बहु तो बड़ी खूबसूरत मिली है तुम्हे !
एकदम रानी जैसी -सविता की सहेली ने अपनी एकटक मुस्कान बनाये हुए कहा |
रानी नहीं.. चाँद जैसी -सविता के पापा ने पीछे से लड़खड़ाती आवाज़ में कहा |
पापा आप वहां बैठो ! क्या औरतों के बीच में बोलने लग जाते हो |
बस आप सब का आशीर्वाद है | कुछ खाया आपने ? सविता ने अपने अटपटे भावों को नियंत्रित कर शादी में आये लोगों का आदर सत्कार किया |
अरे अंकित कहाँ है ? एक ही भाई है वो भी नहीं आया शादी में ? सहराबन्धी बिना मामा के कैसे हो गयी ?
सविता ये सुन स्तब्ध रह जाती और

उसकी आँखों से आंसू निकल जाते हैं और वो किसी सोच में डूब जाती है –
खेलने दो बच्चो को भाभी.. कोई बात नहीं !
अरे नहीं दीदी, कुछ नुक्सान कर बैठेंगे ! नीलू मैंने तुम्हे मना किया ना, उसे मत छुओ ! सान्वी प्लीज वापिस आओ !
भैया कहाँ गए थे आप ? कुछ खाया भी नहीं आपने ?
कुछ नहीं, बस जब भी देहरादून जैसी खुली जगह पर आता हूँ तो मन को अलग शान्ति मिलती है, बस गार्डन में टहल रहा था |
अच्छा भैया राहुल की शादी की तरीक पंडित जी ने 25 नवंबर दी है | समझ नहीं आ रहा एक महीने में कैसे सारी तैयारियां होंगी |
सब हो जाएगा दीदी, हम है ना आपके साथ |
बाबूजी भी आएंगे ?
हां, उनके बिना शादी कैसे होगी ? ऐसा क्यों बोल रहे हो ?
फिर मेरे बिना शादी कर लेना | (भाई गुस्से में घर के बाहर निकल जाता है |)
इसको हो क्या गया है अचानक ? हद होती है ! मामा नहीं आएगा क्या शादी में ? क्या प्रॉब्लम क्या है इसको बाबूजी से | बूढ़े बाप का बुढ़ापा तो अपनों के साथ रहने की चाह में ही गुजर जायेगा | पहले तो तुमने अलग रहने का डिसीज़न ले लिया… मम्मी के बिना पापा वैसे ही कितने अकेले पड़ गए थे और तुम लोगो को तो बस अपनी पड़ी थी… कुछ नहीं तो उनकी उम्र का ही ख़याल किया होता |
कैसा हो गया है मेरा भाई.. शर्म नहीं आती !
बस दीदी, आप मेरे बारे में कुछ कहे तो ठीक, लेकिन इनको गलत ना कहना | लगता है आज मुझे सब सच बताना ही पड़ेगा | दुनिया वाले तो हमे खुदगर्ज समझते हैं लेकिन हमारे पापा से अलग रहने का कोई और कारण है |
एक सुबह मैं घर में अकेले थी | नहा के कमरे से बाहर आयी तो ब्लाउज, पेटीकोट में ही कमरे में आ गयी, बाथरूम से बाहर निकली तो कमरे में पापा मेरे बैड पर बैठे थे |
पापा आप ? मैंने झट से साड़ी लपेट ली |

मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- अरे इसकी कोई जरूरत नहीं, अंकित और मुझमे कोई फर्क नहीं | मुझे भूख लगी थी तो मैं !
मुझे बड़ा अजीब सा लगा, मैं झट से बाथरूम में चली गयी | और मैंने सारी बात अंकित को बतायी | अंकित ने कहा, पापा की बात का बुरा मत मानो, वो कभी-कभी अजीब सी बातें कर देते हैं पर दिल में कुछ नहीं |
मैंने भी इस बात को हल्के में लिया | फिर एक दिन नीलू और सान्वी दोनों खेल रही थी कि सान्वी ने नीलू को कहा चल दादाजी वाली गेम खेलते हैं |
कौन सी गेम ?
देख तुझे पहले मुझे टांगो पर गुदगुदी करनी है फिर मैं तेरे करुँगी! फिर हाथों पर, फिर गालो पर, फिर मैं तेरे करुँगी, फिर पीठ पर और फिर मैं तेरे करुँगी |
मैं हैरान ! ये सब क्या है ? कोई इतना बड़ा बुजुर्ग 6 साल की बच्ची के साथ ऐसा घिनोना खेल खेलता है? मैंने उसी पल सान्वी को समझाया आज के बाद ऐसा कुछ भी नहीं खेलोगी तुम किसी के साथ |

उसे मैंने बाद में गुड टच और बैड टच के बारे में भी समझाया | सारी बात मैंने अंकित को बतायी तब भी अंकित ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया |
लेकिन एक दिन पापा नीलू के साथ अंदर कमरे में बैठे थे और बाहर आँगन में अंकित अखबार पड़ रहे थे | वही खिड़की से जब अंकित ने अंदर की और झाँका तो पाया पापा आज इतनी बेशर्म हरकत कर कर रहे थे कि बोलते हुए भी शर्म आती है | वो नीलू से बात करते करते उसकी फ्रॉक की ऊपर की ज़िप खोल अपना हाथ उसकी पीठ पर फ़ेर रहे थे | और ये सब अपनी आँखों से देखा अंकित ने |

फिर क्या था ! उसी वक़्त हमने वो घर छोड़ दिया और अलग रहने का फैसला किया |
जो इंसान इतनी जलील हरकत कर सकता वो कुछ भी कर सकता है और 2 बेटियां है दीदी मेरी, मुझे बहुत डर लगता है इन सब बातों से |
आज 4 साल हो गए लेकिन अंकित ने पापा से बात तक नहीं की | और उस दिन उन्हें बोल दिया कि मेरा आप से कोई रिश्ता नहीं |
सविता की आँखों से आंसू और अपने बाप की हरकतों पर घिन जैसी भावनाएं आने लगी | पर वो कुछ ना कर सकी |
अरे क्या हो गया ? कहाँ खो गयी सविता ? ये आंसू कैसे ? शादी में आये मेहमान ने पूछा |
अरे कुछ नहीं, ये तो बेटे की ख़ुशी के आंसू है, भाई को ऑफिस टूर के लिए विदेश जाना पड़ा तो बच्चे और भाभी भी साथ चले गए | लोगों का तो मुँह सविता ने बंद कर दिया लेकिन भाई-भाभी की कमी को कोई पूरा ना कर सका | वो करती भी क्या ? बाप को नहीं बुलाती तो सब बोलते भाई ने पहले ही छोड़ दिया अब बहन भी यही कर रही है ! और कारण क्या देती ? सबको अगर सच पता चल जाता तो दुनिया थू-थू करती| ना जाने लोग क्या कहेंगे जैसे ख्यालों की वजह से हम कितनी बार अपनी इच्छाओ के विपरीत जाते है !
चित्र स्त्रोत -La leache league,Mr.popat, hotstar,pixabay, savdhaan India
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