कैसे कराएं बच्चों को सही और गलत का ज्ञान

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बात कुछ इस तरह की है कि कुछ दिन पहले मेरी चार साल की बेटी पड़ोसी के बच्चों के साथ खेल के वापस लौटी और खाना खा के थोड़ी देर बाद सो गयी। उसके कपड़ों की तह करते हुए मैंने ध्यान दिया कि ज़ेब में एक दस रुपये का सिक्का रखा हुआ है। मैंने और मेरे पति ने यह पहले से ही तय किया हुआ था कि बच्चे को एक निश्चित उम्र के पहले पैसे देने की आदत नहीं डालनी चाहिए इसलिए मुझे हैरानी हुई कि उसे यह सिक्का कहाँ से मिला। अगले दिन पूछने पर उसने बताया कि उसकी दोस्त ने अपनी मम्मी के पर्स से दो सिक्के निकाले थे और एक मुझे दे दिया। मुझे समझ ही नहीं आया कि इस स्थिति पर कैसे रिएक्ट करूँ। बड़े प्यार से उसे समझाया कि बेटा किसी और की चीज़ ऐसे नहीं लेते और साथ ही ये भी कि बच्चों को मम्मी पापा से पूछे बिना उनके पर्स से पैसे नहीं निकालने चाहिए इसे चोरी कहा जाता है, जो गलत बात है। शाम को मैंने खुद जाकर उन पड़ोसी को वह सिक्का वापस किया और पूरी बात बताई। अपनी एक काउन्सलर मित्र से इस बारे में बात करने पर उन्होने बच्चों में सही गलत की शिक्षा के लिए कुछ बेहतरीन सुझाव दिये जो मैं यहाँ आप के साथ भी बांटना चाहूंगी।

 

1.आप खुद बच्चों के लिए उदाहरण बनें-

कहा जाता है परिवार ही बच्चे की प्रारम्भिक पाठशाला है। माँ बाप के साथ साथ घर के बाकी लोग जिस तरह का व्यवहार करते हैं बच्चा उसे ही सीखता है। इसलिए जो काम आप चाहते हैं कि आपका बच्चा न करे उसे आप को भी नहीं करना चाहिए।

 

2.मौरल स्टोरीज़ सुनाएँ-

बच्चों को पसंद होती हैं कहानियाँ और यही कहानियाँ उनमें अच्छे गुणों का विकास करने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। हिंदुओं में रामायण, महाभारत जैसी धार्मिक कहानियों   के अलावा पंचतंत्र की कहानियाँ सभी बच्चों के लिए इसका एक अच्छा उदाहरण हैं। बच्चों की मासिक पत्रिकाओं के साथ साथ आजकल के डिजिटलाईजेशन के युग में कार्टून्स या अन्य माध्यमों से भी बच्चे का नैतिक ज्ञान बढ़ाया जा सकता है।

 

3.अच्छे कामों के लिए प्रशंसा करें-

जब भी आपको लगे की आप के द्वारा समझाई गयी बातों का बच्चे ने पालन किया है और गलत बात को समझते हुए उसे न करने का निर्णय लिया है तो ऐसे मौकों पर बच्चे की प्रसंशा एवं उत्साहवर्धन करें। इससे उसके सही एवं गलत को समझने की शक्ति का विकास होगा।

 

4.अच्छी संगति का ध्यान रखें-

इस बात पर हमेशा नज़र रखें कि बच्चा किस तरह के साथ में है। केवल आर्थिक स्तर के आधार पर बच्चे के दोस्तों का चुनाव न करें। सामाजिक और संस्कारिक मूल्यों का बच्चे के विकास में बहुत महत्व है और सही दोस्तों का चुनाव इन गुणों के विकसित होने में मदद करता है।

 

5.बच्चों के लिए कुछ निश्चित कायदे और नियम तय करें –

 बच्चे के लिए कुछ नियम अवश्य बनाएँ। जैसे बाकी बच्चों के साथ खेलते हुए उसका व्यवहार कैसा होना चाहिए। अगर उसे कोई वस्तु या पैसे पड़े हुए मिलें तो उसे न उठाएँ बल्कि माता पिता को बताएं। किसी के भी साथ शारीरक दुर्व्यवहार न करें, बुरे शब्द न बोलें। साथ ही सामान्य शिष्टाचार जैसे कि बड़ों को आदर स्वरूप नमस्ते या प्रणाम करें। यह भी निश्चित कर दें कि इसमें से कोई भी बात न मानने को गलती समझा जाएगा और उसके लिए बच्चा जवाबदेह होगा।

 

6.इस सब के साथ आप अपना धैर्य न खोएँ –

बच्चों में अच्छी आदतों का विकास एक धीमी और सतत प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में संभावना है कि बच्चा गलती करे या आप की बताई हुई बात को भूल जाए। लेकिन आप का मुख्य उद्देश्य क्यूंकि बच्चे को दंड देना नहीं अपितु उसके चरित्र का विकास है इसलिए ऐसी परिस्थितियों में आप को अपना आपा नहीं खोना है। बल्कि बच्चे को याद दिलाएँ कि आप उससे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद रखते हैं और यह भी कि आप को उस पर पूरा भरोसा है। बच्चे और आप के बीच यह विश्वास का संबंध बच्चे को हमेशा गलत राह पर जाने से रोक लेगा।

 

चित्र श्रोत:  www. Public Domain Pictures., www.wikipedia.org, www.huggingtonpost.com , www.1stmardiv.marines.mil

 

 

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