जगह -जेल | नीलम के पिता बड़े औदे पर थे तो नीलम को इन्साफ मिला |

-उन लालचियों से उनका घर,कार तो छिना ही बल्कि सारी बैंक एस्सेट भी हाथ से गयी जो शादी और धोखा-धड़ी से ऐंठे पैसों का सीधा सीधा हिसाब था |

सच में ये कौवे और हंस की जोड़ी थी जहा सही मायनो में कौया था रोहित और हंस थी नीलम |

चित्र स्त्रोत -blogger,NDTV khabar, Hindustan times,wikipedia,smart