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ऑटोग्राफ प्लीज !

Parul Sachdeva | जुलाई 25, 2018

दिव्या  – कलमों पर थोड़े सफ़ेद बाल आ गए तुम्हारे | तुम तो कहते थे मैं कभी बूढा नहीं होऊंगा |

हिमांशु- तुम भी तो कहती थी मैं कभी मोटी नहीं होउंगी, अब देखो अच्छी हट्टी-कट्टी लग रही हो |


दिव्या और हिमांशु दोनों की ही आँखों में नमी और लबों पर एक मुस्कराहट आ गयी | 15 साल बाद जो मिले तो समझ नहीं आ रहा था कि हाथ मिलाये, सर हिलाये या फिर एक मुस्कान बहुत हैं | शायद आपको पीछे की पूरी कहानी बतानी जरूरी हैं नहीं तो आप दिव्या,हिमांशु और उनकी किस्मत को समझ नहीं पाएंगे |

तो ये बात हैं सन 2001 की जब दिव्या और हिमांशु को मीडिया के एक कॉलेज में एडमिशन मिला | हिमांशु को तो शुरू से ही अपना लक्ष्य साफ़-साफ़ दिखाई दें रहा था – दरसल वो एक रेडियो जॉकी बनना चाहता था |

बोलता बहुत था और अच्छा बोलता था | लेकिन दिव्या ने और भी 2 कोर्स में अप्लाई किया था | मीडिया कोर्स में अच्छी रैंक आ गयी तो यही ले लिया एडमिशन | उस समय मीडिया कोर्स के बारे में बहुत कम लोग ही जानते थे | तब मीडिया का मतलब सिर्फ न्यूज़ रीडर बनना था | क्योंकि दादी- नानी को यही समझ आता था | और जब भी घर के बड़े-बूढ़े किसी न्यूज़ रीडर को टीवी पर न्यूज़ देता देखते दिव्या से हर बार यही सवाल करते – यही बनेगी तू ?

दिव्या भी एक होनहार स्टूडेंट थी |

हर परीक्षा में अव्वल | क्लास  में कई बार देखा तो था हिमांशु को लेकिन पहली बार नज़रे मिली एग्जामिनेशन हॉल में जहा दिव्या शीट पर शीट मांग रही थी और हिमांशु सोच रहा था इस पहली शीट को कैसे भरु? कई बार तो सवाल के जवाब के बीच में लिख आता था नमस्कार, मैं हूँ आपका होस्ट हिमांशु और आप सुन रहे है रेडियो मिर्ची | ऐसा करने पर कई बार उसे टीचर की फटकार मिलती | किताबों में ध्यान जरा कम था लेकिन दुनिया की खबर थी | जैसे ही दिव्या पेपर दे कर बाहर निकली, दिव्या को सुनाने के लिए हिमांशु ने अपने दोस्तों से कहा –

किताबी कीड़े बनने से आपको सफलता नहीं मिलेगी मेरे दोस्त, किताबों से थोड़ा बाहर निकलो |

दिव्या ये सुनकर गुस्से में आ गयी लेकिन कुछ नहीं बोली | दूसरी मुलाक़ात करवाई दिव्या की बेस्ट फ्रेंड आरुषि ने | कितना अजीब सा है ना ये हिमांशु – दिव्या नाक चिड़ा कर बोली | अरे नहीं दिल का बहुत सच्चा है और अच्छे घर का लड़का है | दूसरी मुलाक़ात कब तीसरी, चौथी और पूरी ज़िन्दगी साथ बिताने के वादों पर जाकर खत्म हुई दोनों को ना पता चला |

हिमांशु बड़ा आदमी बनने के ख्याल पर इतना निश्चित था कि कई बार दिव्या को बोलता -ऑटोग्राफ ले ले मेरा, बाद में मिले ना मिले ! इस रूठने मनाने के सफर में उन्होंने सब सोच लिया था कि करियर बनाना हैं फिर शादी करनी हैं लेकिन एक बात भूल गए कि दोनों के नाम के आगे क्या लगा हैं | दिव्या अहलावत और हिमांशु शर्मा  | दिव्या जाट परिवार से थी जो इंटरकास्ट मैरिज के सख्त खिलाफ थे | किस्मत ने और लोगो ने उन्हें एक ना होने दिया और दोनों को अपने रास्ते बदलने पड़े |

दिव्या की शादी हुई एक बड़े उद्योगपति से और हिमांशु ने कई साल अपने करियर को दे दिए और एक बहुत प्रसिद्ध रेडियो जॉकी बन गया | 15 साल तक दोनों एक दूसरे से ना मिले और जब मिले –

हिमांशु- क्या बात हैं ? मेक-अप करना छोड़ दिया ? कॉलेज में तो टिप-टॉप रहती थी, डोमेस्टिक वोइलेंस का शिकार हो क्या – ये कह कर हिमांशु जोर-जोर से हॅसने लगा |

दिव्या -डोमेस्टिक वोइलेंस करने वाला ही नहीं रहा – और उसकी आँखों से आंसू झर-झर बहने लगे | रोहित की 2 साल पहले कार एक्सीडेंट में दैथ हो गयी |

अब मेरे पास मेरी 12 साल की बेटी हैं और खूब सारी यादें ! अपने गम को अपनी मुस्कान में छुपाती दिव्या बोली मेरा छोड़ो, तुम बताओ RJ हिमांशु, शादी कैसी चल रही हैं ?

शादी तो कबकी टूट गयी, श्रेया मीडिया में ही काम करती थी और उसका उसी के सहकर्मी के साथ अफेयर हो गया | जब इसका पता मुझे चला तो मैंने डाइवोर्स फाइल कर दिया | बस अब कोर्ट में उसी के चक्कर काट रहा हूँ |

दिव्या ने हिमांशु के कंधे पर हाथ रखा कि तभी पीछे से आवाज आयी “मम्मा, क्लास ओवर ” | दिया की बेटी वही पास में डांस क्लास से होकर आयी थी | मम्मा ये कौन हैं ? दिव्या ने बड़ी उत्सुकता से पूछा | ये.. ये हैं RJ हिमांशु ! -दिव्या गर्व से बोली | वही रेडियो मिर्ची वाले RJ हिमांशु ? ऑटोग्राफ प्लीज !

दिव्या और हिमांशु ने एक दूसरे की और देखा और उन्हें ऐसा लगा जैसे भूतकाल को वर्तमान ने अपनी बाहों में समेट लिया हो |

चित्र स्त्रोत -The smith restaurant,edu tricks, The financial express,career guide

Parul Sachdeva

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