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बहु राज को राज रहने दो!

Parul Sachdeva | अक्टूबर 10, 2018

आज शैव्या के लिए बहुत अजीब रात थी उसे ऐसा लग रहा था मानो इस एक रात में वो हज़ारो रातें जीने जा रही थी | आज उसकी शादी की पहली रात थी |

दिल में अजीब सी बेचैनी, झिझक, चिड़चिड़ाहट और गुस्सा था | आप सोच रहे होंगे गुस्सा क्यों ? गुस्सा इसीलिए कि शैव्या को किसी और से प्यार था लेकिन लड़के की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने की वजह से शैव्या के माता- पिता ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया था और मजबूरन शोभन से शादी करनी पड़ी |

दुल्हन के लिबास में वो अनमने मन से बैठी ना जाने कितने ख्यालो से लड़ रही थी, मुझे हाथ लगाया ना तो दूर झटक दूंगी और बोल दूंगी तुम्हारी जागीर नहीं हूँ ! लेकिन अगर उसने जबरदस्ती की तो ? चीख-चिल्ला के बाहर थोड़े ही चली जाउंगी ! उसके अंदर की मंशा बस वो खुद ही समझ सकती थी | किसी और से सातों जन्मों का वादा करके किसी और के साथ 7 फेरे लेना..उसे लग रहा था जैसे हर आती सांस सिर्फ उसके सुधाकर को बुला रही हैं |

आज अगर सुधाकर दूल्हा होता तो शायद उसके मन की इच्छाएं कुछ और ही होती | इसी मंशा में थी कि कमरे का दरवाज़ा चिर करके खुला | शैव्या सीधे होकर बैठ गयी | शोभन ने लहराते हुए शब्दों में कहा “मेक योरसेल्फ कम्फर्टेबल ! यू मस्ट बी टायर्ड ! हैव आ गुड स्लीप ! और वो दूसरी ओर मुँह करके सो गया | शैव्या को और अजीब सा लगने लगा कि कुछ हुआ ही नहीं पर उसके लिए तो अच्छा ही था क्योंकि वो चाहती ही नहीं थी कि कोई और उसे ना छुए जिसे उसके सुधाकर ने छुआ है|

शैव्या की रात बेचैनी की करवटों में कट गयी लेकिन दिन कुछ ऐसी अनसुलझी कहानी लेकर आया जिसे शैव्या ने 2 दिन में सुलझा लिया |

मोम… आय विल हैव ब्रेकफास्ट इन ऑफिस… शोभन फिर से लहराते हुए अंदाज़ में अपनी माँ को ये बोल गाड़ी की चाबियां उठाते हुए घर से बाहर निकल गया | जब शैव्या ने उसकी ओर नज़र उठाकर देखा तो उसकी चाल में भी अलग ही लचक थी.. बिल्कुल औरतों वाली | शैव्या एक स्मार्ट लड़की थी | कुल 2 दिनों में शोभन की चाल-ढाल देखकर उसे पता चल गया कि वो “गे ” हैं |

जैसे ही वो सासु माँ के ऊपर दाना पानी लेकर चढ़ी तो सासु माँ ने भी पलट कर कहा –

सुनो बहु, जानती हूँ बेटे में प्रॉब्लम है, घर से बाहर बात गयी तो नाक कट जायेगी लेकिन मैं ये भी जानती हूँ कि तुम्हारा किसी सुधाकर नाम के लड़के से अफेयर था और शायद आज भी तुम उसी की यादों में हो | तुम सुधाकर से अपना रिश्ता मत तोड़ो और हम तुमसे अपना रिश्ता जोड़े रखेंगे | तुम हमारे राज को राज रखना और हम तुम्हारे !

शैव्या के पैरो तले जमीन निकल गयी जब उसने उसी की सासु माँ से किसी और मर्द के साथ रिश्ता रखने की हिदायत सुनी | लेकिन शैव्या तो फिर खिल उठी | उसने सुधाकर के साथ फिर अपनी दुनिया बनाने का फैसला किया लेकिन दुनिया के सामने वो अभी भी मल्होत्रा खानदान की बहु थी |  

कई दिनों ये नाटक चलता रहा | मंच वही, कलाकार भी वही लेकिन कहानी में हर रोज एक नया ट्विस्ट | 2 साल बीत जाने के बाद नाटक में ये ट्विस्ट आया कि हर रिश्तेदार ये पूछे कि फैमिली कब बढ़ा रहे हो ? क्या बात है कोई प्रॉब्लम तो नहीं ? शैव्या के पास कोई जवाब नहीं होता | और सासु माँ किसी को कुछ कहती किसी को कुछ | कभी शैव्या को बच्चा नहीं चाहिए, ट्रीटमेंट चल रहा हैं ! आजकल के बच्चो का खान-पान ही ऐसा है कि प्रॉब्लम आती ही है -इस तरह के कई बहाने बनाती | थक हार कर शैव्या ने सोचा ये कैसी ज़िन्दगी जी रही हूँ मैं – जिसकी बुनियाद झूठ और छल पर है तो कैसे अपनी सपनों की दुनिया का महल खड़ा कर पाऊँगी ?

एक दिन तंग आ कर उसने सारी कहानी अपने माँ-बाप को बता दी और माँ-बाप ने शोभन से उसका तलाक करवा दिया और सुधाकर तो हमेशा से शैव्या से शादी करना चाहता था | और दोनों ने शादी कर ली |

सभी ने फूलो और तालियों के साथ दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया | इतने सालो से चल रहा नाटक ख़त्म हुआ और मंच का मानो पर्दा गिर गया |

 

चित्र स्त्रोत –The news minute,Oyo room, Procon.org,Bonobology.com, Malabar gold and diamonds

 

Parul Sachdeva

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