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इतना खूबसूरत सरप्राइज!

Parul Sachdeva | अक्टूबर 5, 2018

कॉलेज के जमाने में शालू अपनी फिगर को लेकर बहुत ही सचेत थी,  एक स्लिम ट्रिम, बला की खूबसूरत लेकिन शादी के बाद उसका वजन बढ़ने लगा | हर बार पतला होने के ख्याली-पुलाव बनाती और हमेशा उसके पतला होने के संकल्प पर पूर्ण विराम लग जाता |

इस बार उसने वापिस पहले जैसी शालू बनने का निर्णय ले लिया था | हर रोज किचन में एक पैर पर खड़ी दोपहर का खाना भी नाश्ते के समय ही बना लेती क्योंकि जिम से आने के बाद उसे खूब भूख लगती और बनाने की हिम्मत न होती |

शालू का पति बड़ा ही शकी इंसान था |

शायद अपनी बीवी की सुंदरता को लेकर कुछ ज्यादा ही पोजेज़िव था | सोसिटी में ही जिम था तो शालू को वहा जाने की मंजूरी मिल गयी | नहीं तो हर जगह हाथ पकड़ के साथ जाता | यहाँ तक कि शालू को कहता सलवार सूट पहन के जिम जाओ, वही जिम क्लोथ्स पहन लेना और वापिस सलवार सूट में आना | शालू पढ़ी लिखी लड़की थी लेकिन शादी के बाद घर संभालने के चाव की वजह से नौकरी छोड़ दी | अपने इसी निर्णय पर कई बार शालू को पछतावा होता लेकिन अब वो चाह कर भी अपने पति गौतम को अपने दिल की बात ना बता पाती | जो इंसान जिम के लिए लेडीज़ टाइम पर जाने का हुक्म देता वो भला बाहर जाकर आदमियों के बीच नौकरी कहाँ करने देगा – यही सोच वो अपने मन को हर बार मार लेती |

रोज की तरह वक़्त से पहले खाना बनाने के लिए अभी उसने दाल को तड़का लगाने के लिए प्याज डाले ही थे कि उसका फ़ोन बज पड़ा | उसने गैस को सिम किया और फ़ोन की तरफ भागी | फ़ोन उसके मामा ससुर का था |

एक नंबर और नाम लिखो बेटा | ये याद से गौतम को दे देना | ये आदमी उसकी बड़ी कंपनी में नौकरी दिलवाने में काम आ सकता है |

शालू ने फ़ोन तो रख दिया लेकिन उस कागज़ पर लिखा नाम किसी बड़ी कंपनी के सीईओ का था – नितिन खोसला | ये नाम उसे 10 साल पीछे ले गया | वो सोचने लगी क्या ये वही नितिन खोसला है जिसकी सुद्ध में वो दुनिया भूल गयी थी या कोई और | वो हर सोशल साइट पर उसका नाम सर्च करती लेकिन 20 नितिन आ जाते लेकिन उसका नितिन नहीं | आज वो नाम उसकी झोली में आकर खुद ही गिर गया |

उसने वो नंबर मिलाया |

एक भारी सी आवाज़ ने हेलो बोला और वो इस आवाज़ को अच्छे से पहचानती थी |

शालू ने कांपती आवाज़ में कहा -हेलो, इस दिस नितिन खोसला ?

हां बोल रहा हूँ, हू इज़ कॉलिंग ?

शालू -शालू कुकरेजा, बी.कॉम होनोर्स, हंसराज कॉलेज |

ओह शालू ? तुम कैसी हो ?

पहचान लिया ?

हां, तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ, कितने सालो बाद मेरी याद आयी |

एक बात बताऊ किसी से शेयर नहीं करना | मेरे मामाजी ने ये नंबर दिया | एक्चुअली मेरे पति गौतम ने तुम्हारी कंपनी में मैनेजर के तौर पर इंटरव्यू दिया है | तुम कहाँ थे गौतम -मैंने तुम्हे कहा नहीं ढूंढा ? कोई सोशल नेटवर्किंग साइट नहीं छोड़ी, तुम्हारे घर के पते पर लेटर्स भेजे  पर कोई जवाब नहीं | मैंने ज़िन्दगी से सिर्फ एक चीज़ मांगी थी वो भी नहीं मिल पायी | शालू एक सांस में बोलती चली गयी और एकाएक चुप हो गयी जैसे उसे अपनी बोली हुई बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ |

चुप क्यों हो गयी, बोलो ना ! बहुत दिनों बाद तुम्हे सुन रहा हूँ | तुम भी तो मुझे बहुत पसंद थी | लेकिन कभी मुँह पर अपने प्यार का इज़हार करने की हिम्मत ही नहीं हुयी | छोटे शहर से था बड़ी बातें करने नहीं आती थी मुझे |

एक बार तो कहा होता – शालू ने झट से कहा |

हिम्मत ही नहीं हुई शालू | याद है उस राहुल ने तुम्हे प्रोपोज किया था तो तुमने कैसे पूरे कॉलेज के सामने उसकी बेजत्ती की थी | मैं तो तब से डर गया |

तुम्हारी बात और थी नितिन | कितने साल तुम्हारा इंतज़ार किया | थक कर शादी कर ली | एक अफेयर तक नहीं किया |

काश हम एक साल पहले मिले होते ! मैंने भी पिछले साल नवम्बर में ही शादी की |

मिल जाते नितिन पर तुमने कोशिश ही नहीं की |

अब कुछ नहीं हो सकता लेकिन मेरी आत्मा की एक इच्छा थी कि तुम्हे एक बार कह सकूँ कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती थी | आज वो बेचैनी मिट गयी | शालू ने दिल का बोझ हल्का कर कहा |

पर मेरी बेचैनी उसका क्या ? आज तुम्हारी आवाज़ सुन 10 साल पीछे चला गया मैं ! काश मैं एक बार कह पाता |

अब कुछ नहीं हो सकता | हम दोनों की ही शादी हो चुकी है | अगर अब हमने एक दूसरे से वास्ता रखा तो दोनों का ही बसा-बसाया घर खराब हो जाएगा |

तुम ठीक कहती हो | इसमें सुहानी और गौतम का क्या कसूर ! शालू थैंक यू इतना खूबसूरत सरप्राइज देने के लिए |

लेकिन अब तुम मुझे कभी फोन नहीं करना वरना गौतम और मेरे रिश्ते में दरार आ सकती है | और मेरा नंबर डिलीट कर देना | बी हैप्पी ऑलवेज !

योर हैप्पीनेस इज़ माय हैप्पीनेस ! आई विल नेवर कॉल यू ! टेक केयर !

 

चित्र स्त्रोत-Blog.anytimefitness.com, abovewhispers, careerstint

Parul Sachdeva

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